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इसरो ने गगनयान मिशन के लिए पहला खाका जारी किया

Aug 29, 2018 08:56 IST
    प्रतीकात्मक फोटो
    प्रतीकात्मक फोटो

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में मानव को भेजने की दिशा में 28 अगस्त 2018 को तैयारियों का पहला खाका जारी किया है. इसरो द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वे तयशुदा समय पर अंतरिक्ष में मानव को भेजने के लिए तैयार हैं.

    इसरो के इस मिशन के लिए कुल कार्यक्रम की लागत 10,000 करोड़ रुपये से कम होने की संभावना है. इसरो प्रमुख के शिवान ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले दो मानव रहित गगनयान मिशन लॉन्च किये जायेंगे.

    इसरो द्वारा जारी जानकारी


    •    गगनयान को लॉन्च करने के लिए जीएसएलवी एमके-3 लॉन्च व्हिकल का उपयोग किया जाएगा जो इस मिशन के लिए आवश्यक पेलोड क्षमता से परिपूर्ण है.

    •    अंतरिक्ष में मानव भेजने से पहले दो मानव रहित गगनयान मिशन भेजे जाएंगे.

    •    30 महीने के भीतर पहली मानव रहित उड़ान के साथ ही कुल कार्यक्रम के 2022 से पहले पूरा होने की उम्मीद है.

    •    मिशन का उद्देश्य पांच से सात वर्षों के लिए अंतरिक्ष में तीन सदस्यों का एक दल भेजना है.

    •    इस अंतरिक्ष यान को 300-400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा में रखा जाएगा.

    •    कुल कार्यक्रम की लागत 10,000 करोड़ रुपये से कम होगी.

    •    इसरो ने इस कार्यक्रम के लिए आवश्यक पुन: प्रवेश मिशन क्षमता, क्रू एस्केप सिस्टम, क्रू मॉड्यूल कॉन्फ़िगरेशन, तापीय संरक्षण व्यवस्था, प्रवर्तन व्यवस्था, जीवन रक्षक व्यवस्था की उप-प्रणाली इत्यादि जैसी कुछ महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया है.

    कैसा होगा गगनयान?

    गगनयान का ब्यौरा देते हुए इसरो अध्यक्ष डॉ. शिवन ने कहा कि इसमें एक चालक दल मॉड्यूल, सेवा मॉड्यूल और कक्षीय मॉड्यूल शामिल होगा जिसका वजन लगभग 7 टन होगा और इसे रॉकेट द्वारा भेजा जाएगा. चालक दल मॉड्यूल का आकार 3.7 मीटर x 7 मीटर होगा. पायलटों का चयन और प्रशिक्षण भारतीय वायुसेना और इसरो द्वारा किया जाएगा.

     

    गगनयान मिशन के उद्देश्य

    •    देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के स्तर में वृद्धि

    •    एक राष्ट्रीय परियोजना जिसमें कई संस्थान, अकादमिक और उद्योग शामिल हैं

    •    औद्योगिक विकास में सुधार

    •    युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

    •    सामाजिक लाभ के लिए प्रौद्योगिकी का विकास

    •    अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सुधार


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