ट्रंप सरकार और दुनिया में बदलाव के आसार

डोनाल्ड ट्रम्प के 45वें राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमेरिका को ह्वाइट हाउस में बदलाव देखने को मिलेगा। डोनाल्ड ट्रम्प की यह जीत कई परिप्रेक्ष्य में देखी जा रही है। कई लोगों के लिए ज्यादातर मीडिया की अटकलों के बावजूद यह अप्रत्याशित और आश्चर्यचकित करने वाली जीत है।

Created On: Nov 24, 2016 15:20 ISTModified On: Nov 24, 2016 15:23 IST

डोनाल्ड ट्रम्प के 45वें राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अमेरिका को ह्वाइट हाउस में बदलाव देखने को मिलेगा। डोनाल्ड ट्रम्प की यह जीत कई परिप्रेक्ष्य में देखी जा रही है। कई लोगों के लिए ज्यादातर मीडिया की अटकलों के बावजूद यह अप्रत्याशित और आश्चर्यचकित करने वाली जीत हैTrump and India। और कई लोगों ने तो ट्रम्प की जीत की संभावना पहले ही जता दी थी। ट्रम्प की जीत ने कई सवाल पैदा कर दिए हैं क्योंकि उन्होंने चुनाव अभियानों के दौरान कई मुद्दों पर विवादास्पद भाषण दिए थे। इसके अलावा उनके पास शासन संबंधी किसी प्रकार का अनुभव भी नहीं है। उनके सनक भरे चुनाव प्रचारों ने दुनिया भर के लोगों के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या ट्रम्प की जीत दुनिया को प्रभावित कर सकती है? विशेष रूप से भारत के नजरिए से यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि क्या ट्रम्प सरकार भारत को प्रभावित करेगी? हमने दोनों ही सवालों को विस्तार से विश्लेषण करने की कोशिश की है ताकि इस मुद्दे पर किसी प्रकार का ठोस दृष्टिकोण बनाया जा सके।

ट्रम्प का भारत और मोदी प्रेम
ट्रम्प के लिए शासन एक नया क्षेत्र होगा क्योंकि उन्हें किसी भी प्रकार के प्रशासनिक कार्य का कोई अनुभव नहीं है। अपने कई चुनाव प्रचारों में उन्होंने लगातार अलग– अलग मुद्दों और अलग– अलग मंचों पर भारत का उल्लेख किया था। पिछले वर्ष जून से अपने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान वे भारत के प्रति आलोचनात्मक और प्रशंसात्मक दोनों ही रवैये में नजर आए। भारतीयों, जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को दक्षिण एशिया में मजबूत और शक्तिशाली होते देखा है, का समर्थन भी ट्रम्प ने हासिल कर लिया था। इस्लाम की अतिवादी प्रथाओं पर ट्रम्प के सख्त विचार ज्यादातर भारतीयों से मेल खाते हैं। तीन माह पहले दिए एक साक्षात्कार में आतंकवाद पर बोलते हुए ट्रम्प ने पाकिस्तान को "आज की तारीख में संभवतः दुनिया का सबसे खतरनाक देश" बताया था और उन्होंने कहा था कि भारत ने पाकिस्तान को गलत काम करने से रोका है। आपको आतंकवाद की लड़ाई में भारत को शामिल करना ही होगा। उनके पास परमाणु हथियार और बेहद शक्तिशाली सेना है। वे वास्तव में स्थिति को नियंत्रित कर सकने वाले दिखते हैं। मुझे लगता है कि पाकिस्तान से निपटने के लिए मुझे भारत के साथ काफी करीबी संबंध रखना होगा। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा है की उनके राष्ट्रपति समयावधि में हिंदुस्तान और अमेरिका ‘सबसे अच्छे दोस्त’ बनेंगे।

