नासा 21 नवंबर को यूएस-यूरोपीय महासागर-निगरानी उपग्रह लॉन्च करेगा

यह सेंटिनल - 6 माइकल फ्रीलीच उपग्रह समुद्र तल में अत्यंत छोटे बदलावों को सटीकता से मापेगा और लगभग पूरे विश्व के लिए समुद्र की निगरानी करेगा.

Created On: Nov 5, 2020 16:20 ISTModified On: Nov 5, 2020 16:21 IST

नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) का आने वाली 21 नवंबर, 2020 को अमेरिका-यूरोपीय महासागर-निगरानी उपग्रह - प्रहरी - 6 (सेंटिनल - 6) को लॉन्च करने का लक्ष्य है. इस उपग्रह (सैटेलाइट) को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग एयर फोर्स बेस से फाल्कन 9 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा.

नासा के मानव अंतरिक्ष यान कार्यक्रम के प्रमुख कैथी लाइडर्स द्वारा ट्वीट्स की एक श्रृंखला के माध्यम से इस जानकारी को साझा किया गया था. लाइडर्स ने कहा कि, यह स्पेसएक्स परीक्षण और हार्डवेयर निरीक्षण के बाद रॉकेट के पहले चरण में कुल दो इंजनों का स्थान लेगा.

उन्होंने आगे यह कहा कि, यह काम अब इंजन परिवर्तन के काम को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रहा है और सभी इंजन हार्डवेयर प्रतिस्थापन अगले सप्ताह तक समाप्त हो जाएंगे.

प्रहरी -6 महासागर-निगरानी उपग्रह: आप सभी के लिए जरुरी जानकारी!

उद्देश्य

यह सेंटिनल - 6 माइकल फ्रीलीच उपग्रह समुद्र तल में अत्यंत छोटे बदलावों को सटीकता से मापेगा और लगभग पूरे विश्व के लिए समुद्र की समस्त गहराई और समुद्री क्षेत्र की निगरानी करेगा. यह महासागर-निगरानी उपग्रह मुख्य रूप से तीन उपकरणों के एक सेट/ समूह पर निर्भर करेगा जो वैज्ञानिकों को पृथ्वी की कक्षा (ऑर्बिट) में अंतरिक्ष यान की सटीक स्थिति निर्धारित करने के लिए महत्त्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा.

मुख्य उपकरण

  1. लेज़र रीट्रोफ्लेक्टर ऐरे: यह उपकरण नौ छोटे, ठीक आकार के दर्पणों से युक्त एक सेट है. लेज़रों को पृथ्वी पर जमीनी स्टेशनों से इन दर्पणों के सेट की ओर निर्देशित किया जाएगा और वे हानिरहित बीम को अपनी उत्पत्ति के बिंदु पर वापस प्रतिबिंबित करेंगे. इससे उन्हें उपग्रह और स्टेशन के बीच की दूरी पता चल जाएगी.
  2. ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम: सटीक ऑर्बिट निर्धारण (GNSS-POD) जीपीएस और गैलीलियो नेविगेशन सिग्नल को ट्रैक करेगा. उपग्रह की स्थिति निर्धारित करने में मदद के लिए शोधकर्ता इन संकेतों का विश्लेषण करेंगे.
  3. सैटेलाइट (DORIS) द्वारा एकीकृत डॉपलर ऑर्बिटोग्राफी और रेडियोपोजीशन: यह समय के साथ उपग्रह की 3D स्थिति का निर्धारण करने के लिए 55 वैश्विक जमीनी स्टेशनों से प्राप्त रेडियो संकेतों का विश्लेषण करेगा.

अन्य वैज्ञानिक उपकरण

पोज़ीडॉन-4 रडार अल्टीमीटर: यह यंत्र पानी की सतह से रडार कंपन/ संकेतों को उछाल कर समुद्र की ऊंचाई को मापने और इन संकेतों के उपग्रह तक वापस पहुंचने में लगने वाले समय की गणना करने में सक्षम है.

जलवायु के लिए उन्नत माइक्रोवेव रेडिओमीटर (AMR-C): यह उपकरण अंतरिक्ष यान और महासागर के बीच जल वाष्प की मात्रा को मापेगा, क्योंकि वायुमंडल में उपस्थित जल वाष्प, अल्टीमीटर से रडार संकेतों के प्रसार को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे महासागर वास्तविक स्तर की तुलना में अधिक ऊंचा या कम दिखाई दे सकता है. यह यंत्र इस समस्या को ठीक कर देगा.

ये दोनों उपकरण मिलकर समुद्र तल की ऊंचाई निर्धारित करने में मदद करेंगे.

महत्व

यह नया महासागर निगरानी उपग्रह हमारे वैश्विक महासागर पर दशकों से जारी निगरानी को बनाए रखेगा और हमारे ग्रह, और विशेषकर महासागरों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने में हमारी मदद करेगा, क्योंकि हमारा ग्रह बदल रहा है और महासागर ऊपर की तरफ़ बढ़ रहा है.

प्रहरी-6B

पहले उपग्रह के साढ़े पांच साल के प्राइम मिशन के समाप्त होने के बाद, इस काम को जारी रखने के लिए वर्ष 2025 में ऐसे ही एक अन्य समान अंतरिक्ष यान सेंटिनल -6 बी को लॉन्च किया जाएगा.

प्रभाव

दो उपग्रह - सेंटिनल 6 और सेंटिनल 6-बी - एक साथ मिलकर समुद्र की ऊंचाई पर एक दशक के सबसे सटीक उपग्रह डाटा का संग्रहण प्रदान कर देंगे, जो लगभग 30 साल के दस्तावेज रिकॉर्ड में शामिल किये जा सकते हैं कि, जलवायु परिवर्तन की प्रतिक्रिया में हमारे महासागर कैसे बढ़ रहे हैं. ये दोनों अंतरिक्ष यान वायुमंडलीय तापमान और आर्द्रता पर डाटा एकत्र करेंगे.

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