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अमेरिका ने परमाणु संधि से अलग होने के बाद ईरान एक्शन ग्रुप बनाया

Aug 17, 2018 14:07 IST

    अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने 16 अगस्त 2018 को ईरान के साथ अपने संबंधों को सुधारने हेतु ईरान एक्शन ग्रुप (आईएजी) की स्थापना करने की घोषणा की. यह घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान परमाणु समझौते से स्वयं को अलग किये जाने की घोषणा के बाद की गई.  

    पोम्पियो ने देश के योजना विकास विभाग के निदेशक ब्रायन हुक को इस ग्रुप का प्रमुख बनाया है.

    प्रमुख तथ्य

    •    आईएजी के गठन का मूल उद्देश्य ईरानी शासन के व्यवहार को बदलना है. समूह यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी विदेश विभाग ईरान के अंतःक्रिया भागीदारों के साथ मेल-जोल बनाए रखे.

    •    आईएजी उन देशों के साथ भी संबंधों को बेहतर बनाने का प्रयास करेगा जो संयुक्त राज्य अमेरिका की ही भांति ईरान के खतरे को भली-भांति समझते हैं.

    •    समूह के निर्माण की घोषणा के बाद, आईएजी के नए प्रमुख ब्रायन हुक ने कहा कि ईरान की घातक गतिविधियां काफी व्यापक थीं. ईरान के प्रति अमेरिका की नई रणनीति सभी इस प्रकार की अभिव्यक्तियों को संबोधित करती है.

    •    ब्रायन हुक को ‘ईरान के लिए विशेष प्रतिनिधि’ के तौर पर नियुक्त किया गया है.

    महत्व

    अमेरिका द्वारा इस नई नीति की घोषणा एवं ब्रायन हुक को उसका अध्यक्ष नियुक्त किये जाने के बाद वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के आसार बन सकते हैं.

     दूसरी ओर, ऐसी धारणाएं भी हैं कि अगर राष्ट्रपति ट्रम्प वार्ता के लिए जाते हैं तो अमेरिकी-ईरान कूटनीति को सुविधाजनक बनाने में हुक एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

     विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता में प्रवेश करने से पहले यह पहला कदम है, तो यह ईरान की वैध चिंताओं पर विचार करने के लिए यथार्थवादी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मददगार होगा.


    पृष्ठभूमि

    •    ईरान के नेताओं की आलोचना करने के बावजूद जुलाई 2018 में ट्रम्प ने घोषणा की कि वह ईरान के नेताओं से बिना किसी शर्त बैठक करना चाहेंगे.

    •    इसके उपरांत 16 अगस्त को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ट्रम्प को परमाणु समझौते से स्वयं को अलग करने के निर्णय के बारे में फिर से विचार करने के लिए कहा.

    •    ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुलाह अली खोमेनी ने अगस्त 2018 में कहा था कि अमेरिका द्वारा परमाणु संधि से स्वयं को अलग करने के बाद उससे बातचीत की उम्मीद नहीं रह जाती.

     

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