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मुद्रा और बैंकिंग

  • सिक्का अधिनियम 2011: भारत में सिक्कों के साथ क्या नहीं कर सकते

    भारतीय रिज़र्व बैंक; भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार मुद्रा नोट्स प्रिंट करता है, जबकि भारत में सिक्के, सिक्का अधिनियम, 2011 के अनुसार बनाये जाते हैं. सिक्का अधिनियम, 2011 जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में लागू है. इस लेख के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि भारत में सिक्कों के इस्तेमाल को लेकर क्या क्या नियम बनाये गए हैं.

    Jan 8, 2019
  • भारत सरकार और आरबीआई के बीच रिज़र्व फण्ड ट्रान्सफर विवाद क्या है?

    रिजर्व बैंक के पास 9.7 लाख करोड़ रुपए का आरक्षित कोष है. इसमें से कॉन्टिजेंसी फंड 2.3 लाख करोड़ रुपए है. भारत सरकार, RBI से 63 हजार करोड़ रुपये मांग रही है ताकि सरकार के वित्तीय घाटे को कम किया जा सके. इसके उलट RBI अप्रत्याशित जोखिमों और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए ज्यादा अतिरिक्त रिज़र्व अपने पास रखना चाहता है.

    Jan 4, 2019
  • किन देशों में भारतीय करेंसी मान्य है और क्यों?

    डॉलर को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल करेंसी का तमगा हासिल है. कोई भी देश डॉलर में भुगतान लेने को तैयार हो जाता है. लेकिन क्या इस तरह का सम्मान भारत की मुद्रा रुपया को मिलता है. जी हाँ, भले ही ‘रुपये’ को डॉलर जितनी आसानी से इंटरनेशनल ट्रेड में स्वीकार ना किया जाता हो लेकिन फिर भी कुछ ऐसे देश हैं जो कि भारत की करेंसी में आसानी से पेमेंट स्वीकार करते हैं. आइये इस लेख में इन सभी देशों के नाम जानते हैं.

    Dec 17, 2018
  • क्या भारत सरकार नए नोट छापकर विदेशी कर्ज चुका सकती है?

    भारत पर मार्च 2018 तक 529.7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चढ़ा हुआ था जो कि देश के सकल घरेलू उत्पाद का 20.5%था. ऐसी दशा में कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत को नयी मुद्रा छापकर पूरा विदेशी कर्ज चुका देना चाहिए. क्या ऐसा संभव है? इस लेख के माध्यम से जानिये पूरा गणित.

    Oct 4, 2018
  • मसाला बॉन्ड क्या है और भारतीय अर्थव्यवस्था को इससे क्या फायदे हैं?

    विदेशी पूंजी बाजार में निवेश के लिए भारतीय रुपये में जारी किए जाने वाले बॉन्ड को मसाला बॉन्ड कहते हैं. यह एक कॉर्पोरेट बांड होता है जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी किया जाता है. मसाला बॉन्ड को भारतीय मसालों के नाम पर मसाला बॉन्ड कहा जाता है.

    Sep 18, 2018
  • भारत सरकार दुनिया में किस किस से कर्ज लेती है?

    भारत में लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गयी सरकार काम करती है इसलिए इसका मुख्य लक्ष्य लोगों के कल्याण में वृद्धि करना होता है. यदि जनहित के कार्यों के लिए सरकार के पास रुपयों की कमी पड़ती है तो वह विभिन्न स्रोतों से उधार मांगकर खर्च करती है. इस लेख में यह बताया गया है कि सरकार किन-किन तरीकों और स्रोतों से रुपया उधार मांगती है.

    Sep 17, 2018
  • भारतीय रिज़र्व बैंक सोना क्यों खरीदता है?

    वित्त वर्ष 2017-18 की जून तिमाही में RBI ने 8.46 मीट्रिक टन सोना खरीदा है. इससे पहले RBI ने नवंबर 2009 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 200 मीट्रिक टन सोना खरीदा था. रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, अब उसके सोने का भंडार 566.23 मीट्रिक टन पहुंच गया है. इस लेख में बताया गया है कि RBI ने इस सोने की खरीद क्यों की है.

    Sep 12, 2018
  • जानें भारत की करेंसी कमजोर होने के क्या मुख्य कारण हैं?

    भारत की आजादी के समय एक डॉलर का मूल्य एक रुपये के बराबर है लेकिन वर्ष 2018 में भारतीय रुपये का मूल्य अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है और एक डॉलर में खरीदने के लिए 69 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. इस लेख में भारतीय रुपये की वैल्यू में गिरावट के कारणों की व्याख्या की गयी है.

