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उत्तर पूर्व में 'गज यात्रा' आरंभ की गई

May 30, 2018 11:40 IST
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 28 मई 2018 को गारो पर्वतों में स्थित तूरा नामक गांव से ‘गज यात्रा’ का शुभारंभ किया गया. इसका आयोजन वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) द्वारा पर्यावरण मंत्रालय के साथ मिलकर किया जा रहा है. बॉलीवुड अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा ने भी हरी झंडी दिखाकर यात्रा की शुरुआत की.

गज यात्रा

गज यात्रा का उद्देश्य भारत में मौजूद हाथियों की आवाजाही के लिए उन्हें सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना है. गज यात्रा के तहत भारत में 100 ‘एलीफैंट कॉरिडोर’ बनाए जायेंगे. इसमें से चार मेघालय में स्थित हैं, जिसमें से एक सिजू-रेवाक कॉरिडोर है जहां रोजाना लगभग 1,000 हाथी बालपक्रम एवं नोकरेक राष्ट्रीय उद्यानों के बीच आते-जाते हैं.

उत्तर-पूर्व भारत में यह अभियान विशेष रूप से गारो पहाड़ियों में लॉन्च किया गया. इस स्थान पर लोगों ने सामुदायिक वनों का निर्माण किया है ताकि इस क्षेत्र में मौजूद हाथियों को संरक्षित किया जा सके तथा लोगों के साथ उनका बेहतर ताल-मेल स्थापित हो सके.

हाथियों की बहुलता वाले 12 राज्यों में वहां की स्थानीय कला और दस्तकारी में हाथी और अन्य वन्य जानवरों के प्रसंग को शामिल किया जा रहा है. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया ‘गजु’ शुभंकर हाथी इस अभियान में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है. यह अभियान वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया के सहयोग से चलाया जाता है.

उद्देश्य

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हाथियों का संरक्षण है. आईयूसीएन की रेड लिस्ट में अफ्रीकन हाथी, ‘कमजोर हाथी’ एवं एशियन हाथी ‘लुप्त प्राय’ श्रेणी में दिखाए गए है. हाथियों की जनसंख्या के बारे में प्राप्त आकलन के अनुसार विश्व भर में 4,00,000 अफ्रीकन हाथी और 40,000 एशियन हाथी हैं. भारत सरकार इस अभियान को हाथियों के प्रति जागरूकता और इनके संरक्षण के प्रयासों को बढ़ाने के लिए इसे चला रही है.


राईट ऑफ़ पैसेज क्या है?

•    हाथियों के लिए सामुदायिक क्षेत्रों में सुरक्षित आवाजाही के रास्ते तैयार करना.

•    इस अभियान के तहत स्थानीय लोगों की सहायता ली जा रही है. उन्हें वाईल्ड लाईफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया द्वारा प्रशिक्षित करके हाथियों के संरक्षण में भूमिका तय की जाती है.

•    एक राष्ट्रीय उद्यान, वन अथवा वनीय क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक के लिए मार्ग का निर्माण किया जाता है जिसमें स्थानीय लोगों को अपने आसपास के परिवेश में बदलाव करने के लिए कहा जाता है. मसलन, उन्हें अधिक वृक्ष लगाने, हाथियों की आवाजाही के दौरान विघ्न न डालने एवं वनों को संरक्षित करने के लिए कहा जाता है.

 

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