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भारत और पाकिस्तान ने कैदियों, परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा की

Jan 3, 2019 12:00 IST

भारत और पाकिस्तान ने 01 जनवरी 2019 को द्विपक्षीय समझौते के तहत एक दूसरे की जेलों में बंद कैदियों और परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची साझा की. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत ने 347 पाकिस्तानी कैदियों की सूची द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों के तहत पाकस्तान के साथ साझा की.

वर्ष 1988 में किये गये इस द्विपक्षीय समझौते के तहत दोनों देशों को हिरासत में मौजूद कैदियों की सूची एक साल में दो बार (एक जनवरी और एक जुलाई) एक-दूसरे के साथ साझा करनी होती है. दोनों देश संबंधों में तनाव के बावजूद कैदियों की सूची साझा करने की परंपरा का पालन करते हैं.

 

साझा की गई सूचियों की जानकारी

  • पाकिस्तान द्वारा साझा की गई सूची के अनुसार पाकिस्तान की जेलों में 537 भारतीय कैद हैं. इनमें 483 मछुआरे और 54 अन्य लोग हैं.
  • भारत द्वारा पाकिस्तान को दी गई सूची में बताया गया है कि भारतीय जेलों में 347 पाकिस्तानी नागरिक कैद हैं. इन कैदियों में 98 मछुआरे और 249 अन्य कैदी शामिल हैं.


भारत सरकार द्वारा उठाये गये कदम

भारत सरकार द्वारा इस संदर्भ में उन 17 भारतीय नागरिक कैदियों एवं 369 मछुआरों को रिहा करने में तेजी लाने को कहा है जिनकी नागरिकता की पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा पाकिस्तान से उनके 80 कैदियों के मामले में तेजी से प्रतिक्रिया देने को कहा गया है जिन्होंने अपनी सजा पूरा कर ली है. भारत और पाकिस्तान के बीच 21 मई, 2008 को हुए राजनयिक पहुंच संबंधी समझौते के तहत यह कदम उठाया गया है.

भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौता

•    भारत और पाकिस्तान के मध्य 31 दिसंबर 1988 को यह समझौता किया गया था. यह समझौता 27 जनवरी, 1991 से प्रभावी हुआ था.

•    इसके तहत दोनों देश अपने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची एक-दूसरे के साथ साझा करने की बात कही गई थी.

•    विदेश मंत्रालय ने कहा 1992 से दोनों देश लगातार यह कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच इस तरह की सूची का यह लगातार 28वां आदान-प्रदान है.

•    समझौते के अनुसार दोनों देश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को नष्ट करने, या क्षति पहुंचाने के उद्देश्य से, या इस संबंध में नुकसान पहुंचाने की दृष्टि से विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने से, स्वयं को दूर रखेंगे.

•    दोनों देश प्रत्येक वर्ष 01 जनवरी को अपने-अपने देशों में मौजूद परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी देंगे.

•    इस समझौते पर इस्लामाबाद में हस्ताक्षर किये गये जबकि इसे हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में जारी किया गया.

 

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