विश्व महिला दिवस: शीर्ष 10 महिलाएँ जिन्होंने भारत को एक नयी दिशा दी

8 मार्च को विश्व महिला दिवस के अवसर पर, हम कुछ चुनिन्दा भारतीय महिलाओं द्वारा भारत में महिला उत्थान के लिए किये गए प्रयासों पर प्रकाश डाल रहे हैं. जिसके तहत हमने शीर्ष 10 महिलाओं की सूची तैयार की है.

Created On: Mar 7, 2017 15:25 ISTModified On: Mar 7, 2017 18:19 IST

आजादी से पहले और बाद में भारत को एक देश तथा समाज के रूप में आगे ले जाने में महिलाओं का अतुलनीय योगदान रहा है. महिलाओं ने सभी क्षेत्रो चाहे वो सांस्कृतिक हो, या राजनैतिक हो, या वैज्ञानिक हो, या कला से जुड़ा हो हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर अपना योगदान दिया है. आजादी के बाद कुछ महिलाए जिन्होंने अपने क्षेत्र में भारत के समाज को एक नयी दिशा दी है वो निम्नलिखित है -

1. सरोजिनी नायडू

Sarojini Naiduसरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को भारत के हैदराबाद नगर में हुआ था। सरोजिनी नायडू गाँधीजी के विचारों से प्रभावित होकर देश के लिए समर्पित हो गयीं। एक कुशल स्वत्रन्त्रता सेनानी की भाँति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र में दिया. उन्होंने अनेक राष्ट्रीय आंदोलनों का नेतृत्व किया और जेल भी गयीं।

उनकी बाते लोगो खासकर महिलाओं के ह्रदय में जूनून जगाने के साथ साथ देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित करती थी. वे बहुभाषाविद थी और क्षेत्रानुसार अपना भाषण अंग्रेजी, हिंदी, बंगला या गुजराती में देती थीं। लंदन की सभा में अंग्रेजी में बोलकर इन्होंने वहाँ उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

वह अपनी प्रतिभा के कारण 1925 में कानपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन की वे अध्यक्षा बनीं और 1932 में भारत की प्रतिनिधि बनकर दक्षिण अफ्रीका भी गईं। भारत की स्वतंत्रता के बाद वे उत्तरप्रदेश की पहली राज्यपाल बनीं। जो कि आने वाले समय में महिलाओं को प्रेरित करता रहेगा.

2. इन्दिरा प्रियदर्शिनी गाँधी 

इंदिरा गांधी का जन्म  19 नवंबर 1917 को नेहरु परिवार में हुवा. उनके पिता की मृत्यु के बाद सन् 1964 में उनकी नियुक्ति एक राज्यसभा सदस्य के रूप में हुई। इसके बाद वे तत्कालीन प्रधान मंत्री लालबहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना और प्रसारण मत्री बनीं। Indira Priydarshini Gandhi
लालबहादुर शास्त्री के आकस्मिक देहांत के पश्चात इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। प्रधान मंत्री बनाने के तुरंत बाद से उन्होंने भारत में बैंको का राष्ट्रीयकरण किया तथा और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए भारत में हरित क्रांति लागू की. बांग्लादेश को स्वाधीनता देने वाले 1971 के भारत-पाक युद्ध में निर्णायक जीत के बाद उन्हें “दुर्गा” के नाम से सम्भोधित किया जाने लगा. उनका शशक्त व्यक्तित्व तथा लौह नारी वाली छवि दुनियाभर की महिलाओं को प्रेरित करती रहेगी.

3.कल्पना चावला 

Kalpana in NASAकल्पना चावला का जन्म 17 मार्च 1962 को करनाल, हरियाणा में हुवा. कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी।
कल्पना ने वैमानिक अभियान्त्रिकी भारत में करने के बाद 1982 में संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं और 1984 में टेक्सास विश्वविद्यालय आर्लिंगटन से वैमानिक अभियान्त्रिकी में उन्होंने विज्ञान निष्णात की उपाधि प्राप्त की।

कल्पना चावला को  मार्च 1994 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर में शामिल किया गया और उन्हें 1998 में अपनी पहली उड़ान के लिए चुना गया था। कल्पना चावला  अंतरिक्ष में उड़ने वाली भारत में जन्मी प्रथम महिला थीं और अंतरिक्ष में उड़ाने वाली भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति थीं.

उन्होंने भारत में अपनी इस उड़ान के बाद उन्होंने भारत में करोड़ों प्रशंसक बनाए खासकर महिलाओं और छात्राओ जो आगे चलकर कल्पना दीदी जैसा बनाना चाहती थी.

उनका जीवन आने वाले समय में भी हर पीढी की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा श्रोत रहेगा. जो महिलाओं को उनके सपनो को जीने के लिए प्रेरित करता रहेगा.

