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टॉप कैबिनेट मंजूरी: 11 जनवरी 2019

Jan 11, 2019 12:40 IST
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टॉप कैबिनेट मंजूरी: 11 जनवरी

मंत्रिमंडल ने ‘उन्‍नत मॉडल एकल खिड़की’के विकास पर भारत और जापान के बीच सहमति पत्र को स्‍वीकृति‍ दी

   केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने ‘उन्‍नत मॉडल एकल खिड़की’के विकास पर भारत और जापान के बीच सहमति पत्र (एमओयू) को स्‍वीकृति‍ दे दी है. यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई.

   इस एमओयू से कारोबार से जुड़े कार्यों हेतु आवश्‍यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए‘उन्‍नत मॉडल एकल खिड़की’के विकास और भारत में केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकारों में इस पर अमल के लिए भारत और जापान के बीच सहयोग सुनिश्चित होगा.

   इसके साथ ही एक ऐसे ढांचे के विकास के लिए भी भारत और जापान के बीच सहयोग संभव होगा जिसमें ये प्रक्रियाएंत्‍वरित ढंग से पूरी होंगी, ताकि देश में ‘कारोबार में सुगमता’को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों में तेजी लाई जा सके.

   ‘उन्‍नत मॉडल एकल खिड़की’ भारत में और इससे बाहर अपनाए जा रहे सर्वोत्तम तौर-तरीकों या प्रथाओं पर आधारित है. इसमें मापने योग्‍य पैमाने या मापदंड भी हैं और इससे भारत में ‘एकल खिड़की’ की स्‍थापना के मार्ग में आने वाली संभावित बाधाओं की पहचान हो सकेगी. अत: इससे निवेश करना सुविधाजनक हो जाएगा.

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और डेनमार्क के बीच समुद्रीय मुद्दों के बारे में समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी

   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और डेनमार्क में समुद्रीय मुद्दों के बारे में समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है. यह बैठक प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई. समझौता ज्ञापन पर डेनमार्क के डब्‍ल्‍यूआईपी की जनवरी 2019 में होने वाली भारत यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षर करने का प्रस्‍ताव किया गया है.

   इस समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर से दोनों देशों के लिए द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों का पता लगाने का मार्ग प्रशस्‍त होगा. भारत और डेनमार्क के समुद्रीय क्षेत्रों के मध्‍य सीमा पार सहयोग और निवेशों में मदद करना है.

   यह दोनों देशों को गुणवत्‍तापूर्ण शिपिंग सुनिश्चित करने के लिए आपसी क्षमताओं को सुधारने के लिए विशेषज्ञों, प्रकाशनों, सूचना, डाटा और सांख्यिकी का आदान-प्रदान करने, हरित समुद्रीय प्रौद्योगिकी एवं शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में सहयोग, भारत के शिपिंग पंजीयक को मान्‍यता प्राप्‍त संगठन (आरओ) का दर्जा प्रदान करने तथा समुद्रीय प्रशिक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करने में समर्थ बनाएगा.

   यह द्विपक्षीय और अंतर्राष्‍ट्रीय दोनों स्‍तरों पर दोनों देशों के लिए आपसी लाभ के अवसरों के बारे में सहयोग को आगे बढ़ाएगा और मजबूत बनाएगा. डेनमार्क भारत के प्रमुख व्‍यापार भागीदारों में से एक है. डेनमार्क से भारत को होने वाले प्रमुख आयातों में औषधीय/फार्मास्‍यूटिकल वस्‍तुएं, विद्युत उत्‍पादन मशीनरी, औद्योगिक मशीनरी, धातु खनिज, ऑर्गेनिक रसायन आदि शामिल हैं.

 

कैबिनेट ने स्‍वाजीलैंड को कर संबंधी सहायता देने हेतु विचारार्थ विषय पर हस्‍ताक्षर किए जाने को मंजूरी दी

   केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और स्‍वाजीलैंड (इसका नया नाम ‘इस्‍वातिनी’ है) के बीच ‘सीमा विहीन कर निरीक्षक कार्यक्रम’ के तहत स्‍वाजीलैंड को कर संबंधी सहायता देने के लिए नामित भारतीय विशेषज्ञ की सहभागिता से संबंधि‍त विचारार्थ विषय (टीओआर) पर हस्‍ताक्षर किए जाने को मंजूरी दे दी है.

