विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 मार्च को मनाया गया

विश्व मौसम विज्ञान दिवस प्रतिवर्ष 23 मार्च को मनाया जाता है. इस दिवस पर देश के विभिन्न हिस्सों में बैठकें, संगोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम होते हैं जिनमें मौसम वैज्ञानिक आपस में विचार एवं अनुभव बांटते हैं.

Created On: Mar 23, 2019 10:24 ISTModified On: Mar 23, 2019 10:44 IST

23 मार्चः विश्व मौसम विज्ञान दिवस

विश्व मौसम विज्ञान दिवस 23 मार्च 2019 को दुनिया भर में मनाया गया. इस दिवस का उद्देश्य लोगों को मौसम विज्ञान तथा इसमें हो रहे परिवर्तन के बारे में जागरूक करना है.

विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष, मौसम विज्ञान शोध के लिए पुरस्कार दिए जाते हैं. इन पुरस्कारों में  प्रोफेसर डॉ. विल्हो वाईसाईला अवार्ड, इंटरनेशनल मेटरोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन प्राइज और द नोर्बर्ट गेरबीयर- मुम्म इंटरनेशनल अवार्ड शामिल हैं.

विश्व मौसम विज्ञान दिवस का विषय

वर्ष 2019 के विश्व मौसम विज्ञान दिवस का विषय “The Sun, the Earth and the Weather” है. प्रत्येक साल 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया जाता है. यह दिवस विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा मनाया जाता है.

विश्व मौसम विज्ञान दिवस:

•   विश्व मौसम विज्ञान दिवस प्रतिवर्ष 23 मार्च को मनाया जाता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा वर्ष 2011 में विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर 'जलवायु हमारे लिए' (Climate for You) विषय पर जोर दिया गया.

•   इस दिवस पर देश के विभिन्न हिस्सों में बैठकें, संगोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम होते हैं जिनमें मौसम वैज्ञानिक आपस में विचार एवं अनुभव बांटते हैं.

•   विश्व मौसम विज्ञान संगठन सम्मेलन में वर्ष 1950 में संगठन के गठन के उद्देश्य को लागू करने के लिए 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

विश्व मौसम विज्ञान संगठन:

•   विश्व मौसम विज्ञान संगठन एक मौसम विज्ञान संगठन है, जिसे 11 अक्टूबर 1947 को हुई संधि के बाद 23 मार्च 1950 में स्थापित किया गया था. इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में है.

•   अंतरराष्ट्रीय मैसम विज्ञान संगठन मौसम विज्ञान, परिचालन जल विज्ञान और संबंधित भू-विज्ञान के लिए वर्ष 1951 में संयुक्त राष्ट्र का विशेष एजेंसी बना था. विश्व मौसम विज्ञान संगठन में कुल 191 सदस्य देश एवं क्षेत्र हैं.

•   संगठन की स्थापना का उद्देश्य मानव के दुखदर्द को कम करना एवं संपोषणीय विकास को बढावा देना है. पहले के विपरीत वर्तमान में मौसम विज्ञान में केवल मौसम संबंधी विधा शामिल नहीं है बल्कि इसमें पूरा भू-विज्ञान है.

•   यह संगठन, पृथ्वी के वायुमंडल की परिस्थिति और व्यवहार, महासागरों के साथ इसके संबंध, मौसम और परिणामस्वरूप जल संसाधनों के वितरण के बारे में जानकारी के बारे में, संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक आवाज है.

•   इस संगठन का उपयोग बाढ़, सूखा एवं भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदा का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है.

मौसम विज्ञान अध्ययन द्वारा विश्वभर में जलवायु परिवर्तन की परिघटना को बेहतर समझने के लिए अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में उपग्रह लगाए जाते हैं. इससे भारतीय वैज्ञानिक मौसम और जलविज्ञान अध्ययन करते रहते है. यह दिवस आपदा जोखिम को कम करने में शुरुआती चेतावनी एक महत्वपूर्ण बिंदु है और कई खतरों की चेतावनियां, जैसे बाढ़, तूफानों और अन्य बड़े खतरों के घटने से काफी पहले हमें उनका एक साथ समाधान करने के लिए सक्षम बनाती हैं.

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