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पर्यावरण और पारिस्थितिकीय

  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन : कारण और परिणाम

    कोई भी गैस जो सूर्य से आने वाले लघुतरंगीय विकिरण को तो पृथ्वी पर आने देती है, लेकिन पृथ्वी से वापस जाने वाले दीर्घतरंगीय विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी के तापमान को बढ़ा देती है, ग्रीनहाउस गैस कहलाती है | वर्तमान में मानवीय कारणों से वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की बढ़ती मात्रा वैश्विक तापन व जलवायु परिवर्तन का कारण बन गयी है |

    Feb 23, 2016
  • पर्यावरण प्रदूषण : अर्थ, प्रकार, प्रभाव, कारण तथा रोकने के उपाय

    पर्यावरण के किसी भी घटक में होने वाला अवांछनीय परिवर्तन, जिससे जीव जगत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, प्रदूषण कहलाता है। पर्यावरण प्रदूषण में मानव की विकास प्रक्रिया, औद्योगिकीकरण तथा नगरीकरण आदि का महत्वपूर्ण योगदान है। पर्यावरणीय घटकों के आधार पर पर्यावरणीय प्रदूषण को भी ध्वनि, जल, वायु एवं मृदा प्रदूषण आदि में बाँटा जाता है |

    Feb 19, 2016
  • मृदा प्रदूषण

    एक सामान्य अर्थ मे, मिट्टी मे जहरीले रसायनो (प्रदूषक या दूषित पदार्थ) का उच्च सांद्रता मे पाया जाना (जो मानव स्वास्थ्य के लिए और / या पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक हो), मृदा प्रदूषण कहलाता है। इसके अतिरिक्त, जब मिट्टी मे दूषित पदार्थो का स्तर जोखिम भरा नहीं होता है, फिर भी मिट्टी मे प्राकृतिक रूप से उपस्थित दूषित पदार्थो (मिट्टी मे प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले दूषित पदार्थो के मामले मे) के स्तर मे वृद्धि के कारण मृदा प्रदूषण आसानी से उत्पन्न हो सकता है।

    Jan 4, 2016
  • ओज़ोन परत अवक्षय (ह्रास)

    समताप मण्डल मे ओज़ोन की मात्रा मे अवक्षय (कमी) ही ओज़ोन परत अवक्षय / ह्रास / रिक्तिकरण है। अवक्षय तब प्रारम्भ होता है जब सीएफ़एस गैसे समताप मण्डल मे प्रवेश करती है। सूर्य से निकलने वाले परबैगनी (अल्ट्रा वायलेट) किरणें (सीएफ़एस गैसों) ओज़ोन पर्त को खंडित करता है। खंडन की इस प्रक्रिया के द्वारा क्लोरिन परमाणु का उत्सर्जन होता है। क्लोरिन परमाणु ओज़ोन से क्रिया करती है जिससे एक रसायन चक्र प्रारम्भ होता है जो उस क्षेत्र मे ओज़ोन की अच्छी परत को नष्ट कर देता है।

    Jan 4, 2016
  • वातावरण का गैसीय चक्र

    वातावरण मे गैसों के होने की वजह से पृथ्वी पर जीवन संभव हो सकता है। पौधो और वृक्षो को कार्बनडाई आक्साइड से जीवन मिलता है और वृक्ष मनुष्य को जीवन प्रदान करते है। इस तरह से दोनों एक दूसरे पर निर्भर है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिती मे पौधे अपनी पत्तियों के माध्यम से वातावरण से कार्बनडाई आक्साइड ग्रहण करते है। पौधे अपनी जड़ के द्वारा मृदा से सोखे गए पानी को कार्बनडाई आक्साइड से मिलाते है और अपना भोजन बनाते है।

    Dec 30, 2015
  • पारिस्थितिकी का अर्थ

    पारिस्थितिकी को जीव विज्ञान की शाखा के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है जो जीवो के एक दूसरे के साथ संबंधो और उनके भौतिक परिवेशो की चर्चा करता है। इसे जीवो के मध्य अन्तः क्रिया और उनके परिवेश के वैज्ञानिक अध्ययन के रूप मे भी परिभाषित किया जा सकता है। पारिस्थितिकी शब्द का वास्तविक अर्थ “घर का अध्ययन” है। पारिस्थितिकी एक बहुआयामी विज्ञान है एवं विज्ञान की अन्य शाखाओ जैसे भूगोल, भूविज्ञान, मौसम विज्ञान, भूतत्व, भौतिकी और रसायन विज्ञान के साथ इसका संबंध है।

    Dec 29, 2015
  • पर्यावरण के क्षेत्र मे गैर सरकारी संगठन और वकालत संस्थान

    हमारे देश मे कई सरकारी और गैर सरकारी संगठनो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनो के रख रखाव मे बढ़ती रुचि के लिए नेतृत्व किया है। बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (BNHS)/ समाज, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारत के वन्य जीवन संस्थान, देहरादून इत्यादि कुछ प्रमुख संस्थाएं है जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण के क्षेत्र मे तेजी से कार्य कर रहे है।

    Dec 29, 2015
  • जेनेटिक फसलें किन्हें कहते हैं?