   सीमा विहीन कर निरीक्षक (टीआईडब्‍ल्‍यूबी) कार्यक्रम के तहत भारत सरकार और ईस्‍वातिनी साम्राज्‍य की सरकार द्वारा एक भारतीय विशेषज्ञ को पारस्परिक रूप से चयनित किया गया है. विचारार्थ विषय से टीआईडब्‍ल्‍यूबी कार्यक्रम के तहत इस्‍वातिनी को कर संबंधी सहायता देने के लिए नामित भारतीय विशेषज्ञ की सहभागिता से जुड़ी शर्तों को औपचारिक रूप दिया जाएगा.

   टीआईडब्‍ल्‍यूबी कार्यक्रम के तहत भारतीय विशेषज्ञ की सहभागिता से विकासशील देशों में कर संबंधी मामलों में क्षमता निर्माण करने में भारत द्वारा सहयोग दिये जाने को काफी बढ़ावा मिलेगा. संयुक्‍त राष्‍ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) द्वारा संयुक्‍त रूप से शुरू किए गए.

   सीमा विहीन कर निरीक्षक (टीआईडब्‍ल्‍यूबी) कार्यक्रम का उद्देश्‍य ऑडिट क्षमता के सुदृढ़ीकरण के जरिए राष्‍ट्रीय कर प्रशासन को मजबूत करने के लिए विकासशील देशों को आवश्‍यक सहयोग देना और अन्‍य देशों के साथ इस ज्ञान को साझा करना है. टीआईडब्‍ल्‍यूबी कार्यक्रम का उद्देश्‍य विकासशील देशों के टैक्‍स ऑडिटरों को आवश्‍यक तकनीकी जानकारियां और कौशल हस्‍तांतरित करने के साथ-साथ इन टैक्‍स ऑडिटरों के साथ सामान्‍य ऑडिट प्रथाओं और ज्ञान संसाधनों के प्रचार-प्रसार को साझा करके इन देशों के कर प्रशासनों को मजबूत करना है.

 

कैबिनेट ने तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग पर भारत और फ्रांस के बीच सहम‍ति पत्र को मंजूरी दी

   केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) नेनवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग पर भारत और फ्रांस के बीच सहम‍ति पत्र (एमओयू) को मंजूरी दे दी है. इस एमओयू पर 03 अक्‍टूबर 2018 को हस्‍ताक्षर किए गए थे. एमओयू से भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी.

   भारत और फ्रांस का लक्ष्‍य आपसी लाभ, समानता और पारस्‍पारिकता के आधार पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर तकनीकी द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सहकारी संस्‍थागत संबंध सुनिश्चित करने का ठोस आधार स्‍थापित करना है.

   अनुसंधान से जुड़े संयुक्‍त कार्यदल, प्रायोगिक आधार (पायलट) पर चलाई जाने वाली परियोजनाएं, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, अध्‍ययन भ्रमण (स्‍टडी टूर), केस स्‍टडी और अनुभव/विशेषज्ञता को साझा करने के कार्य तकनीकी सहयोग के दायरे में आएंगे.

 

मंत्रिमंडल ने गुजरात में राष्‍ट्रीय रेल और परिवहन संस्‍थान के लिए कुलपति पद के सृजन को स्‍वीकृति दी

   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का पहला रेल और परिवहन विश्‍वविद्यालय- राष्‍ट्रीय रेल तथा परिवहन संस्‍थान (एनआरटीआई) के लिए कुलपति पद के सृजन को स्‍वीकृति दे दी है. कुलपति संस्‍थान के प्रधान कार्यकारी अधिकारी होंगे, संस्‍थान के मामलों की सामान्‍य देखरेख और नियंत्रण का कार्य करेंगे और मानित विश्‍वविद्यालय के रूप में संस्‍थान के अधिकारियों के निर्णयों को लागू करने के लिए मुख्‍य रूप से उत्‍तरदायी होंगे.

