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भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह का परिचालन शुरू किया

Jan 8, 2019 11:01 IST

भारत ने ईरान में सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह के परिचालन का दायित्व संभाल लिया है. केंद्र सरकार ने 07 जनवरी 2019 को यह बात कही.

यह पहली बार है कि जब भारत अपने क्षेत्र के बाहर किसी बंदरगाह का परिचालन करेगा. भारत सरकार ने 24 दिसंबर 2018 को आयोजित चाबहार त्रिपक्षीय समझौते की बैठक के दौरान ईरान में शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह (चाबहार) के एक हिस्से का परिचालन अपने हाथ में ले लिया है.

चाबहार स्थित विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) इंडिया पोट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (आईपीजीसीएफजेड) के कार्यालय का भारत, ईरान और अफगानिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने संयक्त रूप से उद्घाटन किया.

 

चाबहार बंदरगाह परियोजना में शामिल:

यह कदम भारत की एक लंबी यात्रा की शुरुआत है. भारत से चाबहार बंदरगाह परियोजना में शामिल होकर एक इतिहास रचा है. भारत चारो तरफ से थल सीमा से घिरे अफगानिस्तान की मदद के लिए क्षेत्रीय सहयोग और संयुक्त प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है.

 

चाबहार बंदरगाह से भारत को फायदे:

चाबहार बंदरगाह का सीधा फायदा भारत के कारोबारियों को होगा. भारतीय कारोबारी अपना सामान बिना किसी रोक-टोक के सीधे ईरान तक भेज पाएंगे. यहां से भारतीय सामान पहुंचने के बाद इसे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों में पहुंचाया जा सकेगा. अब तक इन देशों में जाने के लिए पाकिस्तान रास्ता रोक रहा था.

चाबहार बंदरगाह शुरू होने से भारतीय सामानों के एक्सपोर्ट खर्च काफी कम हो जाएगा. एक अनुमान के मुताबिक एक तिहाई कम हो जाएगा. साथ ही समय भी काफी बचेंगे.

बंदरगाह का परिचालन:

यह पहली बार है कि भारत अपनी सीमा के बाहर किसी बंदरगाह का परिचालन करेगा. इस बंदरगाह के वाणिज्य परिचालान की शुरूआत ब्राजील से 72,458 टन मक्के से लदे एक जहाज के आगमन के साथ हुई. एमवी मैकरास नाम का यह जहाज 30 दिसंबर को बंदरगाह के घाट पर लगा था. यह जहाज साइप्रस में पंजीकृत है. जहाज का माल न्यूमैटिक मशीन से उतारा गया. भारत ने इस बंदरगाह के विकास पर 85.21 मिलियन डॉलर (592 करोड़ रुपये) खर्च किए हैं.

 

ईरान के तेल-गैस संपन्न सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह की पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से दूरी महज 80 किलोमीटर दूरी है. ग्वादर पोर्ट पर चीन का नियंत्रण है और इसके जरिये वह मध्य एशिया के करीब पहुंचता है.

यह बंदरगाह ईरान के लिए रणनीति की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है. इसके माध्यम से भारत के लिए समुद्री सड़क मार्ग से अफगानिस्तान पहुँचने का मार्ग प्रशस्त हो जायेगा और इस स्थान तक पहुँचने के लिए पाकिस्तान के रास्ते की आवश्यकता नहीं होगी.

पृष्ठभूमि:

भारत ने चाबहार बंदरगाह के बारे में ईरान के साथ वर्ष 2003 के आसपास बातचीत शुरू की थी, लेकिन इसे महत्वपूर्ण बल वर्ष 2014 की आखिरी छिमाही में मिला, जिसके परिणामस्वरूप चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए मई 2015 में दोनों देशों के बीच एमओयू पर हस्‍ताक्षर हुए.

इस एमओयू को चाबहार बंदरगाह को उपकरणों से लैस करने और उसका प्रचालन करने के लिए 10 साल के औपचारिक समझौते में परिवर्तित किया गया, जिसे 23 मई 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान निष्‍पादित किया गया.

ईरान के राष्‍ट्रपति डॉ. हसन रुहानी की फरवरी 2018 की भारत यात्रा के दौरान एक अंतरिम अवधि के समझौते की आधारशिला रखी गई. इसके परिणामस्‍वरूप दोनों पक्षों के बीच 6 मई 2018 को औपचारिक अल्‍पावधि समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए.

 

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