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कला एवं संस्कृति

  • भारत में सबसे अधिक प्रसिद्ध 10 उत्तम मार्शल आर्ट्स

    भारत विविध संस्कृति और जातियों का देश है और इसलिए भारत अपने प्राचीन काल से ही विकसित मार्शल आर्ट के लिए प्रसिद्ध है। आजकल इन कला के रूपों का कई अनुष्ठानो में उपयोग किया जाता है जैसे शास्रविधि समारोह में, खेल में, शारीरिक योग्यता के लिए आत्म रक्षा के रूप में आदि लेकिन इससे पहले इन कलाओं का युद्ध के लिए प्रयोग किया जाता था । कई कला नृत्य, योग आदि करने से संबंधित हैं।

    Jul 6, 2016
  • क्या आप एलीफेंटा गुफाओं के बारे में ये रोचक तथ्य जानना चाहेंगे ?

    एलीफेंटा की गुफाएं (स्थानीय भाषा में इन्हें घारापुरीची लेनी के रूप में भी जाना है, मूल रूप घारापुरी) महाराष्ट्र के एलिफेंटा द्वीप या घारापुरी (मुंबई) में स्थित मूर्ति गुफाओं का एक नेटवर्क (शाब्दिक अर्थ "गुफाओं के शहर") है। यह द्वीप अरब सागर के किनारे स्थित है जहां गुफाओं के दो समूह हैं, पहला- पांच हिंदू गुफाओं का एक बड़ा समूह है, दूसरा- दो बौद्ध गुफाओं का एक छोटा समूह है। हिंदू गुफाओं में चट्टानों में पत्थर की मूर्तियां बनी हैं।

    Jun 29, 2016
  • जल महल अद्वितीय क्यों ?: 10 तथ्य एक नज़र में

    शब्द "जल महल" का मतलब है "पानी का किला" ,जो कि जयपुर में स्तिथ है। इसका निर्माण 1750 वीं सदी में आमेर के महाराजा जयसिंह द्वितीय द्वारा ठीक आम सागर के बीचों-बीच किया गया था । यह लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। यह "'जल महल" राजपूत और मुग़ल शैली की वास्तुकला का एक नायब सयोंजन है। यह एक पांच मंजिला इमारत है। जब झील के पानी से भर जाती है तब इसकी चार मंज़िले पानी से डूब जाती है और फिर केवल शीर्ष मज़िल दिखाई पड़ती है।

    Jun 29, 2016
  • दशहरा: अच्छाई की बुराई पर विजय

    इस पर्व का मुख्य उद्देश्य अच्छाई की बुराई तथा सत्य की असत्य पर विजय को दर्शाना है I

    Sep 29, 2014
  • विश्व की भाषायें

    दुनिया की कितनी भाषाएं हैं इसका ठीक ठीक उत्तर देना संभव नहीं है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में कुल भाषाओं की संख्या 6809 है, इनमें से 90 फीसदी भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 1 लाख से भी कम है। लगभग 200 से 150 भाषाएं बोलने वालों की संख्या 10 लाख से अधिक है जबकि लगभग 357 भाषाएं बोलने वालों की संख्या मात्र 50 और 46 भाषाएं बोलने वालों की संख्या मात्र 1 है।

    Jul 22, 2011
  • पश्चिमी चित्रकला

    27000-13000 ई.पू. में दक्षिण-पश्चिम यूरोप में गुफा कला के द्वारा तत्कालीन मानव ने अपने जीवन का चित्रण किया। अफ्रीकी कला, इस्लामिक कला, भारतीय कला, चीनी कला और जापानी कला- इन सभी का पूरा प्रभाव पश्चिमी चित्रकला पर पड़ा है।

    Jul 22, 2011
  • भारतीय चित्रकला

    भारतीय चित्रकारी के प्रारंभिक उदाहरण प्रागैतिहासिक काल के हैं, जब मानव गुफाओं की दीवारों पर चित्रकारी किया करता था। भीमबेटका की गुफाओं में की गई चित्रकारी 5500 ई.पू. से भी ज्यादा पुरानी है। 7वीं शताब्दी में अजंता और एलोरा गुफाओं की चित्रकारी भारतीय चित्रकारी का सर्वोत्तम उदाहरण हैं।