    Sep 7, 2018
  • इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक क्या है और इससे आम आदमी को क्या सुविधाएँ मिलेगीं?

    पेमेंट बैंक भारत में मौजूद कमर्शियल बैंकों से अलग प्रकार के बैंक है. पेमेंट बैंकों की स्थापना के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 नवम्बर 2014 को दिशा निर्देश जारी कर दिए थे. इस समय देश में 11 पेमेंट बैंक काम कर रहे हैं. सितम्बर 1, 2018 को मोदी जी ने ‘इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक’ का उद्घाटन किया है. इस लेख में बताया गया है कि किस प्रकार इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक आम आदमी के लिए फायदेमंद होगा.

    Sep 4, 2018
  • पेमेंट बैंक किसे कहते हैं और इसकी क्या विशेषताएं है?

    पेमेंट बैंक भारत में मौजूद कमर्शियल बैंकों से अलग प्रकार के बैंक है. इसकी स्थापना के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने 24 नवम्बर 2014 में दिशा निर्देश जारी कर दिए थे. पेमेंट बैंक जनता की सामान्य बैंकिंग की जरूरतों को तो पूरा करेंगे लेकिन कुछ प्रतिबंधों के साथ; जैसे पेमेंट बैंक लोगों के कर्रेंट और बचत खाते खोल सकेंगे लेकिन लोगों को क्रेडिट कार्ड नही दे सकेंगे. इस समय देश में 11 पेमेंट बैंक कार्य कर रहे हैं.

    Sep 4, 2018
  • भारत के नोटों के पीछे कौन-कौन से चित्र बने हुए हैं?

    दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जिसकी अपनी करेंसी नहीं है. लगभग हर देश अपनी मुद्रा पर अपने देश के किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति की तस्वीर लगाने के साथ साथ अपने देश की किसी विशिष्ट पहचान वाली चीज की फोटो जरूर लगाता है. भारत के सभी नोटों पर महात्मा गाँधी की फोटो के साथ साथ अन्य इमारतों जैसे लाल किला और साँची स्तूप तथा हाथी, बाघ इत्यादि की फोटो छापी जाती है.

    Jul 18, 2018
  • असली और नकली नोटों में अंतर कैसे पहचानें

    आरबीआई के एक अनुमान में कहा गया है कि भारत में वित्त वर्ष 2017 में नकली नोटों की संख्या में 20% की वृद्धि हुई है और यह संख्या 7.62 लाख नोटों तक पहुंच गई है. नकली नोटों में सबसे अधिक संख्या 500 और 2000 रुपये के नोटों की है. आम लोगों की जागरूक को बढ़ाने के लिए हमने इस लेख में यह बताने का प्रयास किया है कि लोग किन-किन फीचर्स को देखकर पता लगा सकते हैं कि कोई नोट असली है या नकली.

    Jul 17, 2018
  • भारतीय नोटों पर गाँधी जी की तस्वीर कब से छपनी शुरू हुई थी?

    एक RTI के जवाब में केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बताया था, कि नोट के दाहिनी तरफ गांधी जी की तस्वीर को छापने की सिफारिश 13 जुलाई 1995 को RBI ने केंद्र सरकार को की थी. इसके बाद आरबीआई ने 1996 में नोटों में बदलाव का फैसला लिया और अशोक स्तंभ की जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के फोटो का इस्तेमाल किया गया.

    Jul 10, 2018
  • नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”

    भारत में करेंसी नोटों को छापने का कम भारत की रिज़र्व बैंक के जिम्मे है. एक रुपये के नोट को छोड़कर सभी नोटों पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. किसी भी नोट पर “मैं धारक को 100 या 500 रूपए अदा करने का वचन देता हूँ” जरूर लिखा होता है यह RBI के गवर्नर की शपथ होती है कि जिसके पास भी यह नोट है उसको हर हाल में उसकी लिखी गयी कीमत देने का दायित्व RBI के गवर्नर का है.

    Jun 21, 2018
  • सबसे ज्यादा NPA वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सूची

    भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 31 मार्च, 2004 से दी गयी नयी परिभाषा के अनुसार, जब कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेता है और लोन लेने की तिथि से 90 दिन बाद भी ब्याज या मूलधन का भुगतान करने में विफल रहता है तो उसको दिया गया ऋण, गैर निष्पादित परिसंपत्ति (नॉन– परफॉर्मिंग असेट) माना जाता है. 31 दिसंबर, 2017 तक देश के अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल गैर-निष्पादित संपत्तियां 8.4 ट्रिलियन रुपये तक पहुँच गयी थीं, जिसमे सबसे अधिक NPA; (24%) सार्वजनिक क्षेत्र के स्टेट बैंक का है.

    