View in English

आधुनिक भारत

  • पानीपत की लड़ाई किसके बीच और कब हुई?

    पानीपत की लड़ाइयों का भारत में अपना ही इतिहास और महत्व है. क्या आप जानते हैं कि पानीपत की लड़ाईयां किसके बीच हुईं और कब? आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

    Dec 27, 2019
  • शहीद भगत सिंह ने क्यों कहा कि "मैं नास्तिक हूँ"

    भगत सिंह का जन्म सितम्बर 1907 में पंजाब में हुआ था और सैंडर्स की हत्या के आरोप में दोषी पाये जाने के कारण 23 मार्च 1931 को उन्हें लाहौर के सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गयी थी | उन्होंने 5,6 अक्टूबर 1931 को लाहौर के सेंट्रल जेल से एक धार्मिक आदमी को जवाब देने के लिये एक निबंध लिखा था जिसने उनके ऊपर नास्तिक होने का आरोप लगाया था |  भगत सिंह की उम्र उस समय 23 वर्ष की थी|

    Aug 14, 2019
  • चन्द्रशेखर आज़ाद से सम्बंधित 9 अनजाने एवं रोचक तथ्य

    चन्द्रशेखर आज़ाद को कौन नहीं जानता, वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है लेकिन उनके जीवन के बारे में जानना अपने आप में रोचक तथा ज्ञानवर्धक जानकारी है| चन्द्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा में हुआ था जबकि उनकी मृत्यु 27 फरवरी 1931 को इलाहबाद के अल्फ्रेड पार्क में हुई थी| इस लेख में हम चन्द्रशेखर आज़ाद की पुण्यतिथि के अवसर पर उनसे सम्बंधित 9 अनजाने एवं रोचक तथ्यों का विवरण दे रहें हैं|

    Aug 14, 2019
  • जानें भारत ‌- पाकिस्तान के बीच कितने युद्ध हुए और उनके क्या कारण थे

    वर्ष 1947 में ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद भारत से अलग कर पाकिस्तान बनाया गया था । भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की श्रृंखला को भारत– पाकिस्तान युद्ध का नाम दिया जाता है । सबसे हिंसक युद्ध 1947-48, 1965, 1971 और 1999 में हुए। युद्ध के अन्य कई कारणों में सीमा विवाद, कश्मीर समस्या, जल विवाद और आतंकवाद के मुद्दे पर विवाद रहे हैं।

    Aug 14, 2019
  • भारत छोड़ो आंदोलन क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

    एक लम्बे समय तक भारतवर्ष अंग्रेजों के आधीन रहा है. भारत को आजाद कराने में कई क्रांतिकारियों ने अपनी जान गवाई है और इसके लिए कई प्रकार कि क्रांतियाँ भी हुई हैं। जिनमे से एक है "भारत छोड़ो आन्दोलन". आइये जानते हैं भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में। 

    Aug 8, 2019
  • ईश्वरचंद विद्यासागर: विधवा पुनर्विवाह के प्रवर्तक

    सामाजिक सुधार आन्दोलन, जो देश के सभी भागों और सभी धर्मों तक विस्तृत था, वास्तव में धार्मिक सुधार आन्दोलन भी था| महान विद्वान और सुधारक ईश्वर चंद विद्यासागर के विचारों में भारतीय और पश्चिमी मूल्यों का सुन्दर समन्वय था| वे उच्च नैतिक मूल्यों में विश्वास करते थे और निर्धनों के प्रति उदार भाव से सम्पन्न एक महान मानववादी विचारक थे| उनकी महान शिक्षाओं के लिए कलकत्ता के संस्कृत कॉलेज,जिसके वे कुछ वर्षों के लिए प्रिंसिपल रहे थे, ने उन्हें ‘विद्यासागर’ की उपाधि प्रदान की थी.

