राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2021: जानें इसका इतिहास और महत्व

राष्ट्रीय मतदाता दिवस मतदाताओं को समर्पित है. इस दिन मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाई जाती है. भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी. 

Created On: Jan 25, 2021 12:27 ISTModified On: Jan 25, 2021 12:39 IST

भारत में प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है. राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाने का उद्देश्य युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना है. मतदान करना प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का अधिकार है क्योंकि प्रत्येक वोट नई सरकार और लोकतंत्र के भाग्य का फैसला करता है.

इस वर्ष के राष्ट्रीय मतदाता दिवस का विषय ‘मतदाताओं को सशक्त, सचेत, सुरक्षित और जागरूक’ (Making Our Voters Empowered, Vigilant, Safe and Informed) बनाना है. इस दिन, विभिन्न भाषण प्रतियोगिताओं, अभियान, नए मतदाताओं को वोटर आईडी वितरण, मतदाताओं की फोटोग्राफी, आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

क्या होता है मतदाता दिवस पर?

राष्ट्रीय मतदाता दिवस मतदाताओं को समर्पित है. इस दिन मतदाताओं के बीच जागरूकता फैलाई जाती है. नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए प्रेरित किया जाता है. इस अवसर पर नए मतदाताओं को वोटर कार्ड देकर सम्मानित भी किया जाता है. राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुरुआत का मकसद ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं का सूची में नाम जोड़ना, मतदान के लिए प्रेरित करना है.

क्यों मनाया जाता यह दिवस है?

भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी. राष्ट्रीय मतदाता दिवस पहली बार 25 जनवरी 2011 को मनाया गया था. यह चुनाव आयोग का 61वां स्थापना दिवस था. राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2011 से प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को ही मनाया जाता है.

राष्ट्रीय मतदाता दिवस का महत्व

चुनाव आयोग का उद्देश्य उन सभी व्यस्कों और पात्र मतदाताओं की पहचान करना है, जिनकी उम्र एक जनवरी को पूरे देश के सभी मतदान केंद्रों में 18 वर्ष हो गई है. भारत में मतदान के लिए 18 वर्ष की आयु सीमा निर्धारित की गई है. 18 वर्ष का कोई भी भारतीय नागरिक भारत में सभी प्रकार के लोकतांत्रिक चुनावों में मतदान का अधिकार प्राप्त करता है.

भारत में मतादाता का अधिकार

चुनाव आयोग मतदाता को एक पहचान पत्र प्रदान करता है. इसे मतदाता पहचान पत्र भी कहा जाता है. कोई भी व्यक्ति केवल तभी मतदान कर सकता है जब उसका नाम चुनावी सूची में शामिल हो. यदि किसी कारण से मतदाता सूची से नाम हटा दिया गया है, तो मतदाता के पास मतदाता पहचान पत्र होने पर भी वोट नहीं डाला जा सकता है. यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश का नागरिक बन जाता है तो भी वह भारत में मतदान का अधिकार खो देगा.

भारतीय निर्वाचन आयोग: एक नजर में

भारतीय आयोग भारत में संघ और राज्य चुनाव कराने के लिए एक स्वायत्त संवैधानिक संगठन है. यह भारत में लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं के चुनाव और देश में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों का संचालन करता है. भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी.

यह मतदान एवं मतगणना केंद्रों के लिये स्थान, मतदाताओं के लिये मतदान केंद्र तय करना, मतदान एवं मतगणना केंद्रों में सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्थाएँ और अन्य संबद्ध कार्यों का प्रबंधन करता है. यह राजनीतिक दलों को मान्यता प्रदान करता है उनसे संबंधित विवादों को निपटाने के साथ ही उन्हें चुनाव चिह्न आवंटित करता है.

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