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पिछले 5 वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये के 23,866 बैंक घोटाले हुए: आरबीआई रिपोर्ट

May 3, 2018 14:22 IST

    भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 02 मई 2018 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में विभिन्न बैंकों द्वारा पिछले पांच वर्ष में 23,000 से अधिक बैंक घोटाले हुए हैं. सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से यह सूचना जारी की गई.

    इस अवधि के दौरान भारत के विभिन्न बैंकों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई. रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान कुल 23,866 बैंक घोटाले हुए.

    भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) रिपोर्ट

    •    आरबीआई द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 से 01 मार्च 2018 की अवधि के दौरान एक लाख रुपये या उससे अधिक के बैंक धोखाधड़ी के कुल 23,866 मामलों का पता चला.

    •    इन मामलों में कुल 1,00,718 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है.

    •    अप्रैल, 2017 से एक मार्च, 2018 तक 5,152 बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए.

    •    2016-17 में यह आंकड़ा 5,000 से अधिक मामले दर्ज किये गये.

    •    अप्रैल, 2017 से एक मार्च, 2018 के दौरान सबसे अधिक 28,459 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए.

    •    2016-17 में 5,076 मामलों में बैंकों के साथ 23,933 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी.

    •    2015-16 में बैंकों के साथ धोखाधड़ी के 18,698 करोड़ रुपये के 4,693 मामले प्रकाश में आए.

    •    इसी प्रकार 2014-15 में 19,455 करोड़ रुपये के 4,639 मामले पकड़े गए थे.

    •    वित्त वर्ष 2013-14 में बैंकों में कुल 4,306 धोखाधड़ी के मामले सामने आए. इनमें कुल 10,170 करोड़ रुपये की राशि का घोटाला हुआ था.


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    अन्य आंकड़े

    वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला द्वारा लोकसभा को दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवधि तक पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए 55,200 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 44,542 करोड़ रुपये, बैंक आफ इंडिया का 43,474 करोड़ रुपये, बैंक आफ बड़ौदा का 41,649 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक आफ इंडिया का 38,047 करोड़ रुपये, केनरा बैंक का 37,794 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक का 33,849 करोड़ रुपये था.

    एनपीए (NPA) क्या है?
    बैंक द्वारा दिया गया ऋण  जिसे अब वापिस प्राप्त कर पाना असंभव हो वह एनपीए (Non-Performing Asset) कहलाता है. साधारणतया जब बैंक द्वारा दिया गया ऋण तीन महीने में तयशुदा रकम के हिसाब से वापिस आना आरंभ नहीं होता तो उसे एनपीए घोषित कर दिया जाता है. जब बैंक के पास ऋण वापिस नहीं आता तो ऐसे में वह जनता को पैसे देने में अक्षम होता जाता है. यदि यह रकम बहुत अधिक हो जाए इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

     

     

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