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क्षेत्रीय राज्यों का उदय और यूरोपीय शक्ति

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अंग्रेज उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
अंग्रेजों का भारत आगमन और ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना का प्रमुख कारण पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा भारत में अपनी वस्तुओं को बेचने से होने वाला अत्यधिक लाभ था जिसने ब्रिटिश व्यापारियों को भारत के साथ व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित किया । 31 दिसंबर, 1600 ई. को कंपनी ने महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम से शाही चार्टर प्राप्त किया,जिसने कंपनी को पूर्व के साथ व्यापार करने के लिए अधिकृत कर दिया। 1608 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी ने शाही संरक्षण प्राप्त करने के लिए कैप्टन हॉकिन्स को मुग़ल शासक जहाँगीर के दरबार में भेजा था ।

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फ्रांसीसी उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
भारत आने वाले अंतिम यूरोपीय व्यापारी फ्रांसीसी थे। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 ई में लुई सोलहवें के शासनकाल में भारत के साथ व्यापार करने के उद्देश्य से की गयी थी। फ्रांसीसियों ने 1668 ई में सूरत में पहली फैक्ट्री स्थापित की और 1669 ई में मसुलिपत्तनम में एक और फैक्ट्री स्थापित की।1673 ई में बंगाल के मुग़ल सूबेदार ने फ्रांसीसियों को चन्द्रनगर में बस्ती बनाने की अनुमति प्रदान कर दी।

डच उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
हॉलैंड (वर्त्तमान नीदरलैंड) के निवासी डच कहलाते है। पुर्तगालियो के बाद डचों ने भारत में अपने कदम रखे। ऐतिहासिक दृष्टि से डच समुद्री व्यापार में निपुण थे। 1602 ईमें नीदरलैंड की यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की गयी और डच सरकार द्वारा उसे भारत सहित ईस्ट इंडिया के साथ व्यापार करने की अनुमति प्रदान की गयी। 1605 ईमें डचों ने आंध्र प्रदेश के मुसलीपत्तनम में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की। बाद में उन्होंने भारत के अन्य भागों में भी अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किये।

पुर्तगाली उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
पुर्तगाली पहले यूरोपीय थे जिन्होंने भारत तक सीधे समुद्री मार्ग की खोज की। 20 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा कालीकट पहुंचा, जो दक्षिण-पश्चिम भारत में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है । 1505 ई में फ्रांसिस्को दे अल्मीडा को भारत का पहला पुर्तगाली गवर्नर बनाया गया। उसकी नीतियों को ब्लू वाटर पालिसी कहा जाता था क्योकि उनका मुख्या उद्देश्य हिन्द महासागर को नियंत्रित करना था। पुर्तगालियों ने 1556 ई.में गोवा में भारत की पहली प्रिंटिग प्रेस की स्थापना की थी।

जाट

Nov 4, 2015
मुग़ल शासक औरंगजेब के विरुद्ध विद्रोह करने के बाद 17 वीं सदी में शक्तिशाली भरतपुर राज्य की स्थापना के साथ जाट राज्य अस्तित्व में आया। विद्रोही मुख्यतः हरियाणा,पंजाब और गंगा दोआब के पश्चिमी भाग के ग्रामीण इलाकों में केन्द्रित थे और पूर्वी क्षेत्र में अनेक छोटे छोटे राज्य मिलते थे। ये प्राचीन व मध्यकालीन कृषक के साथ साथ महान योद्धा भी थे जिन्हें हिन्दू और मुस्लिम शासकों द्वारा सैनिक के रूप भर्ती किया गया था।

हैदराबाद

Nov 4, 2015
हैदराबाद के इतिहास का निर्माण अनेक राज्यों व शासकों जैसे-चालुक्य वंश ,काकतीय वंश ,दिल्ली सल्तनत,बहमनी सल्तनत, विजयनगर साम्राज्य ,निज़ामों और अंग्रेजों के द्वारा हुआ है।इसी कारण उसका इतिहास अत्यधिक विविधतापूर्ण है। मुग़ल बादशाह द्वारा चिनकिलिच खां को निज़ाम-उल-मुल्क की उपाधि प्रदान की गयी और दक्कन का गवर्नर बना दिया गया । 1722 ई.में उसे मुग़ल साम्राज्य का वजीर नियुक्त किया गया लेकिन उसके तुरंत बाद वह दक्कन लौट गया और उस क्षेत्र पर अपनी पकड़ को मजबूत किया । उसके उत्तराधिकारी हैदराबाद के निज़ाम कहलाये।