    May 15, 2019
  • उत्तर पूर्व भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची

    Mar 26, 2019
  • प्रसिद्ध भारतीय हस्तियाँ जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं

    दुनिया में कई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं जो अपने जीवनकाल में ही वह प्रतिष्ठा और ख्याति प्राप्त कर लेते हैं, जो मरने के बाद भी कई व्यक्तियों को नसीब नहीं होती है। इन्हीं प्रसिद्धियों में से एक है- किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर डाक टिकट जारी होना। भारत में भी कई ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी किए गए हैं। इस लेख में हम उन प्रसिद्ध भारतीय हस्तियों का विवरण दे रहे हैं जिनके नाम पर उनके जीवनकाल में ही डाक टिकट जारी हुए हैं।

    Mar 15, 2019
  • भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास

    स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। इस लेख में हम भारत में छात्र आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास दे रहे हैं जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

    Feb 27, 2019
  • मैसूर राज्य का इतिहास

    विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद, 1565 ई। में हिन्दू वोडियार वंश द्वारा मैसूर राज्य को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। वोडियार वंश के अंतिम शासक चिक्का कृष्णराज द्वितीय के शासनकाल में वास्तविक सत्ता देवराज(दलवाई या सेनापति) और नंजराज (सर्वाधिकारी या वित्त एवं राजस्व नियंत्रक) के हाथों में आ गयी थी।ये क्षेत्र पेशवा और निज़ाम के बीच विवाद का विषय बन गया था।1761 ई. में हैदर अली ,जिसने अपने जीवन की शुरुआत एक सैनिक के रूप में की थी,ने मैसूर के राजवंश को हटाकर  राज्य पर अपना कब्ज़ा कायम कर लिया।

    Nov 9, 2018
  • जानें भारत में अंग्रेजों की सफलता के क्या-क्या कारण थे?

    18वीं शताब्दी के मध्य में, भारत वास्तव में चराहे पर खड़ा था। इस विभिन्य ऐतिहासिक शक्तियां गतिशील थी, जिसके परिणामस्वरुप देश एक नई दिशा की ओर उन्मुख हुआ। कुछ इतिहासकार इसे 1740 का वर्ष मानते हैं, जब भारत में सर्वोच्चता के लिए आंग्ल-फ़्रांसीसी संघर्ष की शुरुवात हुई थी। इस लेख में हमने बताया है की कौन-कौन से कारणों की वजह से अंग्रेजो को भारत में सफलता मिली जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

    Sep 14, 2018
  • भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचनों और नारों की सूची

    भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात हुई परिस्थितयों से निपटने के लिए, भारत के रहनुमाओं ने समय-समय पर अपने आवाज़ बुलंद किया है और विभिन्न नारों तथा वचनों की मदद से भारतियों में आत्मविश्वास भरा है। इस लेख में हमने भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचनों और नारों को सूचीबद्ध किया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

    Sep 12, 2018
  • भारत के ऐसे जिले जिन्हें भारत के साथ स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हुई थी.

    भारत को ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी. उस समय सम्पूर्ण भारत में हर्ष और उल्लास था. लेकिन इस तथ्य को भी नहीं भुलाया जा सकता है कि भारत को विभाजन से गुजरना पड़ा था. इस दौरान लोगों ने बहुत कुछ झेला था. क्या आप जानते हैं कि भारत में ऐसे भी जिले थे जिन्हें भारत के साथ स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हुई थी. इसके पीछे क्या कारण था. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

    Sep 10, 2018
  • स्वतंत्रता से पहले और बाद में भारतीय रेलवे का तुलनात्मक विवरण

    भारतीय रेलवे सम्पूर्ण भारत में लगभग हर लोगों के जीवन को छू रहा है. यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है जो करीब 7651 मिलियन यात्रियों का परिवहन कर रहा है. परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में रलवे की शुरुआत कब से हुई, कैसे हुई और स्वतंत्रता से पहले और बाद में भारतीय रेलवे का कितना विकास हुआ इत्यादि. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

    Aug 29, 2018
  • जाने पुर्तगालियों के व्यापारिक घटनाक्रम के बारे में

    1579 ईस्वी में शासकीय फरमान के आधार पर पुर्तगालियों को नदी के तट तक सिमित कर दिया गया जो बंगाल में सतगाँव से थोड़ी दुरी पर था और वहां से वे व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित करते थे। विभिन्य वर्षों के दौरान, उन्होंने बड़े भवनों के निर्माण द्वारा अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी जिसने उनके व्यापार को सतगाँव से नये पतन हुगली की ओर प्रवासित किया। इस लेख में हमने पुर्तगालियों का व्यापारिक घटनाक्रम के बारे में बताया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

    Aug 14, 2018

Just Now