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भारतीय अर्थव्यवस्था

  • बेरोजगारी कितने प्रकार की होती है और भारत में कैसी बेरोजगारी पायी जाती है?

    बेरोजगारी की परिभाषा हर देश में अलग अलग होती है जैसे अमेरिका में यदि किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता /क्वालिफिकेशन के हिसाब से नौकरी नही मिलती है तो उसे बेरोजगार माना जाता है. सामान्य तौर पर बेरोजगार उस व्यक्ति को कहा जाता है जो कि बाजार में प्रचलित मजदूरी दर पर काम तो करना चाहता है लेकिन उसे काम नही मिल पा रहा है.

    1 day ago
  • जानें हर भारतीय के ऊपर कितना विदेशी कर्ज है?

    भारत का विदेशी ऋण स्टॉक मार्च 2016 के अंत में 485.6 बिलियन अमरीकी डॉलर था जो कि मार्च 2015 के 475 बिलियन अमरीकी डॉलर से 2.2 % या 10.6 बिलियन अमरीकी डॉलर बढ़ गया है l लेकिन यदि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की नजर से देखा जाये तो 2015 में यह कर्ज GDP का 23.8% था जो कि 2016 में घटकर 23.7% रह गया है l

    3 days ago
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई): परिभाषा, विशेषताएं, लाभ और हानि

    यूनिवर्सल बेसिक इनकम (यूबीआई) एक देश के लोगों को एक मुश्त फिक्स धनराशि देने की योजना है. इसमें लाभार्थियों का चयन करने के लिए उनकी आय, रोजगार की स्थिति, भौगोलिक स्थिति इत्यादि का आकलन नहीं किया जायेगा. यूबीआई का उद्देश्य देश में गरीबी को कम करना और नागरिकों में आर्थिक समानता बढ़ाना है. UBI को शुरू करने का विचार वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के आर्थिक सर्वेक्षण में रखा था.

    Apr 16, 2019
  • स्विस बैंक में खाता खोलने के लिए क्या योग्यता होती है?

    वर्ष 1713 में जिनेवा में हुई “ग्रेट काउन्सिल ऑफ़ जेनेवा” की बैठक में बैंकों के लिए नियम बनाये गए कि वे अपने ग्राहकों की बैंक डिटेल को किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देंगे. तभी से स्विस बैंक के खाते पूरी दुनिया में सबसे सुरक्षित खातों के रूप में मशहूर हो गये हैं. स्विट्ज़रलैंड की बैंकों में खाता खुलवाने के लिए लगभग 1 लाख डॉलर रुपयों की जरुरत होती है.

    Apr 10, 2019
  • भारत सरकार दुनिया में किस किस से कर्ज लेती है?

    भारत में लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गयी सरकार काम करती है इसलिए इसका मुख्य लक्ष्य लोगों के कल्याण में वृद्धि करना होता है. यदि जनहित के कार्यों के लिए सरकार के पास रुपयों की कमी पड़ती है तो वह विभिन्न स्रोतों से उधार मांगकर खर्च करती है. इस लेख में यह बताया गया है कि सरकार किन-किन तरीकों और स्रोतों से रुपया उधार मांगती है.

    Apr 5, 2019
  • दुनिया के किन देशों में आयकर नही लगता है?

    दुनिया के हर देश में सरकारें लोगों के ऊपर आयकर लगतीं हैं और इस आयकर के रूप में इकट्ठे हुए रुपयों की मदद से लोगों के कल्याण के लिए आधारभूत संरचना का विकास करतीं हैं. लेकिन दुनिया में सऊदी अरब, क़तर और बहामास जैसे देश भी हैं जहाँ पर लोगों से आयकर नही लिया जाता है. इस लेख में ऐसे ही कुछ देशों के बारे में बताया जा रहा है.

    Apr 3, 2019
  • आप बिना एम्प्लोयेर की अनुमति के कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) का पैसा कैसे निकाल सकते हैं?

    जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी में काम करना शुरू करता है तो उसकी बेसिक सैलरी का 12% PF के लिए काटा जाता है और इतना ही योगदान कंपनी (Employer) की तरफ से दिया जाता है | व्यक्ति की सैलरी का 12% कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में पूरा जमा हो जाता है जबकि कंपनी द्वारा किया गये योगदान का केवल 3.67% ही EPF में जमा होता है बकाया का 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (Employee’s Pension Scheme-EPS) में जमा हो जाता है |

    Apr 3, 2019
  • किन देशों में भारतीय करेंसी मान्य है और क्यों?