4. मायावती

मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को नयी दिल्ली में हुवा. उनके पिता श्री प्रभु दयाल एक सरकारी कर्मचारी थे तथा माता रामरती एक गृहणी थीं। Kumari Mayawati

सन् 1977 में कांशीराम के सम्पर्क में आने के बाद उनसे प्रभावित हो के उन्होंने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय ले लिया। सन् 1984 में बहुजन समाजवादी पार्टी के स्थापना के समय वह  कांशीराम के संरक्षण के अन्तर्गत वउनकी कोर टीम का हिस्सा रहीं.
वह 1989 में बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश से संसद सदस्य निर्वाचित हुयी. तथा 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुयी. उन्होंने 1995 में प्रथम भारतीय दलित महिला के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य की मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली।

तब से ले के अब तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती एक मजबूत स्तम्भ है। अभी वह बहुजन समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष है. उनका जीवन खासकर समाज के निचले वर्ग की महिलाओं के लिए बहुत प्रेरणा श्रोत है.

उन्होंने भारत जैसे भेदभाव वाले समाज में एक दलित परिवार से उठकर राजीनीति में अपना परचम लहराया. उनका व्यक्तिव से प्रभावित हो के अन्य बहुत सी निचले तबके की महिलाओं को राजनीति तथा समाज सुधार के लिए आगे आने में आत्मविश्वास देता रहेगा.

5. सोनिया गांधी

Sonia Gandhiसोनिया का जन्म वैनेतो, इटली के विसेन्ज़ा क्षेत्र से 20 कि०मी० दूर स्थित एक छोटे से गाँव लूसियाना में हुआ था। 1968  में दोनों का विवाह हुआ जिसके बाद वे भारत में रहने लगीं। राजीव गांधी के साथ विवाह होने के काफी समय बाद उन्होंने 1987 में भारतीय नागरिकता स्वीकार की.
1991 में राजीव गांधी की हत्या होने के बाद ही, कांग्रेस के वरिष्ट नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा कर दी परंतु सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया.
बाद में सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 2004 और 2009 लोकसभा चुनाव में विजय हासिल की. फ़ोर्ब्स मैगजीन के अलावा अन्य कई सर्वे में सोनिया गाँधी को भारत की सबसे ज्यादा प्रेरणा दायक राजनीतिज्ञ घोषित किया गया है.

सोनिया गांधी ने भारतीय राजनीती में महिलाओं को आरक्षण देने का सदैव पुरजोर समर्थन किया और हमेशा ही महिला सशक्तिकरण के लिए संघर्ष किया.

6. सुषमा स्वराज Sushma Swaraj

सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 में हुवा. शुरुवाती पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले जयप्रकाश नारायण के आन्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गयीं। 

वर्तमान मेंवह एक भारतीय महिला राजनीतिज्ञ और भारत की विदेश मंत्री हैं। सुषमा स्वराज को  वर्ष 2009 में भारत की भारतीय जनता पार्टी द्वारा संसद में विपक्ष की नेता चुना गया.

सुषमा स्वराज को वर्ष 2014 में भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी. उनके नाम  देश में किसी राजनीतिक दल की पहली महिला प्रवक्ता बनने की उपलब्धि दर्ज है।
सुषमा स्वराज महिला सशक्तीकरण पर बोलती रही है तथा उन्होंने अपने राजनीतिक कार्यकाल में महिलाओं के विकास के लिए काफी काम भी किये है. और उनका प्रभावशाली व्यक्तित्व महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हमेशा रहेगा.

7. ममता बनर्जी

Mamta Banarjeeममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955, को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुवा था. उनको युवा आयु में ही राज्य महिला कांग्रेस की महासचिव चुन लिया गया था . ममता बनर्जी ने कोलकाता के जादवपुर लोक सभा क्षेत्र से उन्होंने अनुभवी नेता सोमनाथ चटर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा और ये चुनाव जीत कर वे सबसे युवा भारतीय सांसद बन गई।

वह 1991 में पी वी नरसिम्हाराव की सरकार में वे मानव संसाधन, युवा कल्याण एवं खेलकूद, और महिला-बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री भी रहीं।
कांग्रेस पार्टी से मतभेद के चलते उन्होंने आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। उन्होंने सिंगुर में टाटा मोटर्स के द्वारा कारखाने लगाये जाने का विरोध किया। पश्चिम बंगाल सरकार के 10000 एकड़ जमीन को विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाने के प्रस्ताव का ममता बनर्जी ने जोरदार विरोध किया। उनका यह कार्य ग्रामीण परिवेश के सैकड़ो परिवारों तथा महिलाओं,जिनकी जमीन पर यह आर्थिक क्षेत्र बनाना था, के लिए काफी महत्वपूर्ण था.
वर्तमान में वह अभी बंगाल की मुख्यमन्त्री है. निम्न माध्यम वर्गीय परिवार से होने के बावजूद उन्होंने कम उम्र में कई राजनैतिक बुलंदियों को छुवा. ममता बनर्जी का एक स्वंतंत्र तथा शासख्त महिला का व्यक्तित्व है जो उनके काम करने के तरीको में भी झलकता है. उनका जीवन महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए एक आदर्श से कम नहीं है.

