राष्ट्रीय उर्जा संरक्षण दिवस 2019 मनाया गया

भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा लागू किया गया था.

Dec 14, 2019 11:36 IST

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2019: यह दिन भारत में हर साल 14 दिसंबर को मनाया जाता है. राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) द्वारा आयोजित किया जाता है, जो ऊर्जा मंत्रालय के अधीन है. इसका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता और संरक्षण में भारत की उपलब्धियों को प्रदर्शित करना है.

भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा लागू किया गया था. बीईई ऊर्जा दक्षता और संरक्षण के महत्व के बारे में आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए 9 से 14 दिसंबर 2019 तक 'राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण सप्ताह' मना रहा है.

उर्जा संरक्षण क्या है?

ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग से बचने और ऊर्जा की कम से कम मात्रा का उपयोग करने को कहा जाता है. इसका उद्देश्य भविष्य के उपयोग के लिए ऊर्जा की बचत करना है. यह दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण को शामिल करने पर जोर देता है. ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति, लाईट, पंखे, एसी या किसी अन्य बिजली के उपकरण के अनावश्यक उपयोग को समाप्त करके घर या कार्यालय में छोटे-छोटे कदम उठाकर ऊर्जा की बचत कर सकता है.

उर्जा संरक्षण का उद्देश्य

ऊर्जा बचाने और संरक्षण के महत्व के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का आयोजन किया जाता है. साथ ही, यह भी बताया जाता है कि लोग भविष्य में इसके बेहतर उपयोग के लिए ऊर्जा का उपयोग कैसे कर सकते हैं. इसके अलावा, ऊर्जा संरक्षण के सही अर्थ को समझाने और ऊर्जा के अपव्यय को कम करने के लिए जानकारी दी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की खपत को कम करना है और लोगों को इसे कुशलता से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है.

उर्जा संरक्षण कैसे करें?

  • प्रत्येक व्यक्ति को एसी या हीटर का उपयोग कम करना चाहिए क्योंकि दोनों उपकरण हर दिन बड़ी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं.
  • सीएफएल बल्ब या स्मार्ट प्रकाश विकल्प ऊर्जा की खपत को कम कर सकते हैं.
  • पानी गरम करने में भी बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है. यह कहा जाता है कि कम गर्म पानी का उपयोग करने से बहुत अधिक ऊर्जा बचाई जा सकती है.
  • जल संरक्षण से भी ऊर्जा संरक्षण होता है. हर साल हजारों गैलन पानी बर्बाद होता है. इसके लिए 6 जीपीएम का फव्वारा, बहुत कम फ्लश शौचालय, टैप एरेटर, कम्पोस्ट शौचालय आदि का उपयोग करके जल संरक्षण किया जा सकता है.

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