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जीएसटी का एक साल पूरा, जानें इसकी उपलब्धियां एवं चुनौतियां

Jul 2, 2018 12:39 IST

    भारत सरकार भारतीय कर प्रणाली में अभूतपूर्व सुधार अर्थात वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के अस्तित्व में आने के एक वर्ष पूरे होने पर 1 जुलाई 2018 को ‘जीएसटी दिवस‘ के रूप में मनाया.

    केंद्रीय रेल, कोयला, वित एवं कंपनी मामले मंत्री पीयूष गोयल इस अवसर पर होने वाले समारोह की अध्यक्षता किए जबकि वित राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला विशिष्ट अतिथि थे.

    केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने भारतीय कर प्रणाली में अभूतपूर्व सुधार के एक वर्ष पूरे होने पर 1 जुलाई 2018 ‘जीएसटी दिवस‘ के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी.

    पहला वर्ष सामने आने वाली विभिन्न प्रकार की चुनौतियों एवं नीति निर्माताओं तथा कर प्रशासकों की इनसे बेहतर तरीके से निपटने की इच्छा और क्षमता दोनों ही रूप से उल्लेखनीय रहा है.

    इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि जीएसटी का पहला वर्ष विश्व के लिए भारतीय करदाताओं के भारतीय कर प्रणाली में आए इस अभूतपूर्व सुधार में प्रतिभागी बनने का उदाहरण रहा है.

    जीएसटी की सबसे बड़ी सफलता यह है कि जीएसटी परिषद एक अत्‍यंत कारगर एवं प्रभावशाली निर्णय निर्माता संघीय संस्‍था साबित हुई है.

    जीएसटी:

    जीएसटी का अर्थ वस्तु एवं सेवा कर है. यह एक अप्रत्यक्ष कर है जिसे माल और सेवाओं की बिक्री पर लगाया जाता है.

    संसद के केंद्रीय कक्ष में एक कार्यक्रम के दौरान 30 जून 2017 की मध्यरात्रि को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लॉन्च किया गया था.

    जीएसटी लागू करने का मकसद 'एक देश- एक कर' प्रणाली है जिसके तहत पूरे भारत में वस्तुओं का आवागमन एक से दूसरे कोने पर किसी भी बाधा के सहजता से हो.

    देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लिए संविधान (122वां संशोधन) विधेयक, 2014, संसद में प्रस्तुत किया गया था. संविधान में प्रस्तावित संशोधन में संसद और राज्य विधानसभा, दोनों को एक ही प्रकार के लेन-देन पर वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी लगाने के लिए कानून बनाने की शक्तियां प्रदान किया था.

    जीएसटी एक मूल्य वर्धित कर है जो कि विनिर्माता से लेकर उपभोक्‍ता तक वस्‍तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एक एकल कर है. प्रत्‍येक चरण पर भुगतान किये गये इनपुट करों का लाभ मूल्‍य संवर्धन के बाद के चरण में उपलब्‍ध होगा जो प्रत्‍येक चरण में मूल्‍य संवर्धन पर जीएसटी को आवश्‍यक रूप से एक कर बना देता है.

    जीएसटी अलग-अलग स्तर पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी,सेंट्रल सेल्स टैक्स, वैट, लक्ज़री टैक्स, सर्विस कर, इत्यादि  की जगह अब केवल जीएसटी लगेगा.

    टैक्स वसूली:

    सरकार का दावा है कि देश में जीएसटी लागू होने के पहले साल में कुल मिलाकर टैक्स कलेक्शन संतोषजनक रहा पर ज्यादातर राज्यों में तय लक्ष्य के मुताबिक टैक्स वसूली नहीं रहने के कारण साल के दौरान 47,843 करोड़ रुपए टैक्स क्षतिपूर्ति राज्यों को जारी किया गया. देश में जीएसटी एक जुलाई 2017 से लागू की गई. पिछले साल अगस्त- 2017 से मार्च 2018 तक जीएसटी राजस्व कुल मिलाकर 7.17 लाख करोड़ रुपए रहा.

    जीएसटी दिवस पर ‘वाणिज्य कर आपके द्वार’ योजना शुरू:

    वाणिज्य कर विभाग द्वारा जीएसटी दिवस पर ‘वाणिज्य कर आपके द्वार’ योजना शुरू की गयी है. इस अवसर पर वाणिज्य कर मुख्यालय विभूति खण्ड गोमतीनगर लखनऊ में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार की अध्यक्षता में एक विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया.

    भारतीय अर्थव्यवस्था पर जीएसटी का प्रभाव:

    जीएसटी भारत को एक सामान्य बाजार में बदल देगी, इससे व्यापार करने में अधिक आसानी होगी और सभी क्षेत्रों में कंपनियों की लागतों में भारी बचत होगी. यह उद्योग, उपभोक्ता और सरकार के सभी हितधारकों को लाभ पहुंचाएगा. इससे माल और सेवाओं की लागत कम हो जाएगी जिससे  अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों और सेवाओं का लाभ पूरी तरह से उठाया जा सकेगा.

    जीएसटी से भारत में निर्मित वस्तुओं और सेवाओं के प्रति राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतियोगिता बढ़ेगी जिस कारण भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' पहल को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

    भारत ने दोहरे जीएसटी मॉडल को इसकी अनूठी संघीय प्रकृति के कारण अंगीकार किया है.

