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भारत ने सुनामी तरंगों की भविष्यवाणी हेतु तकनीक विकसित की

May 7, 2018 15:49 IST

    भारत में जल्द ही विनाशकारी समुद्री तूफान 'सुनामी' के तट तक पहुंचने के समय के बारे में पूर्वानुमान लगाना संभव हो सकेगा. इस पूर्वानुमान से जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी.

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    मॉडल से संबंधित मुख्य तथ्य:

    •    भूविज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशियन इंर्फोमेशन सर्विसेज (आईएनसीओआईएस) ने इस संबंध में एक तकनीक विकसित किया है.

    •    इस मॉडल से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा कि समुद्री पानी कितने समय बाद तट तक पहुंचेगा.

    •    यह देश की सुनामी त्वरित चेतावनी प्रणाली के तहत लेवल-3 का अलर्ट होगा.

    •    इस प्रणाली को वर्ष 2004 की घातक सुनामी के बाद शुरू किया गया था.

    •    लेवल-1 के तहत सुनामी की तीव्रता की जानकारी दी जाती है.

    •    लेवल- 2 में संभावित सुनामी और उसकी लहरों की ऊंचाई के बारे में जानकारी दी जाती है.

                                                                           2004 की सुनामी

    • हिंद महासागर में 26 दिसंबर 2004 को आई सूनामी लहर ने भारत समेत दुनिया के कई देशों में भारी तबाही मचाई थी.
    • हिंद महासागर में 9.15 की तीव्रता वाले भूकंप ने सूनामी लहर पैदा किया.
    • भारत, श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित कुछ और देशों में लाखों लोग मारे गए.
    • लहरों ने थाइलैंड, मेडागास्कर, मालदीव, मलेशिया, म्यांमार, सेशेल्स, सोमालिया, तंजानिया, केन्या, बांग्लादेश तक भी असर डाला.
    • इस भयानक प्राकृतिक आपदा में लगभग 2 लाख 30 हजार लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.
    • सबसे ज्यादा मार इंडोनेशिया, दक्षिण भारत और श्रीलंका पर पड़ी. सूनामी से 13 प्रभावित देशों में सात लाख तीस हजार लोग विस्थापित हुए.
    • इस आपदा से निपटने और पुर्ननिर्माण के लिए सरकारी सहायता और निजी दान के रूप में करीब 13.6 अरब डॉलर खर्च किए गए.
    • यह विश्व की सबसे भीषण सुनामियों में से एक थी.
    • सुनामी के दौरान तट पर 30 मीटर तक की लहरें उठी थीं.

     

    उद्देश्य:

    समुद्री लहर को लेकर एक मॉडल तैयार किया गया है, जिससे यह भविष्यवाणी करने में मदद मिलेगी कि लहर भूमि पर कितनी दूर तक जाएगी. यह मॉडल अब इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.

    यह भी पढ़ें: भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर होगा: हॉवर्ड अध्ययन

     

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