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भारत विश्व सीमा शुल्क संगठन के एशिया प्रशांत क्षेत्र का उपाध्यक्ष बना

Jul 17, 2018 08:53 IST

    भारत जुलाई, 2018 से जून, 2020 तक दो वर्ष की अवधि के लिए विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ) के एशिया प्रशांत क्षेत्र का उपाध्यक्ष बन गया है. डब्ल्यूसीओ ने अपनी सदस्यता को छह क्षेत्रों में विभाजित कर दिया है.
    छह क्षेत्र में से प्रत्येक का प्रतिनिधित्व डब्ल्यूसीओ परिषद में क्षेत्रीय रूप से निर्वाचित उपाध्यक्ष द्वारा किया जाता है. डब्ल्यूसीओ दुनिया भर में 182 सीमा शुल्क प्रशासकों का प्रतिनिधित्व करता है जो सामूहिक रूप से विश्व व्यापार के लगभग 98 प्रतिशत को प्रोसेस करते हैं.

    भारत के लिए महत्व


    •    डब्ल्यूसीओ के एशिया प्रशांत (एपी) क्षेत्र का उपाध्यक्ष बनना भारत को नेतृत्व की भूमिका में सक्षम बनाएगा.

    •    उपाध्यक्ष पद ग्रहण करने के अवसर पर 16 जुलाई, 2018 को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की साझीदारी में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क (सीबीआईसी) द्वारा एक समारोह का आयोजन किया जा रहा है.

    •    इस समारोह में एशिया प्रशांत क्षेत्र के 33 देशों के सीमा शुल्क शिष्टमंडल, भारत में विभिन्न बंदरगाहों के सीमा शुल्क अधिकारी, साझीदार सरकार एजेन्सियां तथा प्रतिनिधि भाग लेंगे.

    •    डब्ल्यूसीओ के महासचिव कुनियो मिकुरिया प्रमुख भाषण देंगे. उद्घाटन समारोह की थीम है ‘सीमा शुल्क-व्यापार सुगमीकरण को प्रोत्साहन.’

    विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ)


    •    विश्व सीमा शुल्क संगठन की स्थापना 1952 में सीमा शुल्क सहयोग परिषद के रूप में की गयी थी.

    •    यह एक अंतरसरकारी संगठन है. डब्ल्यूसीओ का मूल उद्देश्य संपूर्ण विश्व में सीमा शुल्क प्रशासनों की प्रभावशीलता एवं कार्यक्षमता में वृद्धि लाना है.

    •    वर्ष 1947 में व्यापार एवं प्रशुल्कों पर सामान्य समझौता गैट, द्वारा पहचाने गए सीमाकर मामलों के परीक्षण हेतु 13 यूरोपीय देशों ने एक अध्ययन दल की स्थापना की.

    •    डब्ल्यूसीओ की सदस्यता निरंतर विश्व के सभी क्षेत्रों में पहुंच गई है. वर्ष 1994 में संगठन ने इसका वर्तमान नाम विश्व सीमा शुल्क संगठन (डब्ल्यूसीओ) अपनाया. आज, डब्ल्यूसीओ के सदस्य विश्व के 98 प्रतिशत से अधिक व्यापार के सीमाकर नियंत्रण के लिए उत्तरदायी हैं.

    •    डब्ल्यूसीओ के उल्लेखनीय कार्य क्षेत्रों में शामिल हैं - वैश्विक मानकों का विकास, सीमावर्ती प्रक्रियाओं का सरलीकरण एवं हितकारी करना व्यापार आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुसाध्य बनाना, सीमाकर प्रवर्तन और सम्बद्ध गतिविधियों में वृद्धि करना, नकल विरोधी कदम उठाना आदि.

     

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