कुछ ही समय पहले आतंक के खिलाफ मानवता विषय पर हुए एक कार्यक्रम में जिसका आयोजन ‘रिपब्लिकन हिन्दू समूह’ द्वारा किया गया था, ट्रम्प ने कहा था कि यदि वे राष्ट्रपति चुने गए तो भारत और अमेरिका के बीच मित्रवत सम्बन्ध बनेंगे l संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय समुदाय से अधिकतम वोट जुटाने के लिए ट्रम्प ने हिन्दुओं के लिए अपने प्रेम को जता कर हिन्दू कार्ड खेला। उन्होंने कई मौकों पर "आई लव हिन्दूज" कहा और लोगों ने उनके इस कथन की जबरदस्त सराहना भी की।
एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने कहा था कि, " भारत मोदी के नेतृत्व में अच्छा कर रहा है" लेकिन कोई भी इस बारे में बात करना पसंद नहीं करता। कई मौकों पर उन्होंने भारत और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में बात की और बताया की मोदी को भी उन्हीं के तरह कुछ लोग पसंद नहीं करते, जबकि वो अच्छा काम करते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि उनके राष्ट्रपति शासन के दौरान " भारत– अमेरिका सबसे अच्छे मित्र बनेंगे"। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का भी समर्थन किया।

ट्रम्प के बाद भारत–अमेरिकी संबंधों पर प्रभाव
भारत और अमेरिका का संबंध निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण है जो आर्थिक, व्यावसायिक या लोगों के आपसी संबंधों से भी ऊपर है। दोनों ही राष्ट्र एक समान लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ काफी तेजी से विकास कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में इनके संबंध अधिक मजूबत और स्थिर बनेगें।
हालांकि भारत को कुछ नीतियों पर कार्रवाई करने की जरूरत है जिससे ट्रम्प सरकार प्रभावित हो सकती है।

भारत– अमेरिका के बीच सहयोग दो मुख्य नीतियों – 'एक्ट ईस्ट और एशिया पिवट' पर निर्भर करता है। यदि नई सरकार एशिया– प्रशांत क्षेत्र में सार्वभौमिक सुरक्षा पर मूल्य आधारित तरीका अपनाती है तो नई दिल्ली के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। अपने चुनावी अभियानों के दौरान ट्रम्प ने अपने भाषण में कहा था कि एशिया, दक्षिण कोरिया और जापान में अमेरिका के करीबी भागीदारों को अमेरिकी सेना का खर्च खुद उठाना चाहिए। इसलिए इस प्रकार के फैसलों के बाद एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति में उथल– पुथल हो सकती है।

भारत और विश्व के लिए चिंता का एक और विषय है जलवायु परिवर्तन। अपने चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने एक बार कहा था कि जलवायु परिवर्तन चीन की चाल है और शपथ ली कि सत्ता में आने के बाद अमेरिका पेरिस में हुए जलवायु परिवर्तन समझौते से बाहर हो जाएगा। जबकि मोदी खुद इस समझौते की बाधाओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त दिलचस्पी दिखा रहे हैं। भविष्य में मोदी को इस मुद्दे पर ट्रम्प प्रशासन से निपटने में कठिनाई आ सकती है।

भारत की इन चिंताओं के अलावा कुछ अन्य मुद्दे भी हैं जहां ट्रम्प से अमेरिका और अमेरिकी नागरिकों के लिए कुछ चमत्कार करने की उम्मीद है क्योंकि वे अमेरिकियों के हित का वादा कर ही सत्ता में आए हैं। यहां हम विभिन्न क्षेत्रों के सूक्ष्म विवरण पर गौर करेंगें जो ट्रम्प के राष्ट्रपति युग की शुरुआत होने के बाद पहले जैसे नहीं रह जाएंगे।

1) अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करनाः ट्रम्प ने घोषणा की है कि अगले दशक में 24 मिलियन नौकरियों के साथ उन्होंने अमेरिका की जीडीपी को 4 फीसदी तक बढ़ाने की योजना बना ली है। इस काम को करने के लिए उनका मुख्य हथियार होगा कॉरपोरेट कर दर को कम करना और व्यापार के लिए नियामक रूपरेखाओं की सुविधा प्रदान करना। अपनी मुद्रा योजना के माध्यम से उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि बजट को संतुलित बनाने के लिए वे संघीय खर्च में कमी लाएगें। मुद्रा योजना में आने वाले वर्षों में संघीय बजट में प्रत्येक डॉलर के लिए एक फीसदी कमी की कल्पना की गई है। इससे ट्रम्प के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निजी व्यवसायों को रोजगार के अवसर पैदा करने का मौका मिलेगा। इससे बड़े और छोटे दोनों ही प्रकार के व्यवसायों के लिए अमेरिका का दरवाजा खुलेगा। ईबी– 5 (EB-5) वीजा प्रोग्राम का भारत में लाभकारी पकड़ बनाने की संभावना है। ईबी– 5 (EB-5) वीजा प्रोग्राम के प्रावधानों के तहत भारतीय कंपनियों को न्यूनतम 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश और अमेरिकी कामगारों के लिए कम– से– कम 10 नई नौकरियां पैदा करने की अनुमति दी जाएगी। कारोबार स्थापित करने का अर्थ होगा कि वे सभी ग्रीन कार्ड के लिए योग्य होंगे। वर्ष 2016 के आखिर तक भारत में संभावित करोड़पतियों की कुल संख्या 2.25 लाख होगी। यह प्रावधान अमेरिका में भारतीयों के लिए निवेश के नए अवसर प्रदान करेगा।

 

एच– 1बी (H– 1B) वीजा क्या है?
एच– 1बी (H– 1B) वीजा अमेरिका में आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम धारा 101(ए) (15) (एच) के तहत गैर– आव्रजन वीजा है। यह अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेषज्ञता वाले पेशों में विदेशी कामगारों को अस्थायी तौर पर नियुक्त करने की अनुमति देता है। यदि एच– 1बी (H– 1B) वीजा वाला एक विदेशी कामगार काम छोड़ देता है या प्रायोजक नियोक्ता द्वारा बर्खास्त कर दिया जाता है तो वह कामगार दूसरे गैर– आव्रजन दर्जा प्राप्त करने के लिए या तो आवेदन कर सकता है या उसे दर्जा बदलने, दूसरा नियोक्ता ढूंढ़ने या अमेरिका छोड़ने की अनुमति दी जा सकती है।


ईबी– 5 (EB-5) वीजा क्या है?
ईबी– 5 (EB-5) वीजा आप्रवासी वीजा श्रेणी है जो उच्च डिग्रियों वाले पेशेवरों और विज्ञान, कला या व्यापार के क्षेत्र में असाधारण क्षमता वाले व्यक्तियों को दिया जाता है। आम तौर पर इसकी जरूरत नौकरी के प्रस्ताव मिलने पर पड़ती है और अमेरिका का श्रम विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ लेबर –डीओएल) द्वारा लेबर सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अमेरिकी कामगारों और अमेरिकी श्रम बाजार के संरक्षण के लिए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आव्रजन वीजा सर्टिफिकेशन चाहने वाले विदेशी कामगार योग्य अमेरिकी कामगारों का स्थान न ले लें।

2) आव्रजन (Immigration) नियंत्रणः आव्रजन के बारे में बात करने के दौरान ट्रम्प ने अपना कट्टरपंथी और अतिवादी दृष्टिकोण दिखाया था । उनका निशाना मैक्सिको के लोगों पर था। ट्रम्प ने मैक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने और मैक्सिको को इसके लिए धन मुहैया कराने की वकालत की। उन्होंने इस बात की भी जोरदार वकालत की थी कि अमेरिकियों को ओपन जॉब्स के लिए प्राथमिकता तय करनी चाहिए और कौशल वीजाओं की संख्या निर्धारित करनी चाहिए ताकि अमेरिकियों के लिए अधिक नौकरी उपलब्ध हो सके। आव्रजन संबंधी यह खबर एच – 1 बी वीजा प्रोग्राम का उपयोग कर अरबों की कमाई करने वाली चोटी की आईटी कंपनियों के लिए बुरी खबर होगी।
एच–1बी प्रोग्राम कम लागत पर अमेरिका में कुशल भारतीयों को काम करने की अनुमति देता है। 2015 में अमेरिका ने 172748 एच 1 बी वीजा जारी किए थे। इनमें से ज्यादातर वीजा इंफोसिस, टीसीए और विप्रो जैसी कंपनियों में काम करने वाले भारतीयों को दिए गए थे। वर्ष 2014 में इंफोसिस ने अकेले ही 24000 से अधिक लेबर कंडिशन एप्लीकेशन (एलसीए) के लिए आवदेन किया था। इनकी जरूरत इस वीजा के लिए होती है। कॉग्निजेन्ट जैसे कई अमेरिकी कंपनियां जो भारत से अपना कारोबार करती हैं भी इन्हीं वीजा पर अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजती हैं। अमेरिकी कामगारों के मुकाबले भारतीय कामगार सस्ते होते हैं। शुरुआत में ट्रम्प ने एच–1बी वीजा की आलोचना की थी लेकिन बाद में भारतीय– अमेरिकी समुदाय से समर्थन हासिल करने के लिए वे एच– 1बी वीजा प्रोग्राम के पक्षधर बन गए। लेकिन इतिहास गवाह है, भारतीय कंपनियां जानती हैं कि प्रत्येक अमेरिकी राष्ट्रपति उम्मीदवार एच–1 बी वीजा प्रोग्राम का अपने चुनाव प्रचार में विरोध करता है लेकिन इनमें कटौती आज तक किसी ने नहीं की है।

