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पूर्व मौर्य

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महाजनपद

Sep 25, 2015
छठी शताब्दी ईसा पूर्व में कुछ साम्राज्यों के विकास में वृद्धि हुयी थी जो बाद में प्रमुख साम्राज्य बन गये और इन्हें महाजनपद या महान देश के नाम से जाना जाने लगा था। आर्य यहां की सबसे प्रभावशाली जनजाति थी जिसे 'जन' कहा जाता था जिससे जनपद शब्द की उत्पत्ति हुयी थी। जहां जन का अर्थ "लोग" और पद का अर्थ "पैर" होता था। जनपद वैदिक भारत के प्रमुख साम्राज्य थे। महाजनपदों में एक नये प्रकार का सामाजिक-राजनीतिक विकास हुआ था। महाजनपद विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित थे। यहां इस प्रकार के सोलह महाजनपद थे।

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सातवाहन का युग

Sep 4, 2015
सातवाहन राजवंश भारत में 230 BC के लगभग अस्तित्व में आया और आंध्रा प्रदेश में धरानिकोटा और अमरावती से महाराष्ट्र में जुन्नार और प्रतिष्ठान तक फैला | यह साम्राज्य 450 साल तक रहा जोकि लगभग 220 AD है | वास्तव में सातवाहन ने मौर्य साम्राज्य के दास के तौर पर शुरुआत की और इनके पतन के बाद दक्षिण भारत में स्वाधीन साम्राज्य के रूप में उभरे |

मगध का साम्राज्य

Sep 2, 2015
मगध साम्राज्य ने भारत में 684 BC – 320 BC तक शासन किया | मगध साम्राज्य का दो महान काव्य रामायण और महाभारत में उल्लेख किया गया है | मगध साम्राज्य पर 544 BC से 322 BC तक शासन करने वाले तीन राजवंश थे | पहला था हर्यंका राजवंश (544 BC से 412 BC ), दूसरा था शिशुनाग राजवंश (412 BC से 344 BC ) और तीसरा था नन्दा राजवंश (344 BC से 322 BC )|

जनपद और महाजनपद

Sep 2, 2015
जनपद वैदिक भारत के प्रमुख राज्य थे | 6ठी सदी BC तक लगभग 22 विभिन्न जनपद थे | उत्तर प्रदेश और बिहार के भागों में लोहे के विकास के साथ, जनपद ओर ज़्यादा ताकतवर हो गए और महाजनपद में तब्दील हो गए | 600 BC से 325 BC के दौरान भारत के उपमहाद्वीपों में इस तरह के 16 महाजनपद थे |

कनिष्क: कुषाण राजवंश (78 ईस्वी - 103 ईस्वी)

Aug 31, 2015
कनिष्क कुषाण साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली शासक था। उसके साम्राज्य की राजधानी पुरूषपुर (पेशावर) थी। उसके शासन के दौरान, कुषाण साम्राज्य उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान से लेकर मथुरा और कश्मीर तक फैल गया था। रबातक शिलालेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार कनिष्क विम कदफिसेस का उत्तराधिकारी था जिसने कुषाण राजाओं की एक प्रभावशाली वंशावली स्थापित की।

मध्य एशियाई संपर्कों का प्रभाव (शक-कुषाण काल के दौरान)

Aug 31, 2015
शक और कुषाण अवधि के दौरान घुड़सवार सेना का बेहतरीन उपयोग देखने को मिला था। घोड़े की लगाम और पीठ पर सीट के प्रयोग की शुरूआत शकों और कुषाणों द्वारा शुरू की गयी थी। इसके अलावा शक और कुषाणों ने अंगरखा, पगड़ी और पतलून तथा भारी-भरकम लंबे कोट, कैप और हेलमेट की शुरूआत की थी तथा इस अवधि के दौरान जूतों की भी शुरूआत हुई थी जो युद्ध में जीत के लिए मददगार साबित हुए थे। समुद्र और घाटियों के मार्गों के माध्यम से व्यापार करने के लिए केंद्रीय क्षेत्रों को खोल दिया गया था। इन मार्गों में से एक पुराने रेशम मार्ग के लिए प्रसिद्ध हो गया था।

मौर्य युग के पूर्व विदेशी आक्रमण

Aug 31, 2015
भारतीय उप-महाद्वीप के दो प्रमुख विदेशी आक्रमण, 518 ई.पू. में ईरानी आक्रमण और 326 ई.पू. में मकदूनियाई आक्रमण थे। इन दो आक्रमणों ने इंडो ईरानी व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा दिया। ईरानी लेखकों ने खरोष्ठी लिपि की शुरूआत की जिसे बाद में अशोक के कुछ शिलालेखों में प्रयोग किया गया। इस लिपि में अरबी की तरह दांये से बांये की तरफ लिखा जाता था।
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