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मुख्यमंत्री योगी ने मदरसों हेतु एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की घोषणा की

Oct 30, 2017 16:34 IST

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में मदरसों हेतु नया पाठ्यक्रम जारी करने की घोषणा की है. इस पाठ्यक्रम के तहत मदरसा शिक्षा में एनसीईआरटी की पुस्तकों को भी शामिल किया जाएगा.

एनसीईआरटी की किन पुस्तकों को शामिल किया जाएगा, इसके लिए उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड एनसीईआरटी और सीबीएसई से बातचीत के बाद मदरसे में पढ़ाए जाने योग्य पुस्तकों को चिह्नित करेगा.

पाठ्यक्रम के विषय में दूसरे राज्यों में चल रहे मदरसों के पाठ्यक्रम का भी सरकार अध्ययन कर रही है. सचिव और रजिस्ट्रार स्तर पर अब तक तीन कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी है. पाठ्यक्रम में कुछ बदलावों को लेकर चर्चा की जा रही है. जो निम्न है-

  • कक्षा 1 से 5 तक दीनियात के अतिरिक्त अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित और सामाजिक विज्ञान विषय प्रस्तावित है.
  • फौकनिया (कक्षा 6 से 8 तक) में दीनियात के अतिरिक्त अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, गणित और सामाजिक विज्ञान के साथ-साथ प्रारंभिक अरबी और फारसी विषय की पढ़ाई की जाएगी.

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  • कक्षा 9वीं से 10वीं में सभी उपरोक्त विषयों के अतिरिक्त गृह विज्ञान को भी विषय के रूप में कोड़ने की योजना है.
  • उच्च आलिया यानि 11वीं और 12वीं में अंग्रेजी, उर्दू और दीनियात आवश्यक विषय होंगे, मासियात के अलावा साईंस या आर्ट्स वैकल्पिक विषय में आएंगे.
  • विज्ञान विषयों के साथ फिजिक्स, कैमेस्ट्री और गणित आवश्यक होंगे, यदि कोई छात्र आर्ट्स विषय चुनता है तो उसे भूगोल, इतिहास और राजनीतिक शास्त्र विषय का अध्ययन आवश्यक होगा.

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हालांकि शिया मुस्लिम धर्म गुरु मौलाना सैफ अब्बास ने राज्य सरकार की इस योजना का विरोध किया है. शिया मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार एनसीईआरटी की किताबें अपने खेमे यानी दिल्ली बोर्ड और यूपी में पूरी नहीं हो पा रही है और इसके बाद इसे मदरसों में लागू करने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए कोई अन्य शिक्षा क्षेत्र के अलावा मदरसों को ही क्यों चुना गया और सरकार मदरसों को ही निशाना क्यों बना रही है.

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मदरसा के प्रिंसिपल मौलाना फरीदुल हसन के अनुसार मदरसों में दिन की पढ़ाई होती है. यहां के टीचर अभी इस पाठ्यक्रम के लिए तैयार नहीं है. मदरसों के पास अभी इंफ्रास्टक्चर भी नही है इसके अतिरिक्त मदरसा शिक्षा की अलग पहचान है.

सुन्नी धर्म गुरु रशीद फिरंगी महली ने भी इसका विरोध किया है. मदरसे इसके लिए तैयार नहीं है और पहले कमेटी बनाई जाए और उसके बाद फैसला लिया जाए.