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इलेक्टोरल बांड की अधिसूचना जारी, अवैध चंदों पर लगेगी रोक

Jan 3, 2018 09:57 IST
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देश में राजनीतिक चंदों के संदिग्ध प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए, भारत सरकार ने इलेक्टोरल बांड के लिए अधिसूचना जारी की है. अब इलेक्टोरल बांड के जारी होने के साथ, चंदा देने वाले दाता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के निर्दिष्ट शाखाओं से इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकते हैं, और राजनीतिक दल उसे प्राप्त करने के बाद एक नामित बैंक खाते के माध्यम से इस बांड को नकदी में बदल सकते हैं.

इलेक्टोरल बांड को राजनीतिक दलों के नकद दान के विकल्प के रूप में देख जा रहा है. अब यह इलेक्टोरल बांड एसबीआई शाखाओं में जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों के लिए उपलब्ध होगा.

चुनाव बांड की योजना का मुख्य आकर्षण

  1. इलेक्टोरल बॉन्ड एक प्रोमिसरी नोट (पी नोट्स) और एक ब्याज-मुक्त बैंकिंग उपकरण की प्रकृति में वाहक साधन होगा.
  2. कोई भी भारतीय नागरिक या भारत में स्थापित संस्था इसे खरीदने के हकदार होगा.
  3. इलेक्टोरल बॉन्ड 1000 रुपये, 10000, 100,000, 1000000 और 1, 00, 00,000 के गुणकों में जारी किए जाएंगे एसबीआई की निर्दिष्ट शाखाओं से, किसी भी मूल्य के लिए खरीदे जा सकते हैं.
  4. इलेक्टोरल बॉण्ड के खरीददार को सभी केवाईसी नियमों को पूरा करना होगा.
  5. इलेक्टोरल बॉन्ड पर लेनदार या खरीददार का नाम नहीं होगा.
  6. इलेक्टोरल बॉन्ड सिर्फ 15 दिन के लिए वैध होगा, जिसके दौरान इसे राजनीतिक दलों को दान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
  7. केवल वे राजनीतिक दल इलेक्टोरल बॉन्ड प्राप्त करने के पात्र होंगे जो आरपीए अधिनियम (Representation of the Peoples Act), 1951 की धारा 29-ए के तहत पंजीकृत हैं, और पिछले आम चुनाव या विधान सभा के मतदान में कम से कम 1% वोट हासिल कर पाए हों.
  8. इलेक्टोरल बॉण्ड योजना जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में 10 दिनों की अवधि के लिए खरीदने के लिए उपलब्ध होगी.

इलेक्टोरल बॉण्ड क्या है?
यह राजनीतिक दल को दान करने के लिए एक पारदर्शी टूल है. दाता इस बांड को डिजीटल या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकता है, फिर, राजनीतिक दल जिसके लिए दाता ने दान किया है, इन बांडों को अपने बैंक खातों के माध्यम से नकद में वापस ले सकते हैं.
इस लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खाते को चुनाव आयोग के संज्ञान में लाना होगा.

इलेक्टोरल बॉण्ड महत्वपूर्ण क्यों है?

इलेक्टोरल बॉण्ड का लक्ष्य है कि दान दाता दान करने के लिए बैंकिंग मार्ग का इस्तेमाल करे, ताकि जारीकर्ता प्राधिकरण में उसकी पहचान बनी रहे.
ऐसा इसलिए क्योंकि एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के मुताबिक, भारत में, राजनीतिक दल अज्ञात स्रोतों से नकद दान स्वीकार करते हैं और पिछले 11 वर्ष की अवधि में पार्टी निधि में 11,300 करोड़ रुपए का लगभग 70% अज्ञात स्रोतों से आया है.