नोबल पुरस्कारों का वर्तमान एवं भारत का इतिहास

इस वर्ष किसी भी भारतीय अथवा भारतीय मूल के व्यक्ति को नोबल पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया लेकिन अब तक 5 भारतीय नागरिकों तथा 4 भारतीय मूल के नागरिकों को नोबल पुरस्कार दिया जा चुका है.

Created On: Oct 18, 2016 10:31 ISTModified On: Oct 18, 2016 11:19 IST

अक्टूबर 2016 में नोबल पुरस्कारों की घोषणा के कारण यह पुरस्कार चर्चा में रहे. इस माह डेविड थोलुज, डंकन हेल्डन और माइकल कोस्टरलिट्ज भौतिकी के नोबल पुरस्कार हेतु चयनित किया गया.

जीन पियरे शावेज़, ब्रिटेन के जे फ्रेज़र स्टोडार्ट एवं नीदरलैंड के बर्नार्ड फेरिंगा को इस वर्ष के रसायन विज्ञान के नोबल पुरस्कारों हेतु चुना गया. साथ ही कोलंबिया के राष्ट्रपति जुआन मैनुअल सांतोस नोबल शांति पुरस्कार हेतु चुने गये. ब्रिटिश मूल के अर्थशास्त्री ओलिवर हार्ट और फिनलैंड के बेंग्ट हॉमस्ट्रॉम को अर्थशास्त्र के नोबल हेतु चुना गया.

इस वर्ष किसी भी भारतीय अथवा भारतीय मूल के व्यक्ति को नोबल पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया लेकिन अब तक 5 भारतीय नागरिकों तथा 4 भारतीय मूल के नागरिकों को नोबल पुरस्कार दिया जा चुका है.

रबिन्द्रनाथ टैगोर (1913)

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रबिन्द्रनाथ टैगोर को साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 1913 में साहित्य के नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उस समय वे यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले गैर यूरोपीय व्यक्ति थे. उनके द्वारा रचित ‘गीतांजली’, ‘राष्ट्रवाद’ तथा ‘गोरा’ आदि पुस्तकें आज भी लोगों के बीच अत्यधिक प्रसिद्ध हैं. वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने दो देशों (भारत और बांग्लादेश) के लिए राष्ट्रगान लिखा.

सी वी रमन (1930)

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भारत के महान वैज्ञानिक सी वी रमन को भौतिकी के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के कारण वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया. उन्होंने अपने शोध द्वारा यह सिद्ध किया था कि प्रकाश के पारदर्शी माध्यम से गुजरने पर उसकी तरंगों की लम्बाई में परिवर्तन आता है. इस शोध को आगे चलकर रमन इफ़ेक्ट के नाम से जाना गया.



मदर टेरेसा (1979)

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विश्व भर में प्रेम और सेवा भाव का प्रसार करने वाली समाजसेवी मदर टेरेसा को पीड़ितों तथा निराश्रितों की सहायता करने हेतु वर्ष 1979 में नोबल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया.  मदर टेरेसा अल्बानिया मूल की थीं लेकिन उन्होंने कोलकाता में निर्धनों तथा पीड़ितों को अपना जीवन समर्पित किया. उनकी संस्था मिशनरीज़ ऑफ़ चैरिटी आज भी इसी काम में जुटी है.

अमर्त्य सेन (1998)

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भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को वर्ष 1998 में अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार दिया गया. उनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘द आरग्यूमेंटेटिव इंडियन’ के लिए वे काफी चर्चित रहे लेकिन अर्थशास्त्र में उनका काम उल्लेखनीय रहा है.
उन्होंने विश्व को असमानता पर सिद्धांत से जागरुक करवाया तथा बताया कि भारत और चीन में महिलाओं के अपेक्षा पुरुषों की संख्या ज्यादा क्यों है. साथ ही उन्होंने इस पर भी प्रकाश डाला कि पश्चिमी देशों में मृत्यु दर में कमी के क्या कारण हैं.

कैलाश सत्यार्थी (2014)

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बच्चों के अधिकारों के हक में तथा बाल मजदूरी के खिलाफ विश्वव्यापी आंदोलन चला रहे समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को वर्ष 2014 नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वे ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ तथा 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' नामक संस्थाओं द्वारा अभियान चलाते हैं. इस संस्था द्वारा बच्चों को मजदूरी से छुडवाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाता है.

 

भारतीय मूल के चार विजेता जिन्हें नोबल पुरस्कार मिला –

हरगोबिन्द खुराना (1968)
भारतीय मूल के वैज्ञानिक हरगोबिन्द खुराना को वर्ष 1968 में मेडिसिन के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनके द्वारा किये गये शोध में यह बताया गया कि एंटी बायोटिक्स लेने पर इसका शरीर पर किस प्रकार प्रभाव होता है. भारत में पंजाब में जन्मे खुराना ने अमेरिका के एमआईटी संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने के बाद वहीँ नागरिकता प्राप्त की.

सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर (1983)
सुब्रह्मण्यन् चन्द्रशेखर को 1983 में भौतिकी में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. चंद्रशेखर ने पूर्णतः गणितीय गणनाओं और समीकरणों के आधार पर `चंद्रशेखर सीमा' का विवेचन किया तथा सभी खगोल वैज्ञानिकों ने पाया कि सभी श्वेत वामन तारों का द्रव्यमान चंद्रशेखर द्वारा निर्धारित सीमा में ही सीमित रहता है.

वेंकट रामाकृष्णन (2009)

मदुरै में जन्मे भारतीय मूल के वेंकट रामाकृष्णन को 2009 में राइबोसोम के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली के क्षेत्र में शोध के लिए केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार दिया गया. वे कैम्ब्रिज विश्विद्यालय में अध्यापन करते हैं तथा वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करते हैं.

वी एस नायपॉल (2001)
विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उनके प्रसिद्ध उपन्यासों में ‘हाउस ऑफ़ मिस्टर बिस्वास’, इन अ फ्री स्टेट, अ बेंड इन द रिवर आदि शामिल हैं. त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जन्मे नायपॉल के पूर्वज भारत में गोरखपुर के रहने वाले थे.

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