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भारत और जलवायु परिवर्तन

  • सुनामी वार्निंग सिस्टम क्या होता है और यह कैसे काम करता है?

    डीप ओशेन ऐसेसमेंट एंड रिपोर्टिंग ऑफ़ सुनामी (DART) को पहली बार सन् 2000 के अगस्त महीने में शुरू किया गया था. डार्ट प्रणाली के माध्यम से जानकारी जुटाने के लिए बोटम प्रेशर रिकार्डर (बीपीआर) और समुद्री लहरों पर तैरती हुई एक डिवाइस को रखा जाता है. गहरे जल में स्थित बीपीआर से तैरती डिवाइस तक आंकड़े या सूचनाएं भेजी जातीं हैं. तैरती डिवाइस से आंकड़े या सूचनाओं को जियोस्टेशनरी ऑपरेशनल इन्वायरमेंटल सैटेलाइट डाटा कलेक्शन सिस्टम तक पहुंचाया जाता है.

    Dec 26, 2018
  • क्या किसानों के पास पराली जलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है?

    बरसात का मौसम धान की पैदावार के लिए बहुत ही अनुकूल होता है इसलिए पंजाब और हरियाण सहित पूरे देश में धान की फसल पैदा की जाती है लेकिन अक्टूबर और नवम्बर में ये फ़सल हार्वेस्टर मशीन की सहायता से काट ली जाती है लेकिन इस कटाई में फसल का सिर्फ अनाज वाला हिस्सा अर्थात धान के पौधे के ऊपर का हिस्सा ही काटा जाता है और बाकी का हिस्सा खेत में ही लगा रहता है जिसे पराली कहते हैं.

    Nov 15, 2018
  • पर्यावरण के क्षेत्र मे गैर सरकारी संगठन और वकालत संस्थान

    हमारे देश मे कई सरकारी और गैर सरकारी संगठनो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनो के रख रखाव मे बढ़ती रुचि के लिए नेतृत्व किया है। बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (BNHS)/ समाज, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारत के वन्य जीवन संस्थान, देहरादून इत्यादि कुछ प्रमुख संस्थाएं है जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण के क्षेत्र मे तेजी से कार्य कर रहे है।

    Dec 29, 2015
  • पर्यावरण की रक्षा के लिए भारतीय प्रस्ताव

    राज्यों के पर्यावरण एवं वन मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन 6 अप्रैल, 2015 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुरू हुआ था। जिसका समापन 7 अप्रैल 2015 को हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के 30 मंत्रियों ने भाग लिया था, जिसमें विभिन्न मुद्दों जैसे- कचरे से संपदा, कारोबार को आसान बनाना, टीएसआर सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों, वन, वन्य जीवन, प्रदूषण से संबंधित मुद्दों, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गयी।

    Dec 23, 2015
  • छोटे किसानों के लिए ICRISAT द्वारा ग्रीन फैबलेट

    अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) ने 29 दिसंबर 2014 को ग्रीन फैबलेट (छोटे किसानों के लिए) की शुरूआत की थी। ग्रीन फैबलेट विशेष रूप से निर्मित फोन और टैबलेट कंप्यूटर की एक कम लागत वाला संयोजन है। यह डिवाइस ग्रीन सिम द्वारा संचालित की जाती है, जिसका परिचालन -20 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस में होता है। डिवाइस को कृषि हेतु एनयूएनसी प्रणाली के सहयोग से आईसीटी नवाचार में उत्कृष्ट आईसीआरआईएसएटी केन्द्र द्वारा विकसित किया गया है।

    Dec 23, 2015
  • भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य (ओडिशा)

    अप्रैल 1975 में ओडिशा राज्य सरकार द्वारा कनिका राज के पूर्व-जमींदारी जंगलों को भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य भारत के सबसे बड़े मगरमच्छ आवासों में से एक है और एक प्रमुख तटीय पारिस्थितिकी तंत्र है। सन 1998 में इसे अपनी पारिस्थितिकी, जीव, पुष्प, भू रूपात्मक और प्राणि एसोसिएशन तथा महत्व एवं सुरक्षा के उद्देश्य के कारण एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। अगस्त 2002 में इसे दूसरे रामसर साइट (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि) के रूप में नामित किया गया था।

    Dec 23, 2015
  • टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (मुंबई और जेएनपीटी हार्बर)

    5 जून 2015 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीटी), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और न्हावा तथा उरण में ओएनजीसी की सुविधा के लिए भारत में अपने तरह के पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (ओएसआरसी) का उद्धाटन किया। इस केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।