3) विदेश नीति और आतंकवादः अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प ने आईएसआईएस के सफाए और आतंक फैलाने वाले देशों से होने वाले पलायन को नियंत्रण करने के बारे में काफी सख्त रवैया दिखाया था। भारत के युवाओं में आईएसआईएस के लिए काफी कम समर्थन दिखा है। यदि आव्रजन और आतंक निर्यात पर प्रतिबंध सफलतापूर्वक लागू कर लिया जाता है तो इससे पाकिस्तान को काफी नुकसान होगा। ट्रम्प द्वारा कट्टरपंथी इस्लाम पर आयोग बनाने की योजना पर भारत सरकार की नजरें बनी हुई हैं। ट्रम्प ने कट्टरपंथी इस्लाम के मुख्य आदर्शवाद और विश्वास के खिलाफ वैचारिक जंग हेतु मीडिया का उपयोग करने का तर्क दिया था। ट्रम्प ने अमेरिकी समाज में कट्टरपंथी इस्लाम को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क्स को भी सबसे सामने लाने का वादा किया है। ट्रम्प के इस वादे ने भारत सरकार को खुद की घरेलू सुरक्षा नीतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। भारत की सरकार ने आईएसआईएस के लिए किसी भी प्रकार के समर्थन का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी की मदद लेने का सक्रिय कदम उठाया है।

4) ऊर्जा योजनाः ट्रम्प ने अमेरिका के शैल तेल, कोयला भंडार और प्राकृतिक गैस के भंडारों का पता लगाने की अपनी योजनाओं के बारे में बात की ताकि ऊर्जा के मामले में अमेरिका को आत्म– निर्भर बनाया जा सके। ट्रम् ने वादा किया कि यदि वे राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो अपतटीय और तटवर्ती क्षेत्रों को खोलने की अनुमति देंगें, कोयले पर लगे प्रतिबंध को हटा देंगें एवं संघ की जमीन को पट्टे पर देंगें l भारत की घरेलू कंपनियां इंधन के मूल्यों में होने वाले इजाफे से प्रभावित होती हैं। राजकोषीय घाटे को वे भारत सरकार के हिस्से में डाल देती हैं और आखिरकार इस वजह से अनिवार्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है। यदि ट्रम्प अमेरिका के तेल क्षेत्र को खोलने की अपनी योजना का कार्यान्वयन करते हैं तो तेल क्षेत्र में भारत को काफी लाभ होगा, क्योंकि इससे तेल के वैश्विक मूल्य में स्थिरता आएगी। अमेरिका के इस कदम से भारतीय तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जिसकी विदेशी शाखा ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) है, जैसी भारतीय तेल कंपनियों के लिए व्यापार की अपार संभावनाएं बनेंगी और वे अपना कामकाज का विस्तार विश्व स्तर पर कर सकेंगी।

