पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा में आर्थिक आधार पर मिलने वाले आरक्षण पर रोक लगाई

उच्च न्यायालय में न्यायाधीश राजेश बिंदल द्वारा यह निर्णय दिया गया. न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल आर्थिक रूप से पिछड़ा होना शिक्षा में आरक्षण दिए जाने का आधार नहीं हो सकता. न्यायालय के अनुसार इन व्यक्तियों का सामाजिक एवं शैक्षिणक पिछड़ा होना भी आवश्यक है.

Created On: Sep 23, 2016 09:40 ISTModified On: Sep 23, 2016 11:41 IST

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 22 सितंबर 2016 को फैसला सुनाते हुए हरियाणा में आर्थिक आधार पर दिए जा रहे आरक्षण पर रोक लगाए जाने की घोषणा की.

हरियाणा में आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर शैक्षिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था. इस प्रक्रिया के खिलाफ कालिंदी वशिष्ठ नामक व्यक्ति ने याचिका दायर करके इस पर रोक लगाये जाने की मांग की थी.

उच्च न्यायालय में न्यायाधीश राजेश बिंदल द्वारा यह निर्णय दिया गया. न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल आर्थिक रूप से पिछड़ा होना शिक्षा में आरक्षण दिए जाने का आधार नहीं हो सकता. न्यायालय के अनुसार इन व्यक्तियों का सामाजिक एवं शैक्षिणक पिछड़ा होना भी आवश्यक है.

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गौरतलब है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वर्ष 2013 में इस संबंध में अधिसूचना जारी की गयी थी. इसके अनुसार 2.40 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले व्यक्तियों को आर्थिक रूप से पिछड़ा माना गया तथा उन्हें 10 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार दिए जाने का निर्णय लिया गया.  

याचिकाकर्ता राजेश बिंदल के वकील नीरज गुप्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2010 में गुजरात सरकार द्वारा 10 प्रतिशत आर्थिक आरक्षण दिए जाने की घोषणा की गयी थी लेकिन वर्ष 2016 में गुजरात उच्च न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया था.

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