भारत और मालदीव के बीच टेक्नोलॉजी समेत चार समझौतों पर हस्ताक्षर

इसके साथ ही भारत इस द्विपीय देश को 1.4 अरब डॉलर के ऋण प्रदान करेगा. यह सहायता राशि भारत द्वारा मालदीव को दी जाने वाली सबसे बड़ी राशि है.

Created On: Dec 18, 2018 11:12 ISTModified On: Dec 18, 2018 11:24 IST

भारत और मालदीव ने 17 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद हिंद महासागर में शांति व सुरक्षा को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है.

इसके साथ ही भारत इस द्विपीय देश को 1.4 अरब डॉलर के ऋण प्रदान करेगा. यह सहायता राशि भारत द्वारा मालदीव को दी जाने वाली सबसे बड़ी राशि है. दोनों पक्षों ने संस्कृति सहयोग, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सहयोग, कृषि व्यापार के लिए बेहतर वातावरण बनाने समेत चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए.

 

मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. इब्राहिम सोलिह ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकत की. यहां दोनों देशो के बीच प्रतिनिधि मंडल स्तर की बातचीत हुई.

राष्ट्रपति भवन में मालदीव के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह का भव्य स्वागत हुआ. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गर्मजोशी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत किया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके साथ वहां मौजूद थे.

इब्राहिम सोलिह नवंबर 2018 में मालदीव के राष्ट्रपति बने थे. पीएम नरेंद्र मोदी 17 नवंबर 2018 को इब्राहिम सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे. राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह को कार्यभार संभालने के बाद उनकी पहली विदेशी यात्रा है.

 

समझौते से संबंधित मुख्य तथ्य:

•   भारत अगले पांच वर्षों में मालदीव के नागरिकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए अतिरिक्त 1000 सीटें देने का भी निर्णय किया है.

•   दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए भी भारत पूर्ण सहयोग देगा. बेहतर कनेक्टिविटी से वस्तु एवं सेवा, सूचना, विचारों, संस्कृति और लोगों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा.

   बातचीत के दौरान दोनों पक्ष हिंद महासागर में सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमत हुए.

•   भारत और मालदीव ने समुद्री डकैती, आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थो और मानव तस्करी समेत सामान्य चिंताओं के विषय पर द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.

•   भारत ने दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, मानव संसाधन विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि, क्षमता निर्माण और पर्यटन के क्षेत्र में भागादीरी को मजबूत करने का आह्वान किया.

   दोनों देश के नेताओं ने मत्स्य विभाग, पर्यटन, यातायात, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और संचार के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई.

   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव के राष्ट्रमंडल में दोबारा शामिल होने के निर्णय की सराहना की और देश के हिंद महासागर रिम एसोसिएशन में शामिल होने का स्वागत किया.

 

भारतमालदीव सम्बन्ध:

भारत और मालदीव के संबंध सामरिक, आर्थिक और सैन्य सहयोग में दोस्ताना और करीबी रहे हैं. भारत ने द्वीप राष्ट्र पर सुरक्षा बनाए रखने में योगदान दिया हैं. मालदीव अब कम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकलकर एक मध्यम आय वाला देश बन गया है. भारत सरकार की ओर से मालदीव को दी जाने वाली सहायता की सराहना की और घर और अवसंरचना विकास में निजी क्षेत्र की संलिप्तता, जल व निकासी प्रणाली, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा व पर्यटन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों के विकास में सहयोग के लिए पहचान की.

मालदीव हिंद महासागर में स्थित 1200 द्वीपों का देश है, जो भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम है. मालदीव के समुद्री रास्ते से निर्वाध रूप से चीन, जापान और भारत को एनर्जी की सप्लाई होती है.

मालदीव के साथ भारत के सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं. मालदीव के साथ नई दिल्ली का धार्मिक, भाषाई, सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंध है. वर्ष 1965 में आजादी के बाद मालदीव को सबसे पहले मान्यता देने वाले देशों में भारत शामिल था. बाद में भारत ने वर्ष 1972 में मालदीव में अपना दूतावास भी खोला.

 

यह भी पढ़ें: केंद्र सरकार और एडीबी ने असम में बाढ़ और भू-क्षरण में कमी लाने हेतु 60 मिलियन डॉलर का ऋण समझौता किया

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