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भारतीय अर्थव्यवस्था के आयाम

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  • भारत द्वारा आयातित शीर्ष 7 उत्पादों की सूची

    ज्ञातव्य है कि भारत अपनी आवश्यकता का केवल 20% कच्चे तेल का उत्पादन करता है और बकाया का विदेश से आयात करना पड़ता है. भारत के कुल आयात में कच्चे तेल और सम्बंधित उत्पादों का योगदान लगभग 22% है. इसके बाद दूसरे नंबर पर पूंजीगत सामान (मशीनरी, धातु, परिवहन उपकरण) का नम्बर आता है जो कि कुल आयात का 19.2% है. इस लेख में भारत की ओर से आयात किये जाने वाले 7 सबसे बड़े आयातित उत्पादों के बारे में बताया जा रहा है.

  • थोक मूल्य सूचकांक और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के बीच क्या अंतर होता है?

    थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) देश में मुद्रास्फीति की गणना के लिए दो व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले सूचकांक हैं. भारत में मुद्रास्फीति की गणना करने के लिए थोक मूल्य सूचकांक का उपयोग करता है, जबकि अधिकांश देशों में मुद्रास्फीति नापने के लिए CPI का इस्तेमाल किया जाता है. इस लेख में WPI और CPI के बीच अंतर बताये गये हैं.

    Feb 14, 2018
  • गांधीवादी अर्थशास्त्र की क्या विशेषताएं हैं?

    गांधीवादी अर्थशास्त्र एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था की संकल्पना पर आधारित है जिसमें “वर्ग” का कोई स्थान नही है. गाँधी का अर्थशास्त्र एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने की बात करता है जिसमें एक व्यक्ति किसी दूसरे का शोषण नही करता है. अर्थात गांधीवादी अर्थशास्त्र सामाजिक न्याय और समता के सिद्धांत पर आधारित है.

    Feb 14, 2018
  • आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2017-18: मुख्य तथ्यों पर नजर

    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 29 जनवरी 2018 को संसद के दोनों सदनों में आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 पेश किया. आर्थिक सर्वेक्षण, देश की अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों से सम्बंधित आंकड़ों को बताता है. इस सर्वेक्षण के माध्यम से देश की आर्थिक स्थिति का सही आकलन किया जा सकता है. आर्थिक सर्वेक्षण-2018 में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आर्थिक विकास की दर 7% और 7.5% के बीच रहेगी .

    Feb 4, 2018
  • जानें दुनिया के इन देशों में प्रति व्यक्ति कितना कर्ज है?

    अब यह लेख इस बात की जानकारी करेगा कि यदि किसी देश का पूरा कर्ज चुकाना है तो उस देश के प्रति नागरिक को कितना धन देना होगा. OECD (एक संगठन) के सदस्य देशों में प्रति व्यक्ति ऋण 2007 के बाद से 2017 तक 5.9% की औसत वार्षिक दर से बढ़ गया है. जापान को अपना कर्ज चुकाने के लिए प्रति नागरिक 90,345 डॉलर की जरुरत है जो कि पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा है. भारत को अपना पूरा कर्ज चुकाने के लिए हर भारतीय को 26000 रुपये देने होंगे.

    Feb 4, 2018
  • कौन कौन सी नीतिगत खामियों की वजह से काला धन सफ़ेद बन जाता है: एक विश्लेषण

    काला धन या गुप्त धन उस धन को कहते हैं जिसकी सरकार के पास कोई गणना नही होती है और न ही सरकार को इस राशि पर कोई टैक्स मिलता है | ट्रस्टों की स्थापना, काला धन को कृषि आय बताना, सोने या सोने के आभूषणों की बिक्री या खरीद करना आदि काले धन को सफ़ेद करने के तरीके हैं |

    Nov 18, 2016
  • उदारीकरण से पहले औद्योगिक विकास और नीति

    आजादी के बाद पहली औद्योगिक नीति की घोषणा 6 अप्रैल 1948 को तत्कालीन केंद्रीय उद्योग मंत्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा की गई थी। इस नीति ने भारत में मिश्रित और नियंत्रित अर्थव्यवस्था के लिए एक आधार की स्थापना की थी। नई औद्योगिक नीति के प्रारंभ होने से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था 3.5% की हिंदू वृद्धि दर में उलझ गई थी। देश का आर्थिक परिदृश्य कुछ इस प्रकार का हो गया था: राजकोषीय घाटा बढ़ रहा था, मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही थी और भुगतान संतुलन प्रतिकूल था। इसलिए अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति बहुत दयनीय हो गई थी।

