नासा की पार्कर सौर जांच में पता चला शुक्र ग्रह के वायुमंडल में होने वाला प्राकृतिक रेडियो उत्सर्जन

पृथ्वी और शुक्र आकार में चट्टानी और समान हैं, हालांकि, किन्हीं कारणों से इन दोनों ग्रहों के गठन के दौरान इनके प्रक्षेपवक्र को अलग करने के लिए इन दोनों ग्रहों में कुछ अंतर हो गया. क्या यह पार्कर जांच हमें बता सकती है कि ऐसा क्यों हुआ? आइये इस आर्टिकल को पढ़कर समझते हैं.

Created On: May 6, 2021 17:50 ISTModified On: May 6, 2021 17:55 IST

जर्नल जियोफिजिकल रिसर्च में 03 मई 2021 को प्रकाशित एक अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने इस तथ्य का खुलासा किया है कि, सूर्य के 11 साल के चक्र में, सौर चक्र के दौरान शुक्र के ऊपरी वातावरण में बहुत बदलाव आया है.

नासा की पार्कर सोलर प्रोब (सौर जांच) द्वारा, जुलाई, 2020 में शुक्र ग्रह के निकट एक संक्षिप्त स्विंग के दौरान, शुक्र ग्रह के ऊपरी वायुमंडल की जांच से प्राकृतिक रेडियो सिग्नल का पता चला है.

नासा की पार्कर सौर जांच के प्रमुख निष्कर्ष

• लगभग 30 वर्षों के बाद, वीनस/ शुक्र ग्रह के ऊपरी वातावरण में जुलाई, 2020 में पार्कर की फ्लाईबाई के दौरान, शुक्र के वायुमंडल का पहला प्रत्यक्ष माप प्राप्त करने में मदद मिली.  
• इससे पहले, नासा के पायनियर वीनस ऑर्बिटर वर्ष, 1978 से वर्ष, 1992 तक और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने वर्ष, 2005 से 2014 तक वीनस एक्सप्रेस ने शुक्र की परिक्रमा की थी.
• 30 साल के बाद वर्ष, 2020 में एक फ्लाईबाई के दौरान, वैज्ञानिकों ने ऐसा डाटा प्राप्त किया है जो शुक्र ग्रह के वातावरण के घनत्व की गणना करने में उनकी मदद करता है.
• वैज्ञानिकों ने यह भी जाना कि शुक्र का आयनमंडल सूर्य के सौर चक्र के अनुसार बदलता है. सौर चक्र में अधिकतम दूरी की तुलना में न्यूनतम दूरी के दौरान वीनस का यह आयनमंडल पतला होता है.
• ग्रह की सतह के 517 मील के भीतर आने पर प्रोब ने शुक्र की एक छवि भी ली.

नासा की पार्कर सौर जांच का महत्त्व

• पार्कर सोलर प्रोब को वर्ष, 2018 में सूर्य के विश्लेषण के लिए एक सौर मिशन के तौर पर लॉन्च किया गया था. इस जांच की उड़ान शुक्र ग्रह के गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए प्रोग्राम की गई थी ताकि यह जांच उड़ान सूर्य के करीब से गुजर सके. हालांकि, यह शुक्र ग्रह के वायुमंडल के बारे में नए तथ्यों पर अभी निश्चित तौर पर कुछ भी नहीं बताती है.
• दोनों, पृथ्वी और शुक्र आकार में चट्टानी और समान हैं, हालांकि, किन्हीं कारणों से इन दोनों ग्रहों के गठन के दौरान इनके प्रक्षेपवक्र को अलग करने के लिए इन दोनों ग्रहों में कुछ अंतर हो गया. पार्कर प्रोब द्वारा एकत्र किया गया डाटा वैज्ञानिकों को यह समझने में सहायता कर रहा है कि पृथ्वी और शुक्र ग्रहों को जुड़वाँ कहे जाने के बावजूद किन कारणों से इन दोनों ग्रहों में इतना अंतर है. 
• एक अंतरिक्ष यान के साथ शुक्र ग्रह के बारे में पता लगाना बेहद मुश्किल है क्योंकि इसमें चुंबकीय क्षेत्र की कमी है और इसका अति उच्च तापमान किसी भी धातु को पिघलाने के लिए पर्याप्त है.
• इसलिए, वैज्ञानिक वीनस पर पार्कर जांच के उदाहरणों से इस ग्रह के बारे में अद्वितीय अंतर्दृष्टि और वैज्ञानिक डाटा इकट्ठा करने के अवसरों के रूप में देखते हैं.

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