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केंद्र सरकार ने प्रदूषण क्षमता के आधार पर उद्योगों को चार रंग योजना में पुन:वर्गीकृत किया

पुन:वर्गीकरण का उद्देश्य देश में एक स्वच्छ और पारदर्शी काम के माहौल को बनाने के प्रयास को बढ़ावा देना है.  इसमें पहली बार सफेद श्रेणी को शामिल किया गया है.

Mar 9, 2016 11:40 IST
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर ने 5 मार्च 2016 को प्रदूषण फ़ैलाने के आधार पर उद्योगों को चार रंग योजना में पुन:वर्गीकृत किया.

यह पुन:वर्गीकरण उद्योगों के प्रदूषण सूचकांक (पीआई स्कोर) पर निर्भर होगा. नई सूची इस प्रकार है :

औद्योगिक श्रेणी

पीआई स्कोर

उद्योगों की संख्या

लाल

60 एवं अधिक

60

संतरी

41 से 59

83

हरा

21 से 40

63

सफेद

20 तक

36


चार रंग योजना के मुख्य बिंदु

•    इस वर्गीकरण का उद्देश्य उद्योगों को पर्यावरण के उद्देश्यों के अनुरूप स्थापित करना है.
•    इस नए मानदंड से उन उद्योगों को बढ़ावा मिल सकेगा जो स्वच्छ तकनीक एवं प्रदूषण रहित क्रियाकलापों को अपनाना चाहती हैं.
•    उद्योगों में प्रदूषण कम करने के लिए वैज्ञानिक मानदंडों को अपनाए जाने पर विशेष बल दिया गया है.
•    पहले औद्योगिक क्षेत्रों का बंटवारा कच्चे माल के उपयोग पर आधारित माना जाता था, अब विनिर्माण उद्योगों में उस प्रक्रिया को अपनाया गया है जिससे प्रदूषण उत्सर्जित होने की अधिक सम्भावना है.
•    नयी वर्गीकरण प्रणाली में उद्योगों को आत्म मूल्यांकन की सुविधा दी गयी है एवं पिछले आकलन को समाप्त कर दिया गया.
•    पुन:वर्गीकरण का उद्देश्य देश में एक स्वच्छ और पारदर्शी काम के माहौल को बनाने के प्रयास को बढ़ावा देना है.
•    लाल श्रेणी में मौजूद उद्योगों को पारिस्थितिकी रूप से चिंताजनक अथवा संरक्षित क्षेत्र में कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी जबकि सफेद श्रेणी को गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की पहचान करने के लिए बनाया गया.

सफेद श्रेणी की विशेषताएं

•    इस नई उद्योग श्रेणी को शामिल किया गया है एवं 36 उन औद्योगिक क्षेत्रों को जो व्यावहारिक रूप से गैर-प्रदूषणकारी हैं उन्हें भी शामिल किया.
•    इस श्रेणी के उद्योगों को सरकार से पूर्व अनुमति नहीं लेनी होगी.
•    इसमें शामिल उद्योग हैं – बिस्कुट ट्रे एवं पीवीसी शीट से बनने वाले उत्पाद, सूती एवं ऊनी हौजरी, इलेक्ट्रिक लैंप (बल्ब आदि).

पुनःवर्गीकरण क्यों ?

•    वर्गीकरण के पुराने नियमों के अनुसार विभिन्न उद्योगों में प्रदूषण के स्तर का पता लगा पाना मुश्किल हो रहा था.
•    उदाहरणस्वरुप पिछले आकलनों में जो उद्योग गंभीर रूप से प्रदूषण नहीं फैला रहे थे उन्हें भी लाल श्रेणी में रखा गया था.
•    इसलिए अब उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकृत किया गया है.

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