5) ओबामाकेयर को खत्म करनाः ट्रम्प ने ओबामाकेयर को खत्म करने की वकालत की है। इसके तहत बिना बीमा वाले अमेरिकी नागरिकों को सरकारी स्वास्थ्यसेवा क्षेत्र में शामिल किया जाता है। मुख्य रूप से इसकी स्थापना अमेरिकियों को सस्ती स्वास्थ्यसेवा मुहैया कराने के लिए की गई थी। ओबामाकेयर को हटाए जाने से भारतीय फार्मा क्षेत्र पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, के बारे में कई प्रकार की अटकलें लगाई जा रही हैं। जैसा कि हमने उपर बताया है फार्मास्युटिकल्स अमेरिका के लिए भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक रहा है। भारतीय निर्माताओं की सस्ती दवाएं ओबामाकेयर के उद्देश्य को पूरा करती हैं। ओबामाकेयर के तहत भारतीय दवा कंपनियों को उप–वैधीकरण मिलता है जो "बायोसिमिलर्स (जैविक रूप से समान गुण वाले)" के उपयोग की अनुमति देता है। इससे भारतीय कंपनियों को काफी लाभ होता है।
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि जब वर्ष 2010 में ओबामाकेयर पर हस्ताक्षर किया गया था तो भारत से अमेरिका कुल 31 बिलियन डॉलर का फार्मा निर्यात होता था। और ओबामाकेयर के पांच वर्षों के दौरान भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले फार्मा का मूल्य लगभग दुगना हो गया और यह 66 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का हो गया। यदि ट्रम्प का यह सफाया कार्यक्रम लागू हो जाता है तो इससे भारतीय दवा कंपनियों को काफी नुकसान होगा। भारतीय आईटी कंपनियां जो इस प्रोग्राम से जुड़ी हैं, मान सकती हैं कि उनका व्यवसाय खत्म हो सकता है और नतीजा होगा कि भारत में लोगों की नौकरियां छिन जाएंगीं।

6) नाफ्टा (NAFTA) और अन्य संगठनों पर: ट्रम्प ने बहुराष्ट्रीय संधियों पर अस्पष्ट रवैया अपनाया है। उन्होंने उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (नाफ्टा) जैसी बहुराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ बातें कहीं और ट्रांसअटलांटिक व्यापार एवं निवेश भागीदारी (टीटीआईपी) का प्रस्ताव दिया। दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि अमेरिकी विनिर्माण के लिए अनुकूल द्विपक्षीय सौदों पर बातचीत करना वे पसंद करेंगें।
वर्ष 1992 में अमेरिका ने कनाडा और मैक्सिको के साथ नाफ्टा पर हस्ताक्षर किया था। इसकी वजह से मैक्सिको को अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात को बढ़ाने में काफी मदद मिली। वर्ष 2015 में मैक्सिको ने कुल 295 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सामान अमेरिका को निर्यात किया। अमेरिका भारत का पहले नंबर का निर्यात स्थान बना। वर्ष 2015-16 में भारत के कुल निर्यात बाजार का 15.37 फीसदी निर्यात अमेरिका को किया गया। भारत ने अमेरिका को 40.33 बिलियन डॉलर का निर्यात किया लेकिन अमेरिका से भारत का आयात सिर्फ 21.81 बिलियन डॉलर का रहा। नाफ्टा जैसी बहुराष्ट्रीय संधियां मैक्सिको जैसे दूसरे देशों को निर्यात शुल्क में काफी रियायत देती हैं। यदि ऐसी संधियों को ट्रम्प प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया जाता है तो भारत को इससे लाभ होगा क्योंकि इससे भारत के लिए वस्त्र उत्पादों का अमेरिका को निर्यात करने का अवसर बढ़ जाएगा।

