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भारतीय अर्थव्यवस्था के आयाम

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  • भारतीय कृषि उत्पादन में कीटनाशकों की भूमिका

    कीटनाशक रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जो कीड़े मकोड़ों से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने या उनसे बचाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कृषि के क्षेत्र में पेड़ पौधों को बचाने के लिए बहुतायत में किया जाता है। कीटनाशकों को उनके उपयोग और अमल के तरीकों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे कीटनाशक, कवकनाशी, शाकनाशी इत्यादि |

  • भारत में श्वेत क्रांति

    श्वेत क्रांति दूध-उत्पादकता में तीव्र वृद्धि से संबंधित है। भारत में श्वेत क्रांति को ऑपरेशन फ्लड के नाम से भी जाना जाता है| भारत को दुग्ध-उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 1970 के दशक में इसकी शुरूआत की गई थी| डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत में श्वेत क्रांति का जनक कहा जाता है। वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है|

    Mar 10, 2017
  • भारत में सिचाई सुविधाएँ: तथ्यात्मक विश्लेषण

    कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। लेकिन समुचित सिंचाई सुविधाओं के अभाव में इसकी हालत साल दर साल बिगड़ती जा रही है। भारत के शीर्ष पाँच सर्वाधिक सिंचित राज्य (कुल क्षेत्रफल की दृष्टि से) इस प्रकार हैं: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और आंध्र प्रदेश।

    Jul 22, 2016
  • भारत में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TDPS)

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को ‘अल्पता का प्रबंधन’ (management of scarcity) तथा कम कीमत पर खाद्यान्न के वितरण के लिए विकसित किया गया था लेकिन यह प्रणाली व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार की वजह से अपने वांछित उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर सकी । इसलिए इस प्रणाली की खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने जून,1997 में गरीबों पर ध्यान देने के लिए लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) की फिर से शुरुआत की थी |

    Jul 22, 2016
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड)

    यह एक शीर्ष बैंकिग संस्था है जो कृषि और ग्रामीण विकास के लिए पूंजी उपलब्ध कराती है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना 12 जुलाई, 1982 को 100 करोड़ रूपये की प्रदत्त धनराशि के साथ की गई थी। 2010 में नाबार्ड की प्रदत्त राशि 2,000 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। यह ग्रामीण ऋण संरचना की एक शीर्ष संस्था है जो कृषि, लघु उद्योगों, कुटीर एवं ग्रामोद्योग तथा हस्तशिल्प आदि को बढ़ावा देने के लिए ऋण उपलब्ध कराता है।

    Jul 22, 2016
  • कृषि यन्त्र और हरित क्रांति

     भारत में हरित क्रांति के परिणामस्वरूप विभिन्न फसलों की उत्पादकता में वृद्धि हुई है | इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण थे अच्छी उपज देने वाले किस्म के बीजों का प्रयोग करना, रासायनिक खाद और नई तकनीकों का प्रयोग करना जिसके कारण 1960 के मध्य दशक के दौरान कृषि उत्पादकता में तेजी से वृद्धि हुई | इस उन्नति का श्रेय नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ नॉर्मन बोरलॉग और डॉ एमएस स्वामीनाथन को जाता है। इस क्रांति के कारण गेहूं की उत्पादकता में 2.5 गुना; चावल में 3 गुना , मक्का में  3.5 गुना, ज्वार में 5 गुना और बाजरा में 5.5 गुना की वृद्धि हुई |

    Jul 22, 2016
  • भारत की उपलब्धियों के बारे में रोचक तथ्य

    प्राचीन समय में भारत को विश्व में आध्यात्मिक गुरू के रूप में जाना जाता था लेकिन अब भारत व्यापार के क्षेत्र में भी नई ऊँचाइयों को छू रहा है| भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार (जीडीपी नाममात्र के संदर्भ में) 3444 बिलियन डॉलर है। अतः वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की 6ठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है| आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि “नासा” में 36% वैज्ञानिक भारतीय हैं|

    Nov 3, 2016
  • बीज की अधिक उपज वाली किस्में

    बीज की अधिक उपज वाली किस्में (HYV बीज) सामान्य गुणवत्ता के बीज की तुलना में बेहतर होती हैं। इन बीजों से उत्पादन सामान्य बीजों की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार के बीज स्वस्थ और अधिक फसल प्राप्त करने के लिए बीजों का एक बेहतर विकल्प हैं। इन बीजों में कीड़ों और अन्य रोगों से लड़ने के लिए एक बेहतर प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। इन बीजों की एक और विशेषता होती है वो यह है कि इन बीजों को सिंचाई की कम जरूरत होती है। इन बीजों का भारत की हरित क्रांति में एक बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

    Nov 3, 2016
  • वित्तीय संघवाद में वित्त आयोग की क्या भूमिका है?

