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नितिन गडकरी ने आईआईटी चेन्नई में एनटीसीपीडब्ल्यूसी की आधारशिला रखी

Feb 27, 2018 15:21 IST

एनटीसीपीडब्ल्यूसी की स्थापना से भारत में बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र के लिए प्रासंगिक स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलेगा. यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए एक बड़ी कामयाबी होगी और इससे सागरमाला कार्यक्रम को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग एवं जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने 26 फरवरी 2018 को आईआईटी चेन्नई में बंदरगाहों, जलमार्ग और तटों के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी केंद्र (एनटीसीपीडब्ल्यूसी) की आधारशिला रखी.

इस अवसर पर आईआईटी चेन्नई और शिपिंग मंत्रालय ने एक समझौता ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किए.

बंदरगाहों, जलमार्ग और तटों के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी केंद्र(एनटीसीपीडब्ल्यूसी):

  • एनटीसीपीडब्ल्यूसी की स्थापना शिपिंग मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम सागरमाला के तहत किया गया है.

  • यह बंदरगाहों, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और अन्य संस्थानों के लिए इंजीनियरिंग और तकनीकी जानकारी तथा सहायता प्रदान करने के लिए शिपिंग मंत्रालय की एक तकनीकी शाखा के रूप में कार्य करेगी.

  • यह सागर, तटीय और एस्ट्रिन फ्लो, तलछट परिवहन और मोर्फोडायनमिक्स, नेविगेशन और क्रियान्वयन, ड्रेजिंग और गाद, बंदरगाह और तटीय इंजीनियरिंग संरचनाओं और ब्रेकवाटर, स्वायत्त प्लेटफार्मों और वाहनों के प्रायोगिक, 2डी और 3डी मॉडलिंग के क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुसंधान को जारी रखेगा.

  • यह प्रवाह, सीएफडी मॉडलिंग, पतवार संबंधी कामों और महासागर नवीकरणीय ऊर्जा के हाइड्रोडायनामिक्स को लेकर पारस्परिक संवाद का काम करेगा.

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  • यह केंद्र स्वदेशी सॉफ्टवेयर और प्रौद्योगिकी सेवा प्रदान करेगा.

  • यह तकनीकी दिशानिर्देशों, मानदंडों और पोर्ट संबंधी समस्याओं और समुद्री मसलों को मॉडल और सिमुलेशन के साथ रेखांकित करेगा.

  • यह केंद्र न केवल नई तकनीक और नवाचारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि अपने सफल व्यावसायीकरण के लिए भी काम करेगा.

  • यह शिपिंग मंत्रालय में काम कर रहे लोगों के लिए सीखने के अवसर भी प्रदान करेगा.

एनटीसीपीडब्ल्यूसी के लिए फंड आवंटन:

  • एनटीसीपीडब्ल्यूसी को स्थापित करने में 70.53 करोड़ रुपये की लागत आएगी जिसे शिपिंग मंत्रालय, आईडब्ल्यूएआई और बड़े बंदरगाहों द्वारा साझा करेंगे.

  • शिपिंग मंत्रालय फील्ड रिसर्च फैसिलिटी (एफआरएफ), सिडमेंटेशन और एस्ट्रोजन मैनेजमेंट टेस्ट बेसिनव शिप या टॉ सिम्युलेटर जैसी सुविधाएं मुहैया कराने में पूंजीगत व्यय के लिए अनुदान मुहैया कराएगा.

  • भारतीय, वैश्विक बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र के लिए उद्योग परामर्श परियोजनाओं के माध्यम से यह केंद्र तीन वर्षों में आत्मनिर्भर हो जाएगा.

 

एनटीसीपीडब्ल्यूसी कैसे फायदेमंद होगा?

  • एनटीसीपीडब्ल्यूसी की स्थापना से भारत में बंदरगाह और समुद्री क्षेत्र के लिए प्रासंगिक स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा मिलेगा.

  • यह सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के लिए एक बड़ी कामयाबी होगी और इससे सागरमाला कार्यक्रम को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.

  • एनटीसीपीडब्ल्यूसी नवीनतम प्रौद्योगिकी उपकरणों का केंद्र होगा और यह विदेशी संस्थानों पर हमारी निर्भरता को कम करेगा.

  • इससे अनुसंधान की लागत बहुत कम हो जाएगी. साथ ही इससे पोर्ट और समुद्री क्षेत्र में काम करने के लिए लागत और समय की बचत होगी.

सागरमाला परियोजना:

सागरमाला परियोजना भारत के बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए भारत सरकार की एक रणनीतिक और ग्राहक-उन्मुख पहल है जिससे पोर्ट के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ाया जा सके और भारत के विकास में योगदान करने के लिए तट रेखाएं विकसित की जा सकें. कैबिनेट ने 25 मार्च 2015 को भारत के 12 बंदरगाहों और 1208 द्वीप समूह को विकसित करने के लिए इस परियोजना को मंजूरी दे दी. परियोजना 31 जुलाई 2015 को कर्नाटक में नौवहन मंत्रालय द्वारा होटल ताज वेस्ट एंड, बैंगलोर में शुरू की गई थी.

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय समुद्र तट, 14,500 किलोमीटर की संभावित जलमार्ग और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर रणनीतिक स्थान का उपयोग करके देश में बंदरगाह के विकास को बढ़ावा देना है.

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