    Nov 18, 2016
  • भारत के कृषि श्रमिकों का अवलोकन

    कृषि मजदूर वह श्रमिक है, जो खेती से सम्बंधित कार्यों जैसे खेत जोतना ,फसल काटना, बागवानी करना, पशुओं को पालना, मधुमक्खियों और मुर्गी पालन के प्रबंधन  और वन्य जीवन से जुडे कार्यों में लगा होता है। कृषि मजदूर असंगठित में क्षेत्र में आते हैं। भारत की लगभग 53% आबादी आज भी कृषि संबंधी गतिविधियों में शामिल है।

    Nov 18, 2016
  • भारत में हरित क्रांति

    सरकार ने 1960 में सात राज्यों से चयनित सात जिलों में एक गहन विकास कार्यक्रम आरम्भ किया और इस कार्यक्रम को गहन क्षेत्र विकास कार्यक्रम (IADP) का नाम दिया गया, जिसे बाद में भारत की हरित क्रांति के रूप में परिभाषित किया गया था | हरित क्रांति से गेहूं, चावल और ज्वार के उत्पादन में लगभग 2 से 3 गुना की वृद्धि हुई। एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है।

    Nov 18, 2016
  • लघु और सीमान्त किसान कौन हैं और भारत में उनकी संख्या कितनी है?

    उत्तर प्रदेश में 2.33 करोड़ किसान हैं। इनमें 1.85 करोड़ सीमांत और लगभग तीस लाख लघु किसान हैं। इस हिसाब से सूबे में लघु व सीमांत किसानों की संख्या 2.15 करोड़ है। सीमांत किसान वे होते हैं जिनकी अधिकतम जोत एक हेक्टेयर तक होती है। वहीं लघु श्रेणी के किसान वे होते हैं जिनकी जोत एक से दो हेक्टेयर तक होती है।

    Apr 4, 2017
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (2015-16): अर्थ और भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान

    न्यूनतम समर्थन मूल्य, वह मूल्य है जिस पर सरकार किसानों द्वारा बेचीं जाने वाली अनाज की पूरी मात्रा खरीदने के लिए तैयार रहती है | इन न्यूनतम मूल्यों का सुझाव सरकार द्वारा स्थापित  कृषि और लागत मूल्य आयोग (CACP) करता है और मूल्यों की घोषणा सरकार करती है | यह समर्थन मूल्य साल में दो बार रबी और खरीफ की खेती के लिए कुल 24 फसलों के लिए घोषित किया जाता है|

    Jan 25, 2017
  • विश्व में फलों के सर्वाधिक उत्पादक देश कौन से हैं?

    फल, पोटेशियम, फाइबर, विटामिन सी और फोलेट (फोलिक एसिड) सहित कई पोषक तत्वों के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। विश्व में सबसे अधिक सेव, अंगूर, लीची और नीबू का उत्पादन चीन में किया जाता है जबकि भारत विश्व में फलों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है| इस लेख में हमने विश्व के कुछ प्रमुख देशों और उनमें पैदा होने वाले फलों के बारे में बताया है|

    Jan 25, 2017
  • भारत सरकार की आय और व्यय के स्रोत क्या हैं

    भारत सरकार ने 2017-18 के बजट में बताया था सरकार की कुल आय 2146735 करोड़ थी जबकि वित्तीय घाटा 5,46,532 करोड़ , राजस्व घाटा  3,21,163 करोड़  और प्राथमिक घाटा 23,544 करोड़ रुपये था l इन तीनों घाटों से स्पष्ट है कि सरकार की आय उसके व्यय से कम थी| सरकार इस घाटे को पूरा करने के लिए हीनार्थ प्रबंधन (Deficit  Financing) का सहारा लेती है|

    Mar 16, 2017
  • GST बिल क्या है, और यह आम आदमी की जिंदगी को कैसे प्रभावित करेगा?

    राज्य सभा ने GST बिल को 3 अगस्त, 2016 को पास कर दिया है जबकि लोकसभा इसे पहले ही पास कर चुकी है | कुछ और औपचारिकताओं के बाद यह बिल एक कानून बन जायेगा| यह कर सभी मौजूदा अप्रत्यक्ष करों का स्थान लेगा | इससे देश में वस्तुओं की कीमतों के घटने के साथ-साथ सकल घरेलु उत्पाद में भी 2% की बृद्धि होने का अनुमान है |

    Aug 8, 2016
  • 1991 की नयी आर्थिक नीति

    सारांश: जून 1991 में नरसिंह राव सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था को नयी दिशा प्रदान की ।  यह दिशा उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (एलपीजी मॉडल के रूप में जाना जाता है) के रूप में पूरे देश में आर्थिक सुधारों के रूप में लागू की गयी । इस नई औद्योगिक नीति के तहत सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों को प्रवेश करने की अनुमति दी, जो पहले केवल सरकारी क्षेत्रों के लिए आरक्षित थे। इस नई आर्थिक नीति को लागू करने के पीछे मुख्य कारण भुगतान संतुलन (BOP) का निरंतर नकारात्मक होना था।

    Aug 8, 2016
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