प्रधानमंत्री मोदी का 80वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र में संबोधन भाषण

प्रधानमंत्री मोदी ने 26 नवंबर, 2020 को 80 वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को आभासी तौर पर संबोधित किया है.

Created On: Nov 26, 2020 16:55 ISTModified On: Nov 26, 2020 16:55 IST

प्रधान मंत्री मोदी ने 26 नवंबर, 2020 को, 80 वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन सत्र को आभासी तौर पर संबोधित किया है. यह दो दिवसीय सम्मेलन 25 नवंबर को गुजरात के केवडिया में शुरू हुआ था.

इस अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किया था. इस सम्मेलन में उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू, गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी भी शामिल हुए थे. वर्तमान लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला इस दो दिवसीय सम्मेलन के अध्यक्ष भी हैं.

80वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का विषय

इस सम्मेलन का विषय है - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सामंजस्यपूर्ण समन्वय - सशक्त लोकतंत्र की कुंजी.

80 वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन: प्रथम दिवस सत्र

यह सम्मेलन सबसे पहले, वर्ष 1921 में शुरू हुआ और इस सम्मेलन का शताब्दी वर्ष सत्र गुजरात में आयोजित किया जा रहा है. 25 नवंबर को शुरू हुए इस आयोजन में, विभिन्न सत्रों के दौरान संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा, जनहित याचिका की समीक्षा और अन्य विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई. लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी संविधान संशोधनों के बारे में बात की.

इस सम्मेलन के दौरान, विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के कई अन्य पीठासीन अधिकारियों ने भी विभिन्न कानूनों की व्याख्या, जनहित याचिका पर पुनर्विचार और अन्य मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया.

संविधान दिवस को मनाने के लिए एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन

वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष, ओम बिड़ला ने 26 नवंबर को संविधान दिवस को मनाने के लिए केवडिया टेंट सिटी में एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया है. यह प्रदर्शनी सदियों से भारत में स्थापित उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाती है जोकि ऋग्वेद काल से बेहद दिलचस्प तरीके से भारत के लोकतंत्र की विभिन्न झलकियां प्रस्तुत करती है.

संविधान दिवस के मौके पर आयोजित इस प्रदर्शनी में यह भी दिखाया गया है कि, कैसे महाजनपद, जनपद, गण और महागण की तत्कालीन शासन के प्रशासन में अपनी निश्चित भूमिकायें थीं.

इस प्रदर्शनी में 150 से अधिक स्लाइड शो हैं और इसका विषय’ संवैधानिक और मौलिक कर्तव्य’ है. आगामी दिनों में दर्शकों के लिए स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में यह प्रदर्शनी खुली रहेगी.

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