भारत ने बनाई फोरेंसिक एकाउंटिंग और जांच मानकों को जारी करने की योजना

FAIS पर विचार करने के लिए द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा एक समिति का गठन किया गया है, जिसे वर्ष 2020 के अंत तक गठित करने की उम्मीद की जा रही है.

Created On: Sep 3, 2020 15:25 ISTModified On: Sep 3, 2020 15:30 IST

भारत सरकार की फोरेंसिक एकाउंटिंग और जांच मानकों (FAIS) को जारी करने की योजना है क्योंकि इसका उद्देश्य जांच करने के लिए बुनियादी गुणवत्ता मानकों को निर्धारित करना है.

FAIS पर विचार करने के लिए दी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) द्वारा एक समिति का गठन किया गया है, जिसे वर्ष 2020 के अंत तक गठित किए जाने की उम्मीद की जा रही है. एक आभासी सम्मेलन के दौरान चार्टर्ड एकाउंटेंट्स निकाय के अध्यक्ष अतुल कुमार गुप्ता ने बताया.

ICAI के अनुसार, फोरेंसिक एकाउंटिंग और जांच मानकों (FAIS) को लागू करने का निर्णय भारत को इन मानकों को जारी करने वाला दुनिया का पहला देश बना देगा.

FAIS का उद्देश्य क्या होगा?

ICAI द्वारा जारी किए गए एक बयान के अनुसार, FAIS के प्रस्तावित उद्देश्य, उन क्षेत्रों में कार्य संचालित करने के लिए बुनियादी गुणवत्ता बेंचमार्क सेट करते हुए, फोरेंसिक और जांच के दोनों क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं को संहिताबद्ध करना होगा.

FAIS की स्थापना क्यों महत्वपूर्ण है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 200 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के लिए फोरेंसिक ऑडिट अनिवार्य कर दिया है. जबकि कंपनियां या ऋणदाता संदिग्ध धोखाधड़ी के मामले में निजी तौर पर इस तरह की जांच के लिए बुलाते हैं या ऐसा ऑडिट करते हैं.

अतुल कुमार गुप्ता के अनुसार, उन सभी कंपनियों के लिए एक सीमा से ऊपर, फोरेंसिक उचित जांच  होनी चाहिए जहां सार्वजनिक हित शामिल है.

इन मानकों को स्थापित करने का निर्णय फोरेंसिक रिपोर्टिंग और जांच के मानकीकरण की कमी के कारण किया गया था, जो ऐसी रिपोर्टों में काफी अंतर पैदा करता है.

अदालती कार्यवाही में साक्ष्य के तौर पर फोरेंसिक रिपोर्ट की गुणवत्ता और उनकी ग्राह्यता में सुधार के अलावा, इस कदम से बैंकों, नियामकों, कॉर्पोरेट संस्थाओं और प्रवर्तन एजेंसियों जैसेकि, आर्थिक अपराध विंग, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को भी लाभ होने की उम्मीद है.

फोरेंसिक एकाउंटिंग और जांच मानक का गठन

FAIS (फोरेंसिक एकाउंटिंग और जांच मानक) में 30 मानक शामिल होंगे जो आवश्यक कार्य/ प्रभाव क्षेत्र के सभी पहलुओं को कवर करते हैं.

ICAI अपने विचार-विमर्श के दौरान, विभिन्न हितधारकों से परामर्श करने की योजना बना रहा है जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड शामिल होंगे.

इन ड्राफ्ट मानकों को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए भी जारी किया जाएगा, जिसके बाद ICAI ये मानक  जारी करेगा.

एक बार इन मानकों को जारी करने के बाद, ये मानक ऐसे सभी ICAI सदस्यों के लिए प्रत्याशित  प्रभाव के साथ अनिवार्य होंगे जो फोरेंसिक और जांच गतिविधियों के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और इन मानकों के अनुपालन में विफलता के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी.

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