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भारत में सिंधु डॉल्फिन की पहली संगठित जनगणना आरंभ की गई

May 3, 2018 18:14 IST

    पंजाब सरकार ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ मिलकर सिंधु नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन (Indus Dolphin) की जनगणना आरंभ की. यह विश्व की विलुप्प्राय स्तनधारी प्रजाति है.

    इसका उद्देश्य इस प्रजाति का संरक्षण करना है. सिंधु नदी में पाई जाने वाली डॉल्फिन केवल भारत और पाकिस्तान के मध्य 185 किलोमीटर के क्षेत्र में पाई जाती है. यह डॉल्फिन तलवाडा तथा हरिके पत्तन के बीच भारत की ब्यास नदी में पाई जाती हैं.

    उद्देश्य

    इस जनगणना का मुख्य उद्देश्य इस प्रजाति की डॉल्फिन की सटीक जनसंख्या का पता लगाना है. इसके उपरांत ही इनके संरक्षण का कार्यक्रम चलाया जायेगा.

    महत्व

    यह भारत की पहली संगठित डॉल्फिन जनगणना है जिसे पांच वर्ष की अवधि में पूरा किया जायेगा. इससे पहले बहुत कम डॉल्फिन चिन्हित की गई थीं.

    पंजाब सरकार के वन एवं वन्यजीव संरक्षण विभाग तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया इस कार्य को मिलकर पूरा करेंगे. इसके अंतर्गत दो टीमें बनाकर डॉल्फिन की जनगणना की जाएगी.

    कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं

    •    सिंधु डॉल्फिन (Indus Dolphin) की प्रजाति मुख्यतः भारत और पाकिस्तान में पाई जाती है. इस क्षेत्र में डॉल्फिन की जनसंख्या अनुमानतः 1800 से अधिक है.

    •    भारत में इस प्रजाति की डॉल्फिन की बेहद कम संख्या मौजूद है जो कि केवल ब्यास नदी में पाई जाती है.

    •    विशेषज्ञों के अनुसार, सदियों पहले इस प्रजाति की डॉल्फिन सतलुज नदी में भी पाई जाती थी. सतलुज में हुए प्रदूषण एवं शहरीकरण के कारण इस नदी की सभी डॉल्फिन विलुप्त हो गईं.

    •    इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ़ नेचर (IUCN) के अनुसार वर्ष 1944 से अब तक इस क्षेत्र में पाई जानी वाली डॉल्फिन की जनसंख्या में 50 प्रतिशत की कमी आई है.

    डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया के रिवर वेटलैंड एंड वॉटर पालिसी के निदेशक सुरेश बाबू द्वारा जारी बयान में कहा गया कि डॉल्फिन की मौजूदगी नदी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देती है. यदि नदी साफ़-सुथरी है तो वहां डॉल्फिन रह पाएंगी अन्यथा सतलुज से विलुप्त हुई डॉल्फिन का उदारहण सबके सामने है.

     

     

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