7) कर कटौती योजना का प्रभावः ट्रम्प ने कॉरपोरेट करों में 15% तक की कटौती की बात को जोर देकर कहा है। कॉरपोरेट कर की वर्तमान दर 35% है। करों में होने वाली यह जबरदस्त कटौती अमेरिका को दुनिया में व्यापार करने के लिए सबसे आकर्षक स्थानों में से एक बना देगा। यह विशेषरूप से उन अमेरिकी व्यापारों को अधिक प्रभावित करेगा जो दूसरे देशों में अपना कार्यालय खोल कर बैठें हैं और कम कर का भुगतान कर अधिन मुनाफा कमा रहे हैं। यदि यह योजना अमेरिका में लागू हो गई भारत में चल रहे अमेरिकी कारोबार वापस अपने देश में लौट सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां जो भारत जैसे देशों में व्यापार कर रही हैं और अच्छा काम करने लगेंगी। फोर्ड मोटर का मामला कुछ ऐसा ही मामला है। फोर्ड की निर्माण ईकाई ने अगस्त के महीने में अपने अब तक के सर्वाधिक निर्यात होने की घोषणा की थी। फोर्ड इंडिया ने भारत में बने अपने सभी वाहनों में से 67 फीसदी वाहनों का निर्यात किया। फोर्ड इंडिया ने भारत में किराए पर कार लेने के फलते– फूलते व्यापार में जूमकार में निवेश कर काफी निवेश किया है। फोर्ड इंडिया अमेरिका में जिस दर पर कॉरपोरेट कर का भुगतान करता है उसी दर पर भारत में भी कर का भुगतान करता है। यदि ट्रम्प सरकार कर को कम कर 15% कर देती है तो इसकी वजह से फोर्ड इंडिया के लिए भारत से अमेरिका वापस लौटने की संभावना बढ़ सकती है। यह खबर भारत में फोर्ड की फैक्ट्री में काम करने वाले 2000 कर्मचारियों के लिए बुरी खबर होगी। यदि ट्रम्प ने कर में कटौती का यह फैसला लागू कर दिया तो इससे अन्य अमेरिकी व्यापार वापस अमेरिका लौट सकते हैं।

8) चीन के व्यापार पर ट्रम्पः अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने चीन की आलोचना की है। उन्होंने चीन को करेंसी मैन्युपुलेटर बताया। ट्रम्प ने लगातार चीन में बनने वाले सामानों पर उच्च टैरिफ लगाने की बात कही। उन्होंने अमेरिकी व्यापार के रहस्यों के चोरी के लिए चीन पर मुकदमा करने की वकालत की और कहा कि चीन को अपने व्यापार सब्सिडी में कटौती करने के लिए मजबूर करने हेतु विश्व व्यापार संगठन में चीन के खिलाफ व्यापार संबंधी मुकदमा शुरु की जाए। ट्रम्प ने चीन के साथ व्यापार घाटे को कम करने की जरूरत पर फोकस किया। वर्ष 2015 में यह घाटा 365 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। यदि ट्रम्प अपना वादा निभाते हैं तो भारत के लिए यह काफी अच्छा रहेगा। क्योंकि अमेरिका के साथ चीन का विनिर्माण और व्यापार संबंध भारत से काफी पुराना है। अमेरिका में चीन से सबसे अधिक कंप्यूटर का आयात होता है। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका ने वर्ष 2015 में चीन से 74 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के कंप्यूटर हार्डवेयर और 100 बिलियम अमेरिकी डॉलर मूल्य के दूरसंचार उपकरणों का आयात किया। अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारत के दूरसंचार और कंप्यूटर उपकरणों की तुलना में यह सिर्फ 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर अधिक है। भारत अमेरिका को सबसे अधिक रत्न, फार्मास्युटिकल्स और हीरों का निर्यात करता है। इन तीनों वस्तुओं का कुल मूल्य 66 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस बीच चीन ने अमेरिका को 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के फार्मा उत्पाद का निर्यात किया है। इसलिए चीन के साथ व्यापार को कम करने का ट्रम्प का वादा भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।

उपरोक्त विश्लेषण के आधार पर हम कह सकते हैं कि पहले से यह कहना मुश्किल है कि ट्रम्प सरकार भारत के लिए अच्छी होगी या बुरी। जैसा कि हम देख रहे हैं कि ट्रम्प की कुछ योजनाएं भारत के लिए लाभकारी हैं तो कुछ नुकसान भरी। कुल मिलाकर ट्रंप की सरकार भारत के लिए कुछ हद तक लाभकारी सिद्ध हो सकती है क्योंकि इसके नकारात्मक प्रभावों की तुलना में सकारात्मक प्रभाव अधिक दिखाई दे रहे हैं।

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