    वित्त आयोग की स्थापना भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के प्रावधानों के तहत पांच वर्षों के लिए की जाती है। यह केंद्र सरकार के कुल कर संग्रह में राज्य सरकारों की हिस्सेदारी का फैसला करता है। वर्तमान में 14वें वित्त आयोग का कार्यकाल चल रहा है। इसके प्रमुख आरबीआई के भूतपूर्व गवर्नर श्री वाई. वी. रेड्डी हैं। 14वें वित्त आयोग की अवधि 2015 से 2020 है।

    Nov 3, 2016
  • जाने भारत के 20 सबसे ईमानदार शहर कौन से हैं

    ट्रान्सपैरेंसी इंटरनेशनल की तर्ज पर ही भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में 2016-17 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए देश के टॉप 20 ईमानदार शहरों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में देश की आर्थिक राजनधानी मुंबई पहले नंबर पर है और इसको 10 में से 8 नंबर मिले हैं|सबसे ज्यादा नंबर मुंबई-हैदराबाद के हैं और सबसे कम नंबर चंडीगढ़ और देहरादून को मिले हैं।

    Mar 2, 2017
  • भारत की वन संसाधन रिपोर्ट (2013)

    भारत में वनों की स्थिति पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के भारतीय वन सर्वेक्षण (Forest Survey of India) की 13वीं वन स्थिति रिपोर्ट – 2011, 8 जुलाई 2014 को पूर्व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जारी की | इस रिपोर्ट के अनुसार 2011 में देश में कुल वनाच्छादित क्षेत्र 697898 वर्ग किमी. है जो कि देश के कुल भूभाग का 21.23% है |

    Mar 2, 2017
  • शेयर बाजार में इस्तेमाल किए जाने वाले 23 सबसे महत्वपूर्ण शब्द

    भारत में मुख्य रूप से 2 स्टॉक एक्सचेंज हैं: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE)l बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज दलाल स्ट्रीट, मुंबई, महाराष्ट्र, भारत में स्थित एक भारतीय शेयर बाजार है। सन 1875 में स्थापित, बीएसई एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज हैl बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, 30 बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्य में उतार चढ़ाव की गणना करता हैl ये सभी शब्द बैंकिंग सामान्य ज्ञान  के लिए बहुत उपयोगी हैंl

    Mar 27, 2017
  • भारत में पीली क्रांति और गोल क्रांति

    खाद्य तेलों तथा तिलहन फसलों के उत्पादन हेतु अनुसन्धान एवं विकास की रणनीति को पीली क्रांति के नाम से जाना जाता है | तिलहन उत्पादन में आत्म निर्भरता प्राप्त करने की दृष्टि से उत्पादन, प्रसंस्करण और प्रबंध प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग करने के उद्येश्य से तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन 1986 से आरंभ किया गया था|

    Mar 27, 2017
  • भारत में कृषि श्रमिकों की समस्याएं

    भारत में कृषि अब भी मानसून की कृपा पर निर्भर है और भारत की लगभग 53% आबादी कृषि गतिविधियों में संलग्न है | यहाँ, किसानों और खेतिहर मजदूरों की गतिविधियाँ मानसून की तीव्रता पर निर्भर करतीं हैं, अगर मानसून अच्छा होगा तो फसल भी अच्छी होगी अन्यथा नहीं | कृषि श्रम को असंगठित क्षेत्र की श्रेणी में गिना जाता है | अतः  इनकी आय भी निश्चित नहीं होती है।

    Mar 27, 2017
  • क्या भारत को एक नए वित्तीय वर्ष की आवश्यकता है?

    भारत में अभी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि को एक वित्तीय वर्ष कहते हैं। अंग्रेजों के भारत आने से पहले भारत में 1 मई से 30 अप्रैल का वित्तीय वर्ष होता था लेकिन ब्रिटिश काल में इस वित्तीय वर्ष को 1867 से 1 अप्रैल से 31 मार्च की अवधि का कर दिया गया थाl ज्ञातब्य है कि विश्व में बहुत से देश 1 अप्रैल से 31 मार्च वाला वित्तीय वर्ष ही मानते हैंl

    Apr 6, 2017
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