Search
LibraryLibrary

यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड रखा गया

May 31, 2018 10:06 IST

    अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 30 मई 2018 को घोषणा की कि वे यूएस पैसिफिक कमांड का नाम परिवर्तित कर के यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड रख रहे हैं. यह माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते आर्थिक और सैन्य प्रभाव को कम करना है.

     

    यह कदम अमेरिकी रणनीतिक सोच में भारत के बढ़ते महत्व को भी दर्शाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गठित (US Pacific Command) अमेरिकी प्रशांत कमान या पीएसीओएम को अब से इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम से जाना जाएगा.

    अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने ज्वाइंट बेस पर्ल हार्बर में चेंज ऑफ गार्ड सेरेमनी के दौरान इस आशय की घोषणा की. कार्यक्रम के दौरान एडमिरल फिल डेविडसन ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर के रूप में हैरी हैरिस का स्थान लिया.

    यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड

    यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM, पहले USPACOM) संयुक्त राज्य अमेरिका के सशस्त्र बलों की एक एकीकृत लड़ाकू टुकड़ी है जो भारत-एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए ज़िम्मेदार है. इस क्षेत्र में होने वाले सैन्य ऑपरेशन के लिए इसी टुकड़ी को भेजा जाता है. यह अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कमांड भी है क्योंकि यह लगभग 100 मिलियन स्क्वायर मील में फैले क्षेत्र की रक्षा का जिम्मा संभालती है.

    यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का कमांडर, अमेरिकी रक्षा मंत्री के माध्यम से अमेरिकी राष्ट्रपति को रिपोर्ट करता है. इस कमांड को अमेरिकी पैसिफिक सेना, अमेरिकी पैसिफिक फ्लीट, अमेरिकी पैसिफिक वायु सेना, अमेरिकी पैसिफिक समुद्री सेना, अमेरिकी सेना जापान, अमेरिकी सेना कोरिया, विशेष संचालन कमांड कोरिया, और विशेष संचालन कमांड पैसिफिक द्वारा सहायता दी जाती है.

     


    भारत पर प्रभाव

    यूएस पैसिफिक कमांड का नाम परिवर्तित करके यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड रखने से भारत को भी इसके कवर्ड क्षेत्र में रखा जायेगा. इसका परिणाम यह होगा कि चीन के इस क्षेत्र में बढ़ते प्रभुत्व को कम करने के लिए अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को सामने लायेगा. इस कमांड में 3,75,000 से अधिक सैनिक कार्यरत हैं तथा भारतीय क्षेत्र में भारतीय सैन्य बल का सहयोग करने के लिए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड मिलकर काम कर सकेगी.

     

    यह भी पढ़ें: भारत-नेपाल के मध्य संयुक्त सैन्य अभ्यास सूर्यकिरण-XIII उत्तराखंड में आरंभ

     

    Is this article important for exams ? Yes1 Person Agreed

    DISCLAIMER: JPL and its affiliates shall have no liability for any views, thoughts and comments expressed on this article.

    Newsletter Signup

    Copyright 2018 Jagran Prakashan Limited.
    This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK