मुद्रा और बैंकिंग

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  • भारतीय रूपये का अवमूल्यन: कारण और इतिहास (1947 से अब तक)

    1947 में भारत की आजादी के बाद से भारतीय रूपये का 3 बार अवमूल्यन हुआ है| आजादी के समय 1 डॉलर की कीमत 1 भारतीय रूपये थी, लेकिन आज एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए 66 रुपये खर्च करने पड़ते हैं| मुद्रा अवमूल्यन का अर्थ किसी देश की मुद्रा के बाह्य मूल्य में कमी होना है जबकि आंतरिक मूल्य में कोई कमी नही होती है |

  • सार्वजनिक ऋण और घाटे की वित्त व्यवस्था

    देश की सरकार द्वारा आम जनता और वित्तीय संस्थाओं से लिया गया कर्ज सार्वजनिक ऋण या पब्लिक डेट कहलाता है। इसे सरकारी ऋण अथवा राष्ट्रीय कर्ज भी कहा जाता है। यह कर्ज देश की वित्तीय स्थिति का सटीक पैमाना है। भारत का विदेशी ऋण मार्च 2014 के अंत तक 446.3 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर मार्च 2015 के अंत तक 475.8 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया था। देश के विदेशी ऋण में दीर्घकालिक उधारी का बोलबाला हो रहा है।

  • RBI के नये नियम से बैंक फ्रॉड की कितनी राशि ग्राहकों को वापस मिलेगी

    भारतीय रिज़र्व बैंक के नये दिशा निर्देशों के अनुसार यदि कोई ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड या इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों का उपयोग करते हुए स्टोर्स में फेस-टू-फेस लेनदेन फ्रॉड (जैसे कार्ड को क्लोन करना) का शिकार होता है और वह इस फ्रॉड की सूचना सम्बंधित बैंक को फ्रॉड होने की तिथि से तीन दिन के अन्दर दे देता है तो उसे कोई वित्तीय नुकसान नही होगा अर्थात पूरा पैसा बैंक द्वारा ग्राहक को लौटाया जायेगा.

  • आखिर भारतीय अर्थव्यवस्था को प्लास्टिक के नोटों से क्या फायदा होगा?

    भारत में नकली नोटों की बढती समस्या और कागज के नोटों के जल्दी फटने के कारण होने वाले वित्तीय नुकशान को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2014 से देश के पांच शहरों: कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में प्रयोग के तौर पर 10 रुपये के प्लास्टिक के नोट चलाने का फैसला लिया हैl

  • शेयर बाजार में सेबी के मुख्य कार्य क्या हैं?

    भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है। इसकी स्थापना 12 अप्रैल 1988 में हुई थीl इसका मुख्यालय मुंबई में हैl सेबी को सांविधिक निकाय का दर्जा 1992 में दिया गया थाl भारत में शेयर बाजार इसी संस्था के दिशा निर्देशों पर चलता हैl सेबी के वर्तमान चेयरमैन अजय त्यागी हैं l

    Jun 23, 2017
  • नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”

    भारत में करेंसी नोटों को छापने का कम भारत की रिज़र्व बैंक के जिम्मे है. एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोटों पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. किसी भी नोट पर “मैं धारक को 100 या 500 रूपए अदा करने का वचन देता हूँ” जरूर लिखा होता है यह RBI के गवर्नर की शपथ होती है कि जिसके पास भी यह नोट है उसको हर हाल में उसकी लिखी गयी कीमत देने का दायित्व RBI के गवर्नर का है.

    Jul 17, 2018
  • मौद्रिक नीति का अवलोकन

    मौद्रिक नीति एक नियामक नीति है जिसके तहत केंद्रीय बैंक (भारत के मामले में आरबीआई) पैसे की आपूर्ति सामान्य आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए करता है। भारत में मुद्रा की आपूर्ति भारतीय रिजर्व बैंक करता है । सिक्के, वित्त मंत्रालय द्वारा ढालवाये जाते हैं लेकिन उनकी आपूर्ति भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की जाती है।  मौद्रिक नीति के मुख्य कारक हैं: नकद आरक्षित अनुपात, सांविधिक तरलता अनुपात, बैंक दर, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और खुले बाजार के परिचालन।

    Dec 7, 2016
  • भारत में कराधान: एक अवलोकन

    भारत में कर प्रणाली के लिए एक अच्छी तरह से विकसित संरचना है। जो केन्द्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच स्पष्ट रूप से विभाजित है। केन्द्र सरकार व्यक्ति और संस्थाओं पर कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर लगाती और वसूलती है। प्रत्यक्ष कर में व्यक्तिगत आयकर, संपत्ति कर और निगम कर शामिल है जबकि अप्रत्यक्ष कर में बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, कस्टम ड्यूटी और सर्विस टैक्स (सेवा कर) शामिल है। वर्तमान में निगम कर, (कुल कर संग्रह का 19%) केंद्र सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है।