    डॉलर को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल करेंसी का तमगा हासिल है. कोई भी देश डॉलर में भुगतान लेने को तैयार हो जाता है. लेकिन क्या इस तरह का सम्मान भारत की मुद्रा रुपया को मिलता है. जी हाँ, भले ही ‘रुपये’ को डॉलर जितनी आसानी से इंटरनेशनल ट्रेड में स्वीकार ना किया जाता हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे देश हैं जो कि भारत की करेंसी में आसानी से पेमेंट स्वीकार करते हैं. आइये इस लेख में इन सभी देशों के नाम जानते हैं.

    Apr 2, 2019
  • मेरिट और गैर मेरिट वस्तुएं क्या होतीं हैं?

    मेरिट वस्तुओं को उत्कृष्ट वस्तुएं भी कहा जाता है. सरकार जिन वतुओं के उपयोग को जनहित के लिए बढ़ाना चाहती है उनको मेरिट वस्तुएं कहा जाता है. सरकार जिन वस्तुओं के उपयोग को समाज के लिए हानिकारक समझतीं हैं तथा उन पर रोक लगाती है. ऐसी वस्तुओं को गैर मेरिट वस्तुएं कहा जाता है. उदाहरण: शराब, गांजा, अफीम और अन्य ड्रग्स इत्यादि.

    Mar 30, 2019
  • घाटे की वित्त व्यवस्था क्या होती है और इसके क्या उद्येश्य होते हैं?

    जब कभी सरकार की आय उसके द्वारा उसके द्वारा किये जाने वाले व्ययों से कम हो जाती है तो बजट में इस प्रकार के घाटे को पूरा करने के लिए जो व्यवस्था अपनाई जाती है उसे घाटे की वित्त व्यवस्था या हीनार्थ प्रबंधन कहते है. घाटे की वित्त व्यवस्था को तीन प्रकार से पूरा किया जाता है. नए नोट छापकर, विदेशी ऋण लेकर और आंतरिक ऋण लेकर.

    Mar 30, 2019
  • ट्राईफेड क्या है और इसके क्या उद्येश्य हैं?

    TRIFED का पूरा नाम “द ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया” है. यह 1987 में स्थापित किया गया था जबकि इसने अप्रैल 1988 से अपना काम शुरू किया था. ट्राइफेड का मूल उद्देश्य आदिवासी लोगों द्वारा जंगल से एकत्र किये गए या इनके द्वारा बनाये गए उत्पादों को बाजार में सही दामों पर बिकवाने की व्यवस्था करना है.

    Mar 29, 2019
  • न्यूनतम गारंटी योजना (MIG) और न्यूनतम आय गारंटी योजना (UBI) में क्या अंतर है?

    आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने गरीबी कम करने के प्रयास के लिए देश में चल रही विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के स्थान पर एक न्यूनतम आय गारंटी योजना (UBI) शुरू करने की वकालत की थी. इसके जवाब में राहुल गाँधी ने देश में न्यूनतम गारंटी योजना (MIG) की बात कही जो कि देश में 25 करोड़ गरीब लोगों को 6 हजार रुपये प्रति माह देने का प्रस्ताव रखती है.

    Mar 26, 2019
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अपने सदस्य देशों को लोन कैसे देता है?

    अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अपने सदस्य देशों के प्रतिकूल संतुलन को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है. विश्व में अंतर्राष्ट्ररीय नकदी की समस्या को दूर करने के लिए इसने विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights) की शुरुआत 1971 में की थी. SDR एक ऐसी रिज़र्व मुद्रा है जिसके द्वारा IMF का सदस्य देश विदेशी भुगतानों के लिए अन्य सदस्य देशों से अपने कोटे के SDR के बदले में विदेशी मुद्राएँ प्राप्त कर अपने ऋणों या भुगतानों को चुका देता है.

    Mar 22, 2019
  • जनसँख्या विस्फोट: अर्थ, कारण और परिणाम

    जब किसी देश की जनसँख्या की मृत्यु दर में कमी होती है, बाल मृत्यु दर में कमी होती है लेकिन जन्मदर में वृद्धि होती है और जब जीवन प्रत्याशा में वृद्दि होती है तो इन सबके संयुक्त प्रभाव के कारण जनसंख्या में बहुत तेजी से हुई वृद्धि होती है. इस स्थिति को ही जनसँख्या विस्फोट कहा जाता है.

    Mar 19, 2019
  • क्या भारत सरकार नए नोट छापकर विदेशी कर्ज चुका सकती है?

    भारत पर मार्च 2018 तक 529.7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चढ़ा हुआ था जो कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का 20.5% था. हालाँकि दिसम्बर 2018 में यह घटकर 510 अरब डॉलर पर आ गया था. ऐसी दशा में कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत को नयी मुद्रा छापकर पूरा विदेशी कर्ज चुका देना चाहिए. क्या ऐसा संभव है? इस लेख के माध्यम से जानिये पूरा गणित.

    Mar 14, 2019