    Jul 22, 2011
  • पश्चिमी नृत्य कला

    पश्चिमी नृत्य कला का इतिहास उसकी प्राचीन संस्कृति में निहित है। पश्चिमी देशों में पोलैण्ड, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, चेक व स्लोवाकिया, रूस इत्यादि शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी एक विशिष्ट नृत्य शैली है। विभिन्न संस्कृतियों के मिलन से भी नई नृत्य शैलियों का उद्भव व विकास हुआ है| आधुनिक पश्चिमी नृत्यों में कैनकैन, टैप और जैज डांस, फ्री फॉर्म एवं रॉक एंड रोल अथवा ट्विस्ट प्रमुख हैं।

    Jul 22, 2011
  • भारतीय नृत्य कला

    भारत में नृत्य की परंपरा प्राचीन समय से रही है| हड़प्पा सभ्यता की खुदाई से नृत्य करती हुई लड़की की मूर्ति पाई गई है, जिससे साबित होता है कि उस काल में भी नृत्यकला का विकास हो चुका था| भरत मुनि का नाट्य शास्त्र भारतीय नृत्यकला का सबसे प्रथम व प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है| इसको पंचवेद भी कहा जाता है|

    Jul 22, 2011
  • भारतीय शास्त्रीय संगीत

    भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में संगीत के बारे में गहराई से चर्चा की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत गहरे तक आध्यात्मिकता से प्रभावित रहा है, इसलिए इसकी शुरुआत मनुष्य जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति के साधन के रूप में हुई। संगीत की महत्ता इस बात से भी स्पष्ट है कि भारतीय आचार्र्यों ने इसे पंचम वेद या गंधर्व वेद की संज्ञा दी है। भरत मुनि का नाट्यशास्त्र पहला ऐसा ग्रंथ था जिसमें नाटक, नृत्य और संगीत के मूल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है।

    Jul 22, 2011
  • गुफा स्थापत्य

    भारत में सर्वप्रथम मानव निर्मित गुफाओं का निर्माण दूसरी शताब्दी ई.पू. के आसपास हुआ था।अजंता की गुफा: अजंता की गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित हैं। इनका सर्वप्रथम जिक्र चीनी तीर्थयात्री ह्वेन सांग ने भी किया था।

    Jul 22, 2011
  • भारतीय स्थापत्य कला और मूर्तिकला

    भारत में स्थापत्य व वास्तुकला की उत्पत्ति हड़प्पा काल से माना जाता है। स्थापत्य व वास्तुकला के दृष्टिकोण से हड़प्पा संस्कृति तत्कालीन संस्कृतियों से काफी ज्यादा आगे थी। भारतीय स्थापत्य एवं वास्तुकला की सबसे खास बात यह है कि इतने लंबे समय के बावजूद इसमें एक निरंतरता के दर्शन मिलते हैं। इस मामले में भारतीय संस्कृति अन्य संस्कृतियों से इतर है।

    Jul 22, 2011
  • आधुनिक काल

    यूरोपीय स्थापत्य कला में 1900 के आसपास का समय भारी परिवर्तन का युग था। इस काल के दौरान कई ऐसी इमारतों का निर्माण किया गया जिसकी विशेषताएं समान थीं। इन निर्माणों में रूप-रंग में सरलता के दर्शन होते हैं और अलंकरण भी नाम-मात्र का है।

    Jul 22, 2011
  • मध्यकालीन पश्चिमी स्थापत्य कला

    प्रारंभिक मध्यकाल के दौरान पश्चिमी स्थापत्य कला को प्रारंभिक ईसाई काल व पूर्व-रोमांसक्यू काल में विभाजित किया जा सकता है। इस काल के दौरान दुर्ग मुख्य रूप से लौकिक स्थापत्य के प्रमुख उदाहरण हैं।

    Jul 22, 2011
  • पश्चिमी स्थापत्य एवं मूर्तिकला

    ग्रीक स्थापत्य व मूर्तिकला- ग्रीक संस्कृति की सबसे खास बात यह थी कि कला व संस्कृति में उसकी दृष्टि काफी हद तक लौकिक थी। उनकी इसी सोच का पूरी तरह से प्रभाव उनके स्थापत्य व मूर्तिकला में परिलक्षित होता है। रोमन शैली- प्राचीनकाल में रोमन साम्राज्य काफी विशाल था। इस साम्राज्य की विशालता की झलक उसके विशाल भवनों में देखा जा सकता है। रोमन वास्तुशिल्पियों ने सर्वप्रथम चापाकार निर्माण अद्र्ध वृत्ताकार मेहराब का प्रयोग किया।

    Jul 22, 2011