लोकसभा में ट्रांसजेंडर विधेयक ध्वनिमत से पारित

सदन ने अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच 27 सरकारी संशोधनों को स्वीकार करने और कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी.

Created On: Dec 17, 2018 17:10 ISTModified On: Dec 17, 2018 17:15 IST

लोकसभा में 17 दिसंबर 2018 को ट्रांसजेंडर विधेयक ध्वनिमत से पारित किया गया. इस विधेयक में उभयलिंगी व्यक्ति अधिकारों का संरक्षण विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें उभयलिंगी व्यक्ति को परिभाषित करने, उनके खिलाफ्र विभेद का निषेध करने एवं उनके लिंग पहचान का अधिकार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है.

सदन ने अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच 27 सरकारी संशोधनों को स्वीकार करने और कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी.

इस विधेयक में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के हितों का खास ध्यान रखा गया है.

इस विषय पर मसौदे को वेबसाइट पर रखा गया था और लोगों से सुझाव मांगे गए थे. संसद की स्थायी समिति ने भी इस पर विचार किया और 27 सुझाव मान लिये गए हैं.

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि उभयलिंगी समुदाय देश में एक ऐसा समुदाय है जो सार्वधिक हाशिये पर है क्योंकि वे ‘पुरूष’ या ‘स्त्री’ के लिंब के सामान्य वर्गो में फिट नहीं हैं. परिणामस्वरूप उन्हें समाजिक बहिष्कार से भेदभाव, शैक्षणिक सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और इसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

भारत के संविधान में सभी व्यक्तियों को समता की गारंटी एवं सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित किये जाने के बाद भी उभयलिंगी व्यक्तियों के विरूद्ध विभेद और अत्याचार होना जारी है.

उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय विविध सेवा प्राधिकरण बनाम भारत सरकार के मामले में 15 अप्रैल 2014 को उनके अधिकारों के सुरक्षा के प्रयोजन से उन्हें तृतीय लिंग के रूप में मानने का निर्देश दिया है.

विधेयक में उभयलिंगी व्यक्ति को परिभाषित करने, उनके खिलाफ विभेद को प्रतिषेध करने, उन्हें स्वत: अनुभव की जाने वाली लिंग पहचान का अधिकार देने, उन्हें पहचान प्रमाणपत्र प्रदान करने के साथ नियोजन, भर्ती, पदोन्नति और अन्य संबंधित मुद्दे पर उनके साथ विभेद नहीं करने का प्रावधान किया गया है.

इसमें एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने तथा राष्ट्रीय उभयलिंगी परिषद स्थापित करने का प्रावधान है. विधेयक के उपबंधों का उल्लंघन करने पर दंड का भी प्रावधान किया गया है.

 

यह भी पढ़ें: लोकसभा ने एससी/एसटी कानून संशोधन विधेयक, 2018 पारित किया

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