8. जे. जयललिता 

जयललिता का जन्म 24 फ़रवरी 1948 को मैसूर राज्य (जो कि अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा तालुक के मेलुरकोट गांव में हुआ था। वे 15 वर्ष की आयु में कन्नड फिल्मों में मुख्यह अभिनेत्री की भूमिकाएं करने लगी थीं। J.Jayalalitha

फिल्मी करियर के बाद जयललिता ने  एम॰जी॰ रामचंद्रन के साथ 1982 में अपना राजनीतिक करियर आरम्भ किया. जयललिता ने 1984 से 1989 के दौरान तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया।
रामचंद्रन का निधन के बाद उन्हें रामचंद्रन का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया। जयललिता 24 जून 1991 से 12 मई 1996 तक राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। वह 2011 में वह तमिलनाडु की  तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं।

उन्होंने 16 मई 2011 को मुख्यंमंत्री पद की शपथ लीं और तब से वे राज्य की मुख्यमंत्री पद पर रहीं। तमिलनाडु में लोग उन्हें अम्मा (मां) और कभी कभी पुरातची तलाईवी ('क्रांतिकारी नेता') कहकर बुलाते हैं। अपने मुख्यमंत्री काल में जयललिता ने महिलाओ के विकास के लिए कई योजनाये आरम्भ की थीं.

उनके प्रयासों से तमिलनाडु में महिलाओं की प्रजानन दर भारत में सबसे कम है. उन्होंने महिलाओं की शादी के लिए सरकार की ओर से सोना देने की योजना आरम्भ की.
जयललिता के प्रयासों से तमिलनाडु में महिलाओं के साथ सब से कम आपराधिक घटनाएं होती है. उनका सम्प्पूर्ण जीवन तथा कार्य महिलाओं के कल्याण को समर्पित रहे. 5 दिसम्बर 2016 को रात 11:30 बजे इनका निधन हो गया।

9. सुनीता विलियम्स

Sunita Wसुनीता लिन पांड्या विलियम्स का जन्म 19 सितम्बर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य में यूक्लिड नगर में हुआ था। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर एक विश्व किर्तिमान स्थापित किया है।

सुनीता का जून 1998 में अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा में चयन हुआ और प्रशिक्षण शुरू हुआ.सुनीता अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। सुनीता विलियम्स ने सितंबर / अक्टूबर 2007 में भारत का दौरा भी किया।

जून, 1998 से नासा से जुड़ी सुनीता ने अभी तक कुल 30 अलग-अलग अंतरिक्ष यानों में 2770 उड़ानें भरी हैं। भारत सरकार द्वारा सुनीता को विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें नेवी एंड मैरीन कॉर्प एचीवमेंट मेडल, नेवी कमेंडेशन मेडल , ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल जैसे कई सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
सुनीता विलियम्स महिलाओं के विज्ञान तथा तकनीकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक प्रेरणा हैं.

10. किरण बेदी 

किरण बेदी जन्म 9 जून 1949 को अमृतसर में हुवा. किरण बेदी सन 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में सम्मिलित होने वाली वे प्रथम महिला अधिकारी हैं.  किरण बेदी ने पुलिस सेवा के अंतर्गत अनेक पदों पर रहते हुए अपनी कार्य-कुशलता का परिचय दिया है। Kiran Bedi IPS

वह पिछले पुलिस अनुसंधान और विकास के भारत के ब्यूरो के महानिदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था. किरण बेदी 27 नवम्बर 2007 को स्वेच्छा से पुलिस सेवा से रिटायर हो गई.
किरन बेदी के निडर एवं मानवीय दृष्टिकोण ने पुलिस कार्यप्रणाली एवं जेल सुधारों के लिए अनेक आधुनिक आयाम जुटाने में महत्वपूर्ण योगदान किया है।

उनकी निःस्वार्थ कर्त्तव्यपरायणता के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा शौर्य पुरस्कार से नवाजा गया. इसके अलावा उन्हें एशिया का नोबल पुरस्कार कहा जाने वाला रमन मैगसेसे पुरस्कार से भी उन्हें नवाजा गया है।
उनके द्वारा संचालित दो स्वयं सेवी संस्स्थाएं हैं- नव ज्योति (1988) एवं इंडिया विजन फाउंडेशन (1994) रोजाना हजारों गरीब बेसहारा बच्चों तक पहुँचकर उन्हें प्राथमिक शिक्षा तथा स्त्रियों को प्रौढ़ शिक्षा उपलब्ध कराती है।

‘नव ज्योति संस्था’ नशामुक्ति के लिए इलाज करवाने के अलावा झुग्गी बस्तियों, ग्रामीण क्षेत्रों में तथा जेल के अंदर महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण और परामर्श भी उपलब्ध कराती है।

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