बंगाल

Nov 4, 2015
औरंगजेब द्वारा मुर्शिद कुली खां को बंगाल का दीवान नियुक्त किया गया था। गवर्नर मुर्शिद कुली खां (1717-1727 ई.) ने बंगाल की राजधानी ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित कर दी। उसने अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजस्व वसूली को रोककर अपने राज्य के हितों की रक्षा का प्रयास किया। सिराज-उद-दौला ने कलकत्ता में अंग्रेजों को अपनी फैक्ट्रियों की किलेबंदी करने से रोका लेकिन अंग्रेजों द्वारा उसके आदेश को न मानने के परिणामस्वरूप अंग्रेजों और सिराज-उद-दौला के मध्य प्लासी का युद्ध लड़ा गया।

अवध

Nov 4, 2015
अवध उत्तर भारत का ऐतिहासिक क्षेत्र था, जिसमे वर्त्तमान उत्तर प्रदेश का उत्तर पूर्वी भाग शामिल था। प्राचीन कोसल प्रदेश के नाम की राजधानी अयोध्या के नाम पर इसका नाम अवध पड़ा था। सोलहवीं सदी में यह मुग़ल साम्राज्य का हिस्सा बन गया और 1856 ई. में इसे ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। 1722 ई. में,मुग़ल बादशाह मुहमदशाह द्वारा फारस के शिया सादत खां को अवध का सूबेदार बनाये जाने के बाद अवध सूबे को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया।

मैसूर

Nov 4, 2015
विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद, 1565 ई। में हिन्दू वोडियार वंश द्वारा मैसूर राज्य को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया गया। वोडियार वंश के अंतिम शासक चिक्का कृष्णराज द्वितीय के शासनकाल में वास्तविक सत्ता देवराज(दलवाई या सेनापति) और नंजराज (सर्वाधिकारी या वित्त एवं राजस्व नियंत्रक) के हाथों में आ गयी थी।ये क्षेत्र पेशवा और निज़ाम के बीच विवाद का विषय बन गया था।1761 ई. में हैदर अली ,जिसने अपने जीवन की शुरुआत एक सैनिक के रूप में की थी,ने मैसूर के राजवंश को हटाकर राज्य पर अपना कब्ज़ा कायम कर लिया।

राजपूत

Nov 4, 2015
राजपूतों ने औरंगजेब की नीतियों से नाखुश होकर अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।मुग़ल साम्राज्य के टूटने से संपूर्ण भारत की राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल गयीं ।इन बदलती परिस्थितियों के कारण पूरे भारत के राजनीतिक,आर्थिक और सैन्य गठबंधनों में आमूल-चूल बदलाव आ गया। जोधपुर और जयपुर के राजाओं ने उत्तरवर्ती मुगलों के काल में मुग़ल साम्राज्य के काफी बड़े हिस्से को अपने प्रभाव में ले लिया। औरंगजेब की मृत्यु के बाद जोधपुर और जयपुर के राजा दिल्ली की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाने लगे।

पंजाब

Nov 4, 2015
18 वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य के विघटन और पतन का पूर्व में अधीन किये गए राजाओं और उन क्षेत्रीय नेताओं द्वारा स्वागत किया गया जो अपना खुद का एक राज्य निर्मित करना चाहते थे।पंजाब एक ऐसा ही क्षेत्र था जिसका मुग़ल साम्राज्य के कमजोर पड़ने के बाद उदय हुआ।दसवें एवं अंतिम गुरु गुरु गोविन्द सिंह, सिक्खों को एक लड़ाकू समूह के रूप में संगठित तो कर दिया था लेकिन औरंगजेब के शासनकाल तक वे कोई भी राज्य प्राप्त करने में सफल न हो सके।
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