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भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास बेलावन में प्रारंभ

इंडोनेशिया के साथ अपने संबंधों की प्रतिबद्धता और हिन्द  महासागर में समुद्री सुरक्षा का प्रदर्शन करते हुए भारतीय नौसेना का जहाज ‘कारमुक’, जो स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट है और अंडमान निकोबार कमान के तहत आधारित है एक डोर्नियर समुद्री पेट्रोल विमान के साथ 28वें भारत-इंडोनेशिया समन्वित पेट्रोलिंग और दूसरे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में भाग ले रहा है.

Oct 11, 2016 11:13 IST
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भारत एवं इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास अक्टूबर 2016 में बेलावन ( इंडोनेशिया) में शुरू हुआ. इसे समन्वित पेट्रोलिंग और भारत-इंडोनेशिया द्विपक्षीय समुद्री सहयोग हेतु आयोजित किया जा रहा है.

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इंडोनेशिया के साथ अपने संबंधों की प्रतिबद्धता और हिन्द महासागर में समुद्री सुरक्षा का प्रदर्शन करते हुए भारतीय नौसेना का जहाज ‘कारमुक’, जो स्वदेश निर्मित मिसाइल कार्वेट है और अंडमान निकोबार कमान के तहत आधारित है एक डोर्नियर समुद्री पेट्रोल विमान के साथ 28वें भारत-इंडोनेशिया समन्वित पेट्रोलिंग और दूसरे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास में भाग ले रहा है. यह अभ्यास अंडमान सागर में 10 से 27 अक्टूबर-2016 तक आयोजित करने का कार्यक्रम है.

दूसरे द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास के साथ-साथ कोरपेट के 28वें संस्‍करण के कार्यक्रम से द्विपक्षीय सहयोग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है. बेलावन, इंडानेशिया में 10 से 13 अक्तूंबर 2016 तक आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में पोर्ट ब्लेवयर स्थित त्रिसेवा अंडमान और निकोबार कमान (एएनसी) के नौसेना कम्पोनेंट कमांडर कोमोडोर गिरीश कुमार गर्ग भाग ले रहे हैं. द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास और कोरपेट में दोनों नौ सेनाओं के एक-एक लड़ाकू जहाज और समुद्रीय पेट्रोलिंग वायुयान की भागीदारी होगी. इन आयोजनों से व्यापक परिचालन और प्रशिक्षण भागीदारी के अवसर उपलब्ध होने के साथ-साथ समुद्र में अच्छी व्यवस्था बनाए रहने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा. यह अभ्यास भारत और इंडोनेशिया के बीच मौजूदा दोस्ती को और मजबूत बनाने तथा इस क्षेत्र के मित्र देशों के साथ भारत की भागीदारी और एकजुटता को गति प्रदान करेगा.

विदित हो कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंध नियमित संयुक्त गतिविधियों और दोनों देशों के सशस्त्र बलों के मध्य बातचीत के आयोजन से लगातार मजबूत हो रहे हैं. दोनों देशों की नौसेनाएं वर्ष 2002 से एक साल में दो बार अपनी-अपनी अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पर समन्वित पेट्रोलिंग (कोरपेट) आयोजित कर रही हैं. इनका उद्देश्य हिन्द महासागर के बड़े हिस्से को वाणिज्यिक नौवहन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैध समुद्री गतिविधियों के लिए सुरक्षित बनाना है.

 

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