   एनआरटीआई ने 2 पूरी तरह आवासीय स्‍नातक पाठ्क्रमों-परिवहन टेक्‍नोलॉजी में बीएससी तथा परिवहन प्रबंधन में डीवीए- के लिए 20 राज्‍यों के 103 विद्यार्थियों के साथ पहला बैच प्रारंभ किया. 5 सितंबर 2018 से कक्षाएं प्रारंभ हुईं. तीन वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के पाठ्यक्रम अंतरविषयी और विश्‍व के अग्रणी संस्‍थानों के मानक के अनुरूप हैं.

   पाठ्यक्रम पाउंडेशन, कोर तथा एलेक्टिव हैं. एनआरटीआई का उद्देश्‍य संयुक्‍त शोध तथा फैकल्‍टी और विद्यार्थी आदान-प्रदान के क्षेत्र में अग्रणी अंतररार्ष्‍टीय संस्‍थानों के साथ सहयोग करना है. एनआरटीआई ने अमेरिका के कॉर्नेल यूनिवसिर्टी,यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले, एमआईआईटी, मास्‍को तथा सेंट पीटर्सबर्ग ट्रांस्‍पोर्ट यूनिवर्सिटी, रूस के साथ समझौता ज्ञापन किया है.

   एनआरटीआई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन है और इसका फोकस परिवहन संबंधी शिक्षा, बहुविषयी अनुसंधान और प्रशिक्षण पर है. इसकी स्‍थापना वर्ष 2018 में नई श्रेणी के अंतर्गत मानित विश्‍वविद्यालय के रूप में की गई ताकि रेल और परिवहन क्षेत्र के लिए बेहतर संसाधन का पूल बनाया जा सके.

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन नए एम्स की स्थापना को मंजूरी दी

   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू कश्मीर में दो और गुजरात में एक एम्स की स्थापना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. एक सरकारी बयान में बताया गया है कि जम्मू में संबा के विजयनगर में 1,661 करोड़ रुपये की लागत से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की जाएगी जबकि कश्मीर में पुलवामा के अवनतीपुरा में 18,28 करोड़ रुपये की लागत से अन्य एम्स बनाया जाएगा.

   इसके अलावा, गुजरात के राजकोट में 1,195 करोड़ रुपये की लागत से एम्स बनाया जाएगा. प्रधानमंत्री के विकास पैकेज के तहत जम्मू कश्मीर में दो (जम्मू में एक और कश्मीर में एक) एम्स का ऐलान किया गया था जबकि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में गुजरात में एम्स बनाने की घोषणा की थी.

   प्रत्‍येक एम्‍स में प्रतिदिन लगभग 1500 ओपीडी रोगी और वार्डों में प्रत्‍येक महीने 1000 मरीजोंकी चिकित्‍सा की जाएगी. प्रत्‍येक एम्‍स में एक मेडिकल कॉलेज, एक आयुष ब्‍लॉक, ऑडोटेरियम, नाईट शेल्‍टर , अतिथि गृह, छात्रावास तथा आवासीय सुविधाएं होंगी.

 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दी

   केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और जापान के बीच 75 अरब डॉलर की द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस कदम से रिजर्व बैंक की मुद्रा विनिमय दर के उतार-चढ़ाव के प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था करार (बीएसए) के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी.

   इस व्यवस्था के तहत रिजर्व बैंक को बैंक ऑफ जापान के साथ अधिकतम 75 अरब डॉलर तक मुद्रा अदला-बदली समझौते के लिए अधिकृत किया गया है. मुद्रा अदला-बदली में भारत और जापान के बीच ऐसी व्यवस्था है, जिसके जरिये आवश्यक रूप से अधिकतम 75 अरब डॉलर की एक दूसरे की मुद्रा की अदला-बदली की जायेगी. इससे विदेशी मुद्रा की लघु आवधिक कमी को पूरा कर भुगतान संतुलन को उचित स्तर पर रखा जा सकेगा.

   बीएसए भारत और जापान के बीच आपसी सहयोग का एक बढ़िया उदाहरण है. इसके जरिये दोनों देश मुश्किल समय को एक दूसरे को सहयोग कर सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा कायम कर सकेंगे. इस सुविधा से भारत के पास इतनी राशि की पूंजी इस्तेमाल के लिए तत्काल उपलब्ध हो सकेगी.

 

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