    Dec 7, 2016
  • Piggy बैंक (गुल्लक): उत्पत्ति और उसके नाम के पीछे की कहानी

    मध्य युग के दौरान पंद्रहवीं सदी में धातु बहुत महंगा था और शायद ही कभी घर के सामान के लिए इस्तेमाल किया जाता था। उस समय घरेलू बर्तनों के निर्माण में धातुओं के बजाय "piggy" नामक एक 'किफायती मिट्टी' का प्रयोग किया जाता था| उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजी कुम्हारों ने “Piggy बैंक” या गुल्लक को सुअर के आकार का बना दिया था |

    Jan 9, 2017
  • भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): एक समग्र अध्ययन

    जीएसटी का अर्थ वस्तु एवं सेवा कर है। यह एक अप्रत्यक्ष कर है जिसे माल और सेवाओं की बिक्री पर लगाया जाता है। जीएसटी में कराधान के उद्देश्य के लिए वस्तु और सेवाओं के बीच कोई फर्क नहीं होगा। इस सिस्टम के लागू होने के बाद चुंगी, सेंट्रल सेल्स टैक्स (सीएसटी), राज्य स्तर के सेल्स टैक्स या वैट, एंट्री टैक्स, लॉटरी टैक्स, स्टैप ड्यूटी, टेलीकॉम लाइसेंस फीस, टर्नओवर टैक्स, बिजली के इस्तेमाल या बिक्री पर लगने वाले टैक्स, सामान के ट्रांसपोटेर्शन पर लगने वाले टैक्स खत्म हो जाएंगे।

    May 4, 2016
  • भारतीय बैंकों में कितने प्रकार के खाते खोले जाते हैं?

    भारत में आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का इतिहास दो सौ वर्ष पुराना है। देश में विभिन्न आय वर्ग के लोगों, उनकी जरूरतों और अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से विभिन्न प्रकार के बैंक खातों का विकास हुआ है, जैसे चालू खाता बड़े व्यापारी या संस्थान खुलवाते हैं जबकि बचत खाता मध्य आय वर्ग के लोग खुलवाते हैं l इस लेख में हम बचत खातों, चालू खातों और सावधि जमा खातों के बारे में पढेंगेl

    Apr 11, 2017
  • वाणिज्यिक बैंकों का संचालन: एक आलोचनात्मक समीक्षा

    वाणिज्यिक बैंक( वर्तमान में 27)  देश की वित्तीय संस्थान प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा हैं । वाणिज्यिक बैंक वे लाभ कमाने वाले संस्थान हैं जो आम जनता से धन स्वीकार करते हैं और घरेलू, उद्यमियों, व्यवसायियों आदि जैसे व्यक्तियों को पैसे(ऋण) देते हैं | इन बैंकों का मुख्य उद्देश्य ब्याज, कमीशन आदि के रूप में लाभ कमाना है | इन सभी वाणिज्यिक बैंकों के कार्य भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा नियंत्रित किये जाते है, जोकि एक केंद्रीय बैंक है तथा भारत में सर्वोच्च वित्तीय नियोग है |

    Mar 14, 2016
  • भारत के वित्त मंत्रियों की सूची

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का प्रमुख वित्त मंत्री होता है। सरकार के राजकोषीय नीति की जिम्मेवारी वित्त मंत्री पर होती है| वित्त मंत्री संसद में वार्षिक केंद्रीय बजट (अनुच्छेद 112) प्रस्तुत करता है। स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री आर. के. शंमुखम चेट्टी थे जिन्होंने भारत का पहला बजट पेश किया था।

    Sep 15, 2016
  • जानें भारतीय बैंकिंग प्रणाली में कितने प्रकार के चेक इस्तेमाल किये जाते हैं?

    चेक, बैंक के लिए एक ऐसा बिना शर्त लिखित आदेश होता है, जिसमें बैंकर को संबोधित किया गया होता है कि में अमुख व्यक्ति (चेक धारक) को इतने रुपये (चेक पर लिखी गयी राशि) का भुगतान खाता धारक (चेक देने वाले) के अकाउंट से कर दिया जाये l भारत में मुख्यतः धारक चेक, स्टेल चेक और सेल्फ चेक प्रयोग किये जाते हैं l

    Apr 4, 2017
  • जानें भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर को कितनी सैलरी मिलती है?

    वित्त मंत्रालय ने अभी फरवरी महीने में बैंक के गवर्नर की बेसिक सैलरी को 90,000 से बढाकर 2.5 लाख कर दिया है l यदि गवर्नर के वेतन में बेसिक पे, महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य भुगतान शामिल कर दिए जायें तो उनकी कुल सैलरी 3.70 लाख रुपये प्रति माह पर पहुँच जाती हैl इस बढ़ोत्तरी से पहले वर्तमान गवर्नर उर्जित पटेल को कुल 2,09,500 रुपये/महीने की सैलरी मिलती थी l

    Apr 3, 2017
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