नीति आयोग की व्यापार सुधार हेतु रिपोर्ट

 नीति आयोग ने एक सर्वे तथा रिपोर्ट बनायी है जिसमे भारत के सम्पूर्ण व्यापारिक परिदृश्य का अवलोकन किया गया है. तथा मौजूदा क्षेत्रो में जरूरी सुधारो के सुझाव भी दिए हैं. इस लेख में हमने, मुख्य बिन्दुवो का विश्लेषण करते हुए, रिपोर्ट को भी संक्षिप्त रूप दिया है.

Created On: Nov 15, 2017 00:05 ISTModified On: Nov 16, 2017 10:56 IST
NITI Ayog's report on Business Reforms in India
NITI Ayog's report on Business Reforms in India

नीति आयोग ने, एक रिपोर्ट जारी करते हुए भारत में व्यापार के लिए जारी स्थितियों तथा सीमाओं का अध्ययन किया है. राष्ट्रीय स्तर पर किये गए सर्वे में 3,000 से ज्यादा उपक्रमों का व्यापार करने से सम्बंधित कारणों का आकलन किया.
सर्वे में उपक्रमों से व्यापार क्षेत्र में नियामक जरूरतों, श्रम तथा पर्यावरण संबंधी, और बिजली तथा जल की कमी से सम्बंधित प्रश्न पूछे गए थे. इस रिपोर्ट में नीति आयोग ने भारत में व्यापार संबंधी हालातों को सुधारने के लिए सुझाव भी दिए हैं. इन सुझावों को निम्नलिखित रूप से समझाया गया है.

1. व्यापार में आसानी से विकास दर में ज्यादा वृद्धी होती है
इस रिपोर्ट में व्यापार करने में आसानी तथा तथा विकास दर में वृद्धि के सम्बन्ध का उल्लेख किया गया है.

भारत के राज्यो को 2004-05  तथा 2013-14 के दौरान तेज विकास दर तथा धीमी विकास दर नाम के दो वर्गों में बांटा गया है. तीव्र विकास दर वाले राज्यों में व्यापार हेतु अनुज्ञा पत्र जारी होने की अवधि कम थी, बल्कि यही अवधि धीमी विकास दर वाले राज्यों में ज्यादा थी. इसके अलावा तीव्र विकास दर वाले राज्यों में श्रम कानून तथा पर्यावरण से सम्बंधित नियमो का भी ज्यादा क्रियान्वयन हुआ था.
रिपोर्ट से ये स्पष्ट होता है कि व्यापार करने में आसानी होने पे तथा तीव्र विकास दर एक दूसरे को प्रबलित करते हैं.

2.  उपक्रमों के लिए आसानी से व्यापार करने हेतु उन्नति करने के लिए सूचना का प्रबंध
रिपोर्ट या दर्शाती है कि अनुज्ञा पत्रों तथा एनी दस्तावेजो की निकासी हेतु जो जानकारी सरकारी कर्मचारी देते है तथा जो जानकारी उपक्रमो को होती है उसमे बहुत अंतर है.
सामान्यतया, दस्तावीजो को जारी करने हेतु, सरकार द्वारा पिछले सालो में जारी किये गए एकल खिड़की सुविधाओं व्यापार उपक्रमों को पता नहीं था. कुल उपक्रमों में से केवल 20 प्रतिशत उपक्रम इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं.
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों में भी केवल 41 प्रतिशत विशेषज्ञों को ही इस सुविधा के बारे में पता था. इसीलिए सूचनाओं का प्रसार करना एक महत्वपूर्ण कार्य है.

3.   श्रम कानूनों में नम्यता लाना
श्रम कानूनों में सुधार तथा इनमे ज्यादा नम्यता लाने से भारत में व्यापार करने को आसान बनाया जा सकता है.इस रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकलता है कि भारत में अभी श्रम कानूनों में नम्यता लाने की जरूरत है. इस सर्वे के मुताबिक़, श्रम-घनिष्ट क्षेत्रों में श्रम से जुड़े विनियमन का लागूकरण बहुत जटिल होता है.
श्रम-घनिष्ट क्षेत्रों के ज्यादातर उपक्रमों में, कुशल श्रमिको की भर्ती तथा उनको नौकरी से निकालना एक जटिल समस्या है.
श्रम घनिष्ठ उपक्रमों में पर्यावरण से जुड़े कार्यो को करने का औसत समय हड़तालो तथा तालाबंदी की वजह से बहुत ज्यादा है. इस रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि श्रम-घनिष्ठ क्षेत्रों में पूंजी-घनिष्ट क्षेत्रो से ज्यादा समस्यायें हैं.

