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नितिन गडकरी ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एनएचएआई मसाला बॉन्ड का शुभारंभ किया

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एनएचएआई मसाला बॉन्ड का शुभारंभ किया.

May 12, 2017 18:06 IST
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केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज में एनएचएआई मसाला बॉन्ड का शुभारंभ किया. अलग-अलग क्षेत्रों से भारी संख्या में लंदन पहुंचे निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की.

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं नौवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मसाला बॉन्ड की शुरुआत करते हुए लंदन स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने की घंटी बजाई. इसके बाद उन्होंने लंदन स्थित इंडिया हाउस में मीडिया को संबोधित किया.

प्रमुख तथ्य-

  • इन निवेशकों में से कुछ मसाला बॉन्ड बाजार में पहली बार शामिल हुए.
  • एनएचएआई मसाला बॉन्ड इश्यू ने विश्व भर से निवेशकों को आकर्षित किया.
  • कुल सब्सक्रिप्शन का 60 फीसदी सब्सक्रिप्शन एशियाई निवेशकों का रहा.
  • शेष 40 फीसदी सब्सक्रिप्शन यूरोपियन निवेशकों का रहा.
  • कुल राशि का 61 प्रतिशत फंड मैनेजरों या इंशयोरेंस से एकत्रित हुआ. 18 प्रतिशत बैंकों से, 21 प्रतिशत प्राइवेट बैंकों के माध्यम से आया.

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मसाला बॉन्ड का उद्देश्य-

  • यह पहली बार है जब भारत ने मसाला बांड बाजार में प्रवेश किया है.
  • रुपया आधारित इस ऑफशोर बांड के जरिये एनएचएआइ का उद्देश्य भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं हेतु धन जुटाना है. वर्तमान में एनएसई में 38 मसाला बांड लिस्टेड हैं. इनके माध्यम से लगभग पांच अरब डॉलर की राशि जुटाई गई है.
  • एनएचएआइ टिपल-ए रेटिंग वाला प्रमुख संगठन है.

मसाला बॉन्‍ड के बारे में -

  • मसाला बॉन्ड भारतीय रुपए में विदेशों में जारी किया जाने वाला बॉन्ड हैं, जिसे भारतीय कंपनियां विदेशी निवेश के लिए जारी करती हैं.
  • इस बॉन्‍ड का नाम ट्रेडिश्‍नल तरीके से भारतीय मसालों पर रखा गया .
  • सरल शब्‍दों में विदेशी पूंजी बाजार में निवेश हेतु भारतीय रुपए में जारी किया जाने वाला बॉन्‍ड, मसाला बॉन्‍ड है.
  • इससे पहले भारतीय कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में निवेश हेतु जो बॉन्‍ड जारी करती थी, वह डॉलर में होता था.
  • जिसके मूल्‍य में जिसके मूल्‍य में उतार-चढ़ाव से होने वाला नुकसान भारतीय कंपनी को उठाना पड़ता था.

गडकरी के अनुसार भारत में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदल रही है. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से वित्तीय मदद की आवश्यकता है. इन पर निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा. सड़क निर्माण से जुड़े आंकड़ों को पेश करते हुए कहा कि भारत में 52 लाख किलोमीटर सड़कें हैं.

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