    ई-वे (इलेक्ट्रॉनिक वे) विधेयक:

    ई-वे (इलेक्ट्रॉनिक वे) विधेयक के लागू किए जाने से देश भर में वस्तुओं की बाधामुक्त आवाजाही सुनिश्चित हुई है.

    निर्यातकों, छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों, कृषि एवं उद्योग, आम उपभोक्ताओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों को होने वाले लाभ की वजह से जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर कई प्रकार से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

    ‘मेक इन इंडिया‘ को बढ़ावा

    जीएसटी पहले ही ‘मेक इन इंडिया‘ को बढ़ावा दे चुका है और इससे भारत में ‘व्यवसाय करने की सुगमता‘ में सुधार आया है. जीएसटी के तहत कई प्रकार के करों को समावेशित किए जाने से अप्रत्यक्ष करों की एक समन्वित प्रणाली ने भारत को एक आर्थिक संघ बनाने का रास्ता प्रशस्त कर दिया है.

    सरकार ने जीएसटी पोर्टल पर तकनीकी गड़बडि़यों के कारण करदाताओं को होने वाली कठिनाइयों से निपटने के लिए एक आईटी समस्या समाधान तंत्र विकसित किया है.

    जीएसटी से होने वाले लाभ:

    Historic Launch of GST at Midnight of June 30=

    •    जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी.

    •    जीएसटी लागू होने से टैक्स का ढांचा पारदर्शी होगा जिससे काफी हद तक टैक्स विवाद कम होंगे. इसके लागू होने से राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि खत्म हो गए.

    •    जीएसटी लागू होने से निपुणता बढ़ने और कदाचार पर रोक लगने के कारण अधिकांश उपभोक्ताट वस्तुनओं पर समग्र कर भार कम होगा, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा.

    •    व्यापार और उद्योग के लिए एक मजबूत और व्यापक सूचना प्रौद्योगिकी प्रणाली भारत में जीएसटी व्यवस्था की नींव होगी इसलिए पंजीकरण, रिटर्न, भुगतान आदि जैसी सभी कर भुगतान सेवाएं करदाताओं को ऑनलाइन उपलब्ध  होंगी, जिससे इसका अनुपालन बहुत सरल और पारदर्शी होगा.

    •    व्याापार करने में लेन-देन लागत घटने से व्यापार और उद्योग के लिए प्रतिस्पर्धा में सुधार को बढ़ावा मिलेगा.

    कार्यक्रम में मौजूद वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि यह देखना दिलचस्प था कि राज्यों ने पार्टी लाइन से हटकर जीएसटी काउंसिल की 27 बैठकों में कैसे अपने हितों की रक्षा की। 31 राज्यों ने डेढ़ महीने के रेकॉर्ड टाइम में जीएसटी बिल पास किया। उन्होंने बताया कि जून में 95,610 करोड़ रुपए का GST कलेक्‍शन हुआ है.

    मौजूदा समय में देश में अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स 18 फीसदी अथवा उससे कम दर पर है. वहीं यह भी दावा किया कि जैसे-जैसे लोग इस टैक्स प्रणाली के तहत आने लगेंगे और ईमानदारी के साथ अपना टैक्स जमा करने लगेंगे, इस टैक्स दर को और कम किया जा सकेगा. केन्द्र सरकार ने बीते एक साल के दौरान इसी आदर्श पर चलते हुए 300 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स कम करने का काम किया है.

    जीएसटी व्यवसाय करने में आसानी के माध्यम से लोगों के जीवन में परिवर्तनकारी परिवर्तन लाया है और लघु व मझोले व्यवसाय के लिए अवसर प्रदान करने के साथ ही उपभोक्ताओं को राहत प्रदान किया है.

    यह औपचारिकता को बढ़ावा देता है, उत्पादकता में वृद्धि करता है, 'व्यवसाय करने में आसानी' को बढ़ावा देता है, जिससे छोटे और मझोले उद्यमों को फायदा मिलता है.

    पृष्ठभूमि:

    जीएसटी को लागू किए जाने से भारतीय अर्थव्यवस्था में रूपांतरकारी परिवर्तन आया है. जीएसटी से बहु-स्तरीय, जटिल अप्रत्यक्ष कर संरचना की जगह एक सरल, पारदर्शी एवं प्रौद्योगिकी आधारित कर व्यवस्था अस्तित्व में आई है. यह व्यवस्था अंतःराज्य व्यापार एवं वाणिज्य की बाधाओं को समाप्त करने के द्वारा एकल, एकसमान बाजार में भारत को समेकित कर देगी. यह देश में व्यवसाय करने की सरलता को बढ़ाएगी एवं ‘मेक इन इंडिया‘ अभियान को प्रोत्साहित करेगी. जीएसटी का परिणाम ‘ एक राष्ट्र, एक कर , एक बाजार‘ के रूप में सामने आएगा.

    जीएसटी के कार्यान्वयन से पहले, भारतीय कराधान प्रणाली केंद्रीय, राज्य एवं स्थानीय क्षेत्र लेवियों का एक मिश्रण था. जीएसटी के लिए संविधान में संशोधन के लिए जो बहस हुई, उनमें ऐसे तमाम मुद्वे थे जिनके लिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के बीच समाधान एवं सहमति की आवश्यकता थी. जैसाकि संविधान की धारा 279ए में प्रावधान है, वस्तु एवं सेवा कर परिषद (परिषद) 12 सितंबर 2016 को अधिसूचित एवं प्रभावी हुई.

    यह भी पढ़ें: जीएसटी परिषद ने सरलीकृत पद्धति शुरू करने को मंजूरी प्रदान की

     

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