4. बिजली क्षेत्र के सुधार में तेजी लाना
 
बिजली क्षेत्र के सुधार बिजली-घनिष्ठ उपक्रमों को बिजली की निरंतर आपूर्ति करने में मदद करेगा. इस अध्ययन में यह पता चला की तीव्र विकास दर वाले राज्यों में बिजली की आपूर्ति निम्न विकास दर वाले राज्यों की तुलना में 10 घंटे ज्यादा थी.
इससे अलावा, तीव्र विकास दर वाले राज्यों में बिजली समस्या कम विकास दर वाले राज्यों की बिजली समस्या से 60 प्रतिशत कम है.
इस रिपोर्ट के निष्कर्ष ये कहते हैं कि बिजली- घनिष्ट उपक्रम बिजली के चलते सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इससे विद्युत उपक्रमों की उत्पादकता, तथा रोजगार निर्माण भी प्रभावित होते हैं. इस क्षेत्र में जो भी काम होने है वो राज्यों के ही अंतर्गत आते हैं.
भारत धीरे धीरे अतिरिक्त ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है तो राज्य इस चीज का फायदा उठा के बिजली क्षेत्र में सुधार ला के विकास दर को बढ़ा सकते हैं.

5. नयी कंपनियों के खुलने तथा बंद होने का सरलीकरण

भारत में नए उपक्रमों के स्थापना की गतिविधि को तेज करते हुए रुग्ण उपक्रमों को बंद करने की प्रक्रिया को तेज करने जरूरत है. भारतीय उद्योग में तेजी लाने से उत्पादकता, रोजगार निर्माण, तथा आर्थिक तेजी में काफी मदद मिलेगी. उदाहरण के तौर पर,नयी कंपनियों के विनियमन में कम समय तथा लागत आती है.
पुरानी या रुग्ण कम्पनियों को बंद कराने हेतु के प्रक्रिया को ज्यादा आरामदायक तथा तेज करने की जरूरत है. इसके लिए नया दिवालिया कोड एक अच्छा कदम है.

6. बड़ी तथा छोटी कंपनियों के लिए सामान प्लेटफॉर्म बनाना

 भारत में,  कुछ क्षेत्रो में बड़े उपक्रमों की समस्यायें छोटे उपक्रमों की समस्याओं से अधिक हैं. यह समस्या इसीलिए है की विनियमन के नियम दोनों तरह के उपक्रमों के लिए अलग अलग हैं. और अधिकतर यह विनियमन बड़े उपक्रमों के ऊपर अधिक बोझ डालता है. और इस सर्वे ने यह दर्शाया है कि जैसे-जैसे कोई छोटा उपक्रम बड़ा होता जाता है उसके विनियमन से सम्बंधित बढाए बढ़ती जाती हैं. यह स्थिति छोटे उपक्रमों को बड़े बनाने की प्रक्रिया को हतोत्साहित करती है.

7. वित्तीय सुविधाओं में सुधार
भारत में आधे उपक्रम वित्तीय संस्थानों से कर्जा नहीं लेते हैं. और एक तिहाई उपक्रम किसी भी तरह की वित्तीय सहायता नहीं हासिल कर पाते. यह वितीय स्थिति व्यापार के लिए अच्छी नहीं है. और उच्च विकास दर वाले राज्यों की वित्तीय व्यवस्था अन्य राज्यों की तुलना में अच्छी है, वह कम लागत वाले वित्तीय कर्जो की व्यवस्था बेहतर है.

निष्कर्ष
यह रिपोर्ट यह दिखाती है कि एक अच्छे व्यापारिक माहौल से पर्यावरण, उच्छ उत्पादकता , तथा अच्छे वेतन वाली नौकरिया के  निर्माण मैं सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. और किसी भी देश में व्यापार के लिए अच्छा माहौल बनाना, उस देश के समस्त नागरिकों के लिए फायदेमंद है तथा यह गरीबी उन्मूलन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा.
नीति आयोग ने, एक रिपोर्ट जारी करते हुए भारत में व्यापार के लिए जारी स्थितियों तथा सीमाओं का अध्ययन किया है. राष्ट्रीय स्तर पर किये गए सर्वे में 3,000 से ज्यादा उपक्रमों का व्यापार करने से सम्बंधित कारणों का आकलन किया.

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