विश्व के कई देशों में रेनसमवेयर वायरस का हमला, कंप्यूटर ठप

यूरोप, अमेरिका, चीन और रूस जैसे कई देशों में कंप्यूटर्स ने काम करना बंद कर दिया . साइबर हमला के लिए रेनसमवेयर नाम के वायरस को जिम्मेदार माना जा रहा है.

Created On: May 13, 2017 10:00 ISTModified On: May 13, 2017 09:58 IST

यूरोप समेत दुनिया के कई देशों में कंप्यूटर वायरस (साइबर हमला) हमला हुआ है. यूरोप, अमेरिका, चीन और रूस जैसे कई देशों में कंप्यूटर्स ने काम करना बंद कर दिया . साइबर हमला के लिए रेनसमवेयर नाम के वायरस को जिम्मेदार माना जा रहा है. ब्रिटेन की नेशनल हेल्थसर्विस रेनसमवेयर से बुरी तरह प्रभावित हुई है.  

बिटकॉइन के माध्यम से वसूली-
इंग्लैंड के कई अस्पतालों में कंप्यूटर खोलने में परेशानी हुई. जो कंप्यूटर्स हैक किए गए हैं उन्हें खोलने पर एक मैसेज दिखाई दे रहा है जिसमें कहा गया है कि फ़ाइल रिकवर करना चाहते हो तो पैसे चुकाने होंगे. बिटकॉइन में फिरौती मांगे जाने की खबर है.

रेनसमवेयर वायरस के बारे में-

  • रेनसमवेयर एक ऐसा वायरस है जो कंप्यूटर्स फ़ाइल को बर्बाद करने की धमकी देता है. धमकी दी जाती है कि यदि अपनी फ़ाइलों को बचाना है तो फीस चुकानी होगी.
  • ये वायरस कंप्यूटर में मौजूद फ़ाइलों और वीडियो को इनक्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिरौती देने के बाद ही खोला जा सकता है. 
  • इस कंप्यूटर वायरस का प्रभाव अभी भारत में नहीं हुआ है. इसका हमला भारत पर कभी भी हो सकता है.

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कंप्यूटर वायरस से बचाव के उपाय-

  • कंप्यूटर वायरस से बचाव हेतु अपने सिस्टम में किसी अच्छी कंपनी का एंटी वायरस डालें. एंटी वायरस की आखिरी तारीख याद रखें और उसे अपडेट कराते रहें. जब भी अपने कंप्यूटर को मोबाइल, पैन ड्राइव या किसी दूसरे डिवाइस से जोड़ें तो उसे स्कैन करें.
  • किसी ऑनलाइन साइट से कुछ डाउनलोड करें या कुछ देखें तो पहले देख लें कि वो साइट रजिस्टर्ड हो. अपने सिस्टम को समय समय पर फॉर्मेट कराते रहें.

माना जा रहा है कि हैकर्स ने अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर इतने बड़े पैमाने पर साइबर अटैक किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका की नेशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी जिस तकनीक का इस्तेमाल करती है वह इंटरनेट पर लीक हो गई. हैकर्स ने उसी तकनीक का इस्तेमाल कर संदेश छोड़ा कि अगर सबकुछ फिर से पहले जैसा करने है तो इन देशों को बिटकॉन में फिरौती देनी होगी. फाइल रिकवर करने के बदले 300 डॉलर बिटक्वाइन की मांग की गई है.
 
ब्रिटेन की तरह ही स्पेन, पुर्तगाल और रूस में भी साइबर हमले हुए. 90 से ज्यादा देश इस साइबर हमले की चपेट में हैं. सुरक्षा फर्म कैस्परस्की लैब और अवेस्टसेड ने इस हमले के लिए जिम्मेदार मैलवेयर की पहचान की है. दोनों सुरक्षा फर्मों का कहना है कि इस साइबर हमले से रूस सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है.

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