    Dec 23, 2015
  • प्रतिपूरक वनीकरण कोष विधेयक, 2015

    29 अप्रैल 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में प्रतिपूरक वनीकरण कोष (सीएएफ) विधेयक, 2015 को प्रस्तुत कर अपनी मंजूरी दे दी है। कानून का उद्देश्य गैर वन प्रयोजन के लिए आवंटित वन भूमि के एवज में जारी की गयी राशि का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों तथा प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत व्यवस्था प्रदान करना है। सीएएफ विधेयक, 2015, वनों के लिए सुरक्षा, जागरूकता और पारदर्शिता प्रदान करने के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करता है।

    Dec 23, 2015
  • पर्यावरणीय कानूनों पर सुब्रमण्यम समिति

    पर्यावरणीय कानूनों की समीक्षा के लिए पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यम की अध्यक्षता में बनी एक उच्च स्तरीय समिति ने 18 नवंबर, 2014 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी। समिति ने देश में विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरण संबंधी मंजूरी की प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए एक नया कानून तैयार करने की सिफारिश की थी।

    Dec 22, 2015
  • भारत में वायु की गुणवत्ता

    भारतीय महानगरों मुख्यत: दिल्ली में वायु की गुणवत्ता प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है जिससे खराब वायु गुणवत्ता संबंधित मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष 19 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण मर जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा मई 2014 में प्रकाशित तथा फरवरी, 2014 में याले विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, नई दिल्ली में वायु न केवल भारत अपितु समूचे विश्व में सबसे अधिक प्रदूषित है।

    Dec 22, 2015
  • राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना

    “गंगा एक्शन प्लान (GAP)” प्रथम चरण- जिसे 100% केंद्र पोषित योजना के रूप में शुरू किया गया था, और जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को रोकना व उसके पानी की गुणवत्ता में सुधार करना था| यह योजना 1985 में शुरू की गई थी| नदी की सफाई के कार्यक्रम को दो अलग-अलग योजनाओं, गंगा एक्शन प्लान GAP द्वितीय चरण तथा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP ) के तहत देश की अन्य प्रमुख नदियों के लिए बढ़ा दिया गया था। यमुना और गोमती कार्य योजनाओं को गंगा एक्शन प्लान-द्वितीय चरण के तहत अप्रैल 1993 में अनुमोदित किया गया।

    Dec 15, 2015
  • मैली से निर्मल यमुना पुनरोद्धार परियोजना, 2017

    13 जनवरी 2015 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मैली से निर्मल यमुना पुनरोद्धार योजना 2017 के तहत यमुना नदी को साफ करने के लिए निर्देश दिया। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में की प्रिंसिपल बेंच द्वारा दिए गए थे। न्यायाधिकरण का फैसला मनोज मिश्रा (जो कि यमुना जिए अभियान से जुड़े हुए थे) द्वारा दायर की गई याचिका आधार पर दिया गया था|

    Dec 15, 2015
  • भारत और विश्व के प्रसिद्ध पर्यावरणविद

    एक पर्यावरणविद् बड़े पैमाने पर पर्यावरण आंदोलन, एक राजनीतिक और नैतिक आंदोलन" के रूप में सुधार और पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक मानव गतिविधियों में परिवर्तन के माध्यम से प्राकृतिक पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा करना चाहता है। एक पर्यावरणवादी पूरी तरह से पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित होता है और यही उसका धर्म होता है। विश्व के कुछ जाने माने पर्यवार्नाविदों के नाम निम्न प्रकार हैं: क़ाज़ी खोलिकुज्जामन अहमद (पर्यावरण कार्यकर्ता और बांग्लादेश के अर्थशास्त्री), वंगारी माथई (केन्या), हंटर लोविन्स आदि।

    Dec 15, 2015
  • नमामि गंगे योजना

    प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में, श्री नरेन्द्र मोदी ने नमामि गंगे योजना ( 13 मई 2005 ) को हरी झंडी दिखाई जिसमें एकीकृत होकर व्यापक तरीके से गंगा नदी को साफ करना व बचाना है | अगले 5 वर्षों के लिए इस योजना को 20,000 करोड़ रुपये का बजट परिव्यय है | पिछले 30 साल में व्यय पर महत्वपूर्ण चार गुना वृद्धि (भारत सरकार ने 1985 के बाद से इस कार्य पर लगभग रु 4000 करोड़ रुपए का समग्र व्यय किया है) हुई है।

    Dec 11, 2015
  • यूएनईपी की पहली अनुकूलन अंतराल (गैप) रिपोर्ट

    संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा पहली यूएनईपी की पहली अनुकूलन अंतराल (गैप) रिपोर्ट 5 दिसंबर, 2014 को जारी की गयी थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती के बावजूद भी जलवायु परिवर्तन की वर्तमान अनुमानित अनुकूलन लागत 70-100 बिलियन डालर प्रतिवर्ष से 2050 तक दो या तीन गुना तक पहुंच जाएगी। हरित जलवायु कोष भविष्य में अनुकूलन के वित्त पोषण के अंतर को पूरा करने में एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

    Dec 9, 2015