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टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स: 19 अक्टूबर 2019

टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 19 अक्टूबर 2019 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से-बौद्ध सर्किट ट्रेन और रक्षा मंत्रालय आदि शामिल हैं.

Oct 19, 2019 18:02 IST
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टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 19 अक्टूबर 2019 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से-बौद्ध सर्किट ट्रेन और रक्षा मंत्रालय आदि शामिल हैं.

पहली बौद्ध सर्किट स्पेशल ट्रेन शुरू: जानें क्या है इसकी खासियत

आईआरसीटीसी के अनुसार, यह ट्रेन महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारकों को कवर करेगी. यह ट्रेन नई दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से यात्रियों को लेकर यात्रा शुरू करेगी तथा गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थलों की यात्रा करवाने के बाद सफदरजंग रेलवे स्टेशन पर ही अपनी यात्रा समाप्त करेगी. आईआरसीटीसी ने यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय मानक अनुभव देने हेतु बौद्ध सर्किट ट्रेन में कई व्यवस्थाएं की हैं.

इस ट्रेन की यात्रा आठ दिन और सात रातों की होगी. इस ट्रेन के टूर पैकेज में रेल यात्रा के साथ लग्जरी होटल में ठहराना, परिवहन, एयर कंडीशन बसों में सभी जगहों पर घुमाना तथा विभिन्न भाषाओं के टूर गाइड्स की व्यवस्था होगी. पांच साल से कम उम्र के बच्चों को किराये से छूट दी गई है. 05 साल से 12 साल तक के बच्चों से पचास प्रतिशत किराया लिया जायेगा.

शाहबाज नदीम भारतीय टीम के लिए 30 साल की उम्र में किया टेस्ट डेब्यू

शाहबाज नदीम के पास क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में 15 वर्षों का समृद्ध अनुभव है. उनका टेस्ट कैप का नंबर 296 है. विराट कोहली ने शाहबाज नदीम को उनकी टेस्ट कैप दी. शाहबाज नदीम 15 साल पहले प्रथम श्रेणी मैच खेला था तथा उनके साथ भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी टीम के हिस्सा थे.

शाहबाज नदीम धीमी गति के बाएं हाथ के गेंदबाज हैं. उन्होंने अपने घरेलू क्रिकेट की शुरुआत 2004 में केरल के विरुद्ध झारखंड की ओर से खेलते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत की थी. उन्होंने आइपीएल (IPL) में साल 2011 में डेब्यू किया था. वे अब तक 64 मैच खेल चुके हैं. उन्होंने इन मैचों में कुल 42 विकेट अपने नाम किये हैं.

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूलों में लड़कियों के नामांकन को मंजूरी दी

रक्षा मंत्रालय ने यह फैसला सेना में महिलाओं की बराबर की भागीदारी, लैंगिक समानता तथा केंद्र सरकार द्वारा शुरू किये गये 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान को आगे बढ़ाने के लिहाज से लिया है. रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूलों में पर्याप्त संख्या में महिला कर्मियों की नियुक्ति एवं आधारिक संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को बढ़ाने के आदेश दिये जिससे की सैनिक स्कूलों में लड़कियों के नामांकन का काम शुरू किया जा सके.

सैनिक स्‍कूलों के स्थापना का महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों को उचित शिक्षण देकर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रवेश कराना था. साल 1961 में भारत के पहले सैनिक स्कूल की स्थापना महाराष्ट्र में हुई थी. यह फैसला रक्षा मंत्रालय द्वारा 02 साल पहले मिजोरम के सैनिक स्कूल छिंगछिप में शुरू किए गये पायलट परियोजना की सफलता के बाद लिया गया है.

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