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गुप्ता के बाद युग

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भारतीय प्रायद्वीप में गुप्त के बाद के राजवंश

Sep 4, 2015
5वीं शताब्दी के अंत के दौरान गुप्त साम्राज्य का बिखराव शुरू हो गया था। शाही गुप्तों के समाप्त होने के साथ-साथ मगध और इसकी राजधानी पाटलिपुत्र ने भी अपना महत्व खो दिया था। इसलिए, गुप्त काल के बाद की अवधि प्राकृतिक लिहाज से बहुत अशांत थी। गुप्तों के पतन के बाद उत्तर भारत में पांच प्रमुख शक्तियां फैल गयी थी। ये शक्तियां थी: हूण, मौखरि, मैत्रक, पुष्यभूति, गौड।

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दिल्ली सल्तनत : गुलाम वंश का शासन (1206A . D. -1290 A . D .)

Sep 2, 2015
कुतब-उद-दीन ऐबक, मुहम्मद गौरी के सिपाहसालार के साथ उसका ग़ुलाम भी था | कुतब -उद-दीन ऐबक का जन्म मध्य एशिया के तुर्क परिवार में हुआ था और उसे बचपन में ही ग़ुलाम के तौर पर बेच दिया गया था | इल्तुत्मिश, कुतब-उद-दीन ऐबक ( 1206-11) का उत्तराधिकारी बना जिसके बाद रज़िया (1236-40) और बलबन (1265-85) ने राजभार संभाला | कुतब-उद-दीन ऐबक ने क़ुतुब मीनार की नींव रखी परंतु इल्तुत्मिश ने इसे पूरा किया |

चोल साम्राज्य ( 9वीं सदी A D से 12वीं सदी A D तक) : बाद के चोल

Sep 2, 2015
बाद के चोल का युग 1070 A D से 1279 A D तक रहा | इस समय तक चोल साम्राज्य ने अपने मुकाम को पा लिया था और विश्व का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बन गया था | चोलाओं ने दक्षिण पूर्वी एशियन देशों पर कब्ज़ा कर लिया और इस समय इनके पास विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना और जल सेना थीं |

चोल साम्राज्य (9वीं सदी A D से 12वीं सदी A D तक) : मध्यकालीन चोल

Sep 2, 2015
चोलाओं ने अपनी शक्तियों को 845 A D में पुनर्जीवित किया और उनका शासन तृतीय सदी A D से 9वीं सदी A D के लंबे ठहराव के बाद पुनः स्थापित हुआ | विजयालय चोल प्रथम मध्यकालीन चोल शासक था जिसे चोल राज्य के पुनः स्थापना का श्रेय जाता है | उसकी अपनी राजधानी थंजौर में थी | विजयालय पललवाओं का सामंत था | इसने पादुकोट्टई मे सोलेस्वरा मंदिर का निर्माण किया | चोलाओं ने अपनी शक्तियों को 845 A D में पुनर्जीवित किया और उनका शासन तृतीय सदी A D से 9वीं सदी A D के लंबे ठहराव के बाद पुनः स्थापित हुआ |

कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष

Aug 31, 2015
8वीं सदी के दौरान, कन्नौज पर नियंत्रण के लिए भारत के तीन प्रमुख साम्राज्यों जिनके नाम पालों, प्रतिहार और राष्ट्रकूट थे, के बीच संघर्ष हुआ। पालों का भारत के पूर्वी भागों पर शासन था जबकि प्रतिहार के नियंत्रण में पश्चिमी भारत (अवंती-जालौर क्षेत्र) था। राष्ट्रकूटों ने भारत के डक्कन क्षेत्र पर शासन किया था। इन तीन राजवंशों के बीच कन्नौज पर नियंत्रण के लिए हुए संघर्ष को भारतीय इतिहास में त्रिपक्षीय संघर्ष के रूप में जाना जाता है।

गुप्त काल के बाद आर्थिक, सामाजिक जीवन और मंदिर वास्तुकला

Aug 31, 2015
गुप्ताओं के पतन के बाद, उनके गृह प्रांतों में शासकों की एक लंबी लाइन लग गयी थी। एक को छोडकर इन सभी के नामों के अंत में गुप्त आता था। इसलिए यह परिवार इतिहास में “मगध के शासन के बाद गुप्त” के नाम से जाना जाता है। यह तय कर लेना कि वे किसी भी तरह से शाही गुप्त के साथ जुड़े हुए थे, संभव नहीं था। गुप्त काल के बाद उत्तरी भारत में कुछ महत्वपूर्ण राजवंश उत्पन्न हुए। जैसे-कन्नौज के मौखरी, कामरूप के वर्मन, थानेश्वर के पुष्यभूति आदि।

चोल, चेरा और पाण्ड्या राजवंश

Aug 19, 2015
तमिल देश पर संगम काल के समय में चेरा, चोल व पाण्ड्या नामक तीन राजवंश द्वारा शासन किया गया | चेरा राजवंश ने दो विभिन्न कालों में शासन किया | प्रथम चेरा राजवंश ने संगम काल में शासन किया जबकि द्वितीय चेरा राजवंश ने 9वीं शताब्दी A D के आगे शासन किया |संगम काल के चोल राज्य का विस्तार आधुनिक तिरुचि जिले से आंध्र प्रदेश तक हुआ |तमिल नाडु में स्थित पाण्ड्या राज्य ने लगभग 6वीं शताब्दी B C के दौरान राज किया और लगभग 15वीं शताब्दी A D में समाप्त हो गया |

चोल साम्राज्य ( 9वीं सदी A D से 12वीं सदी A D तक) : बाद के चोल

Aug 19, 2015
बाद के चोल का युग 1070 A D से 1279 A D तक रहा | इस समय तक चोल साम्राज्य ने अपने मुकाम को पा लिया था और विश्व का सबसे शक्तिशाली देश बन गया था | चोलाओं ने दक्षिण पूर्वी एशियन देशों पर कब्ज़ा कर लिया और इस समय इनके पास विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना और जल सेना थीं |
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