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भारत में आर्थिक नियोजन

  • भारत की सभी पंचवर्षीय योजनाओं की सूची

    आर्थिक नियोजन वह प्रक्रिया है जिसमें वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सीमित प्राकृतिक संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाता है. भारत में आर्थिक नियोजन की अवधारणा रूस (तब यूएसएसआर) से ली गई थी. भारत ने अब तक 12 पंचवर्षीय योजनाएं लॉन्च की हैं और वर्तमान NDA सरकार ने भारत में पंचवर्षीय योजनाओं को बनाना बंद कर दिया है. भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की गई थी.

    Sep 25, 2018
  • जानें अकबर के शासन के दौरान अमेरिकियों की तुलना में भारतीय कितने अमीर थे?

    सन 1600 ईस्वी के आस पास भारत में अकबर का शासन था और इसी साल अंग्रेजों ने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी. ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय, नीदरलैंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब भारत में अकबर का शासन था उस समय भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद आज के ज़माने में विकसित देश कहे जाने वाले फ़्रांस, जर्मनी, अमेरिका और जापान से भी अधिक थी.

    Jul 3, 2018
  • भारतीय अर्थव्यवस्था - महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली सेट 2

    विशिष्ट शब्दावली (जार्गन्स– Jargons) सभी विषयों में विषय विशेष शब्द होते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था की भी विशिष्ट शब्दावली है I इसका प्रयोग लेखों/ प्रकाशनों/ रिपोर्टों आदि में बहुत किया जाता है I अगर कोई छात्र इन आर्थिक शब्दों का अर्थ समझने में असमर्थ होता है तो वह लेख/ पैराग्राफ/ रिपोर्ट का अर्थ समझने में सक्षम नहीं होगा/होगी। हमने भारतीय अर्थव्यस्था पर आपके ज्ञान को बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कुछ शब्दों का चयन किया है।

    Jun 21, 2016
  • सूचकांकों के प्रकार

    पूरी दुनिया के लोगों के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास को मापने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा विभिन्न प्रकार के सूचकांकों का निर्माण किया गया है। इन सूचकांकों में लैंगिक असमानता सूचकांक, मानव विकास सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक और प्रौद्योगिकी उपलब्धि सूचकांक शामिल हैं।

    Jun 10, 2016
  • राष्ट्रीय विकास परिषद

    योजना के निर्माण में राज्यों की भागीदारी होनी चाहिए, इस विचार को स्वीकार करते हुए सरकार के एक प्रस्ताव द्वारा 6 अगस्त, 1952 ई० को राष्ट्रीय विकास परिषद का गठन हुआ था । राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) एक कार्यकारी निकाय है ।यह ना ही संवैधानिक है और न ही एक सांविधिक निकाय है। यह देश की पंचवर्षीय योजनाओं का अनुमोदन करती है। प्रधानमंत्री, परिषद का अध्यक्ष होता है । भारतीय संघ के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री एवं योजना आयोग के सभी सदस्य इसके पदेन सदस्य होते हैं।

    Apr 22, 2016
  • भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रकृति या स्वभाव

    आजादी के बाद से भारत की अर्थव्यवस्था एक 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' रही है। भारत के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' को सफल बनाने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार रहे हैं । भारतीय अर्थव्यवस्था, मूल रूप से सेवा क्षेत्र (वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद का 60% हिस्सा प्रदान करता है) के योगदान और कृषि (जनसंख्या के लगभग 53% लोग) पर निर्भर है । ज्यों-ज्यों समय बीत रहा है वैसे-वैसे अर्थव्यवस्था में कृषि की हिस्सेदारी कम हो रही है तथा सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

    Apr 1, 2016
  • उदारीकरण से पहले भारत की पंचवर्षीय योजनाएं

    भारत में नियोजित आर्थिक विकास, पहली पंचवर्षीय योजना की स्थापना के साथ 1951 में शुरू हुआ था | पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश में कृषि की हालत को सुधारना था क्योंकि कृषि पूरी अर्थव्यस्था का आधार है | दूसरी पंचवर्षीय योजना (महालनोबिस मॉडल पर आधारित) औद्योगिक विकास के लिए समर्पित थी | सन 1980 की अवधि तक भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.5% के आसपास थी (जिसे प्रोफेसर राज्कृष्णा द्वारा हिंदू विकास दर का नाम दिया गया था गया था) |

    Mar 18, 2016
  • उदारीकरण के बाद की पंचवर्षीय योजनायें

    योजना आयोग की स्थापना भारत सरकार के एक संकल्प के द्वारा मार्च, 1950 में की गयी थी । भारत की अर्थव्यवस्था के विकास की जिम्मेदारी पंचवर्षीय योजनाओं पर आधारित थी, जिसे योजना आयोग (प्रधानमन्त्री इसका पदेन अध्यक्ष होता हैं) द्वारा विकसित, निष्पादित तथा जांचा जाता है | अब योजना आयोग को नीति आयोग (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान ) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अब तक 12 पंचवर्षीय योजनाओं को योजना आयोग द्वारा आरम्भ किया गया है। किसी भी पंचवर्षीय योजना को अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा दी जाती है।

    Mar 11, 2016