    आनुवांशिक रूप से संशोधित जीव को जीवों (जैसे कि पौधे, जानवर या सूक्ष्म जीवों) के रूप मे परिभाषित किया जा सकता है जिसमे आनुवांशिक पदार्थ (डीएनए) को इस तरह से संशोधित किया जाता है जो प्राकृतिक रूप से संसर्ग क्रिया / या प्राकृतिक पुनर्संयोजन की क्रिया से उत्पन्न नहीं होता। इस तकनीकी को प्रायः “आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी” या जीन तकनीक, और कभी कभी डीएनए पुनर्संयोजक तकनीक या आनुवांशिक अभियांत्रिकी भी कहा जाता है।

    Dec 28, 2015
  • पर्यावरण की रक्षा के लिए भारतीय प्रस्ताव

    राज्यों के पर्यावरण एवं वन मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन 6 अप्रैल, 2015 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुरू हुआ था। जिसका समापन 7 अप्रैल 2015 को हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के 30 मंत्रियों ने भाग लिया था, जिसमें विभिन्न मुद्दों जैसे- कचरे से संपदा, कारोबार को आसान बनाना, टीएसआर सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों, वन, वन्य जीवन, प्रदूषण से संबंधित मुद्दों, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गयी।

    Dec 23, 2015
  • छोटे किसानों के लिए ICRISAT द्वारा ग्रीन फैबलेट

    अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) ने 29 दिसंबर 2014 को ग्रीन फैबलेट (छोटे किसानों के लिए) की शुरूआत की थी। ग्रीन फैबलेट विशेष रूप से निर्मित फोन और टैबलेट कंप्यूटर की एक कम लागत वाला संयोजन है। यह डिवाइस ग्रीन सिम द्वारा संचालित की जाती है, जिसका परिचालन -20 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस में होता है। डिवाइस को कृषि हेतु एनयूएनसी प्रणाली के सहयोग से आईसीटी नवाचार में उत्कृष्ट आईसीआरआईएसएटी केन्द्र द्वारा विकसित किया गया है।

    Dec 23, 2015
  • जलीय विभंजन (हाइड्रोलिक फ्रेक्चरिंग)

    एक “दबाव वाले द्रव्य (pressurized fluid.)” द्वारा एक चट्टानी परत में दरार को चौड़ा करना या फैलाना जलीय विभंजन है। निश्चित छेद और बांध कुछ प्राकृतिक जलीय विभंजन के कुछ उदाहरण हैं और ये नलिका का निर्माण कर सकते हैं जिसके साथ चट्टानों के स्त्रोतों से गैस ,पेट्रोलियम और जल चट्टानों में चला जाता हैं। सामान्यत: जल विभंजन को फ्रेकिंग के रूप में जाना जाता है, जो एक तकनीक है जिसमे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस का प्रय़ोग (शेल गैस, तंग गैस और कोयले की सतही गैस सहित) फ्रेकिंग के लिए किया जाता है।

    Dec 23, 2015
  • प्रवाल विरंजन (श्वेत पड़ना)

    जब तापमान, प्रकाश, या पोषक जैसी स्थिति में प्रवालों पर परिवर्तित होने का दवाब पड़ता है तो वे अपने ऊतकों में रहने वाले सहजीवी शैवालों को त्याग देते हैं जिसके कारण वे पूरी तरह विरंजित (पूरी तरह सफेद) हो जाते हैं। प्रवाल विरंजल का कारण गर्म पानी या गर्म तापमान हो सकता है। जब पानी अत्यधिक गर्म होता है तो प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले सूक्ष्म शैवाल (zooxanthellae) को त्याग देते हैं जिस कारण प्रवाल पूरी तरह से विरंजित (पूरी तरह सफेद) हो जाते हैं। प्रवाल, विरंजन के दौरान भी जीवित रह सकते हैं लेकिन वे अत्यधिक दवाब औऱ मृत्यु के साये में रहते है।

    Dec 23, 2015
  • भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य (ओडिशा)

    अप्रैल 1975 में ओडिशा राज्य सरकार द्वारा कनिका राज के पूर्व-जमींदारी जंगलों को भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य भारत के सबसे बड़े मगरमच्छ आवासों में से एक है और एक प्रमुख तटीय पारिस्थितिकी तंत्र है। सन 1998 में इसे अपनी पारिस्थितिकी, जीव, पुष्प, भू रूपात्मक और प्राणि एसोसिएशन तथा महत्व एवं सुरक्षा के उद्देश्य के कारण एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। अगस्त 2002 में इसे दूसरे रामसर साइट (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि) के रूप में नामित किया गया था।

    Dec 23, 2015
  • पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर शब्दावली (जार्गन)

    जार्गन (शब्दावली) एक प्रकार की भाषा है जो किसी संदर्भ विशेष में प्रयोग की जाती है और इसे समझे बिना किसी भी लेख को अच्छी तरह से नहीं समझा जा सकता है। आमतौर पर इसका प्रयोग एक विशेष व्यवसाय (जो कि एक निश्चित व्यापार, व्यवसाय, या अकादमिक क्षेत्र) में होता है । लेकिन इनका प्रयोग किसी भी विषय में हो सकता है। किसी लेख को रुचिकर और संक्षिप्त बनाने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।

    Dec 23, 2015
  • टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (मुंबई और जेएनपीटी हार्बर)

    5 जून 2015 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीटी), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और न्हावा तथा उरण में ओएनजीसी की सुविधा के लिए भारत में अपने तरह के पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (ओएसआरसी) का उद्धाटन किया। इस केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।

    Dec 23, 2015
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