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अर्थव्यवस्था

  • भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs)

    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) देश की जीडीपी का लगभग 8 फीसदी, विनिर्माण उत्पादन का 45 प्रतिशत और निर्यात में 40 प्रतिशत योगदान देते हैं। ये उद्योग कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाले हैं। ये उद्यमशीलता और नवीनता के लिए एक नर्सरी है। ये उद्यम देशभर में व्यापक रूप से फैले स्थानीय बाजारों की जरूरत को पूरा करते हैं। ये राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मूल्य की श्रृंखला को पूरा करने के लिए उत्पादों एवं सेवाओं की एक विविध रेंज का उत्पादन करते हैं। वर्तमान में एसएमई को एमएसएमई अधिनियम, 2006 के अनुसार परिभाषित किया जाता हैं।

    Apr 18, 2016
  • उदारीकरण से पहले औद्योगिक विकास और नीति

    आजादी के बाद पहली औद्योगिक नीति की घोषणा 6 अप्रैल 1948 को तत्कालीन केंद्रीय उद्योग मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा की गई थी। इस नीति ने भारत में मिश्रित और नियंत्रित अर्थव्यवस्था के लिए एक आधार की स्थापना की थी। नई औद्योगिक नीति के प्रारंभ होने से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था 3.5% की हिंदू वृद्धि दर में उलझ गई थी। देश का आर्थिक परिदृश्य कुछ इस प्रकार का हो गया था: राजकोषीय घाटा बढ़ रहा था, मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही थी और भुगतान संतुलन प्रतिकूल था। इसलिए अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति बहुत दयनीय हो गई थी।

    Apr 4, 2016
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति या स्वभाव

    आजादी के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था एक 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' रही है। भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' को सफल बनाने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार रहे हैं । भारतीय अर्थव्यवस्था, मूल रूप से सेवा क्षेत्र (वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद का 60% हिस्सा प्रदान करता है) के योगदान और कृषि (जनसंख्या के लगभग 53% लोग) पर निर्भर है । ज्यों-ज्यों समय बीत रहा है वैसे-वैसे अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी कम हो रही है तथा सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

    Apr 1, 2016
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)

    यह एक शीर्ष बैंकिग संस्था है जो कृषि और ग्रामीण विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराती है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना 12 जुलाई, 1982 को 100 करोड़ रूपये की प्रदत्त धनराशि के साथ की गई थी। 2010 में नाबार्ड की प्रदत्त राशि 2,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। यह ग्रामीण ऋण संरचना की एक शीर्ष संस्था है जो कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा हस्तशिल्प आदि को बढ़ावा देने के लिए ऋण उपलब्ध कराता है।

    Apr 1, 2016
  • वैश्विक गरीबी परिदृश्य

    गरीबी की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक परिभाषा के तहत यदि एक व्यक्ति की आय एक डॉलर/ दिन से कम है तो उस व्यक्ति को गरीबी रेखा से नीचे माना जाता है। इसकी गणना करते समय प्रत्येक देश की गरीबी की सीमा को ध्यान में रखा जाता है । प्रत्येक देश में गरीबी रेखा की गणना का आधार, एक वयस्क व्यक्ति को जीवित रहने के लिए आवश्यक वस्तुओं की जरूरत के आधार पर की जाती है और इसकी गणना डॉलर में की जाती है।अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा मूल रूप से 1 डॉलर प्रतिदिन विश्व बैंक द्वारा निर्धारित की गयी थी।

    Mar 30, 2016
  • भारत के कृषि श्रमिकों का अवलोकन

    कृषि मजदूर वह श्रमिक है, जो खेती से सम्बंधित कार्यों जैसे खेत जोतना ,फसल काटना, बागवानी करना, पशुओं को पालना, मधुमक्खियों और मुर्गी पालन के प्रबंधन और वन्य जीवन से जुडे कार्यों में लगा होता है। कृषि मजदूर असंगठित में क्षेत्र में आते हैं। भारत की लगभग 53% आबादी आज भी कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल है।

    Mar 25, 2016
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अवलोकन

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अर्थ सस्ती कीमतों पर खाद्य और खाद्यान्न वितरण के प्रबंधन की व्यवस्था करना है। गेहूं, चावल, चीनी और मिट्टी के तेल जैसे प्रमुख खाद्यान्नों को इस योजना के माध्यम से सार्वजनिक वितरण की दुकानों द्वारा पूरे देश में पहुंचाया जाता है। इस योजना का संचालन उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण के मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इस योजना का मुख्य मकसद सस्ती दरों पर देश के कमजोर वर्ग को खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।

    Mar 23, 2016
  • भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का अवलोकन

    जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है। इसकी लगभग 55% जनसंख्या इस क्षेत्र में कार्यरत है। कृषि का भारतीय अर्थव्यस्था के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14% योगदान है। लेकिन लगातार हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान घट रहा है। 1950 के दशक में हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 53% प्रतिशत होता था जो वर्तमान में करीब 14% रह गया है। देश में निर्यात के क्षेत्र में कृषि का 10% हिस्सा है। देश की 1.26 अरब आबादी की खाद्य सुरक्षा कृषि पर निर्भर है।

    Mar 23, 2016
  • 1991 की नयी आर्थिक नीति

    सारांश: जून 1991 में नरसिंह राव सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा प्रदान की । यह दिशा उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी मॉडल के रूप में जाना जाता है) के रूप में पूरे देश में आर्थिक सुधारों के रूप में लागू की गयी । इस नई औद्योगिक नीति के तहत सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों को प्रवेश करने की अनुमति दी, जो पहले केवल सरकारी क्षेत्रों के लिए आरक्षित थे। इस नई आर्थिक नीति को लागू करने के पीछे मुख्य कारण भुगतान संतुलन (BOP) का निरंतर नकारात्मक होना था।

    Mar 21, 2016
  • उदारीकरण से पहले भारत की पंचवर्षीय योजनाएं

    भारत में नियोजित आर्थिक विकास, पहली पंचवर्षीय योजना की स्थापना के साथ 1951 में शुरू हुआ था | पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कृषि की हालत को सुधारना था क्योंकि कृषि पूरी अर्थव्यस्था का आधार है | दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल पर आधारित) औद्योगिक विकास के लिए समर्पित थी | सन 1980 की अवधि तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5% के आसपास थी (जिसे प्रोफेसर राज्कृष्णा द्वारा हिंदू विकास दर का नाम दिया गया था गया था) |

    Mar 18, 2016
  • ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ भारत में क्या बदलाव लाएगा?

    ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ भारत सरकार का फ़्लैगशिप कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज व ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है| ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ की शुरुआत 1 जुलाई, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा की गयी थी| ‘डिजिटल इंडिया कार्यक्रम’ के तीन मुख्य घटक हैं- डिजिटल अवसंरचना का निर्माण करना, सेवाओं को डिजिटल रूप में प्रदान करना और डिजिटल साक्षरता |

    Mar 15, 2016
  • वाणिज्यिक बैंकों का संचालन: एक आलोचनात्मक समीक्षा

    वाणिज्यिक बैंक( वर्तमान में 27) देश की वित्तीय संस्थान प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा हैं । वाणिज्यिक बैंक वे लाभ कमाने वाले संस्थान हैं जो आम जनता से धन स्वीकार करते हैं और घरेलू, उद्यमियों, व्यवसायियों आदि जैसे व्यक्तियों को पैसे(ऋण) देते हैं | इन बैंकों का मुख्य उद्देश्य ब्याज, कमीशन आदि के रूप में लाभ कमाना है | इन सभी वाणिज्यिक बैंकों के कार्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित किये जाते है, जोकि एक केंद्रीय बैंक है तथा भारत में सर्वोच्च वित्तीय नियोग है |

    Mar 11, 2016
  • उदारीकरण के बाद की पंचवर्षीय योजनायें

    योजना आयोग की स्थापना भारत सरकार के एक संकल्प के द्वारा मार्च, 1950 में की गयी थी । भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की जिम्मेदारी पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित थी, जिसे योजना आयोग (प्रधानमन्त्री इसका पदेन अध्यक्ष होता हैं) द्वारा विकसित, निष्पादित तथा जांचा जाता है | अब योजना आयोग को नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान ) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अब तक 12 पंचवर्षीय योजनाओं को योजना आयोग द्वारा आरम्भ किया गया है। किसी भी पंचवर्षीय योजना को अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा दी जाती है।

    Mar 11, 2016
  • भारत में हरित क्रांति

    सरकार ने 1960 में सात राज्यों से चयनित सात जिलों में एक गहन विकास कार्यक्रम आरम्भ किया और इस कार्यक्रम को गहन क्षेत्र विकास कार्यक्रम (IADP) का नाम दिया गया, जिसे बाद में भारत की हरित क्रांति के रूप में परिभाषित किया गया था | हरित क्रांति से गेहूं, चावल और ज्वार के उत्पादन में लगभग 2 से 3 गुना की वृद्धि हुई। एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है।

    Mar 8, 2016
  • मानव विकास सूचकांक क्या है

    मानव विकास सूचकांक (HDI) जीवन प्रत्याशा, शिक्षा, और आय सूचकांकों का एक संयुक्त सांख्यिकी सूचकांक है जिसे मानव विकास के तीन आधारों द्वारा तैयार किया जाता है । इसे अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक द्वारा बनाया गया था, जिसका 1990 में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा समर्थन किया गया, और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित किया गया । UNDP ने मानव विकास सूचकांक की गणना के लिए एक नई विधि की शुरुआत की है। निम्नलिखित तीन सूचकांक इस्तेमाल किये जा रहे हैं:1. जीवन प्रत्याशा सूचकांक (लम्बा व स्वस्थ जीवन)2. शिक्षा सूचकांक (शिक्षा का स्तर)3. आय सूचकांक (जीवन स्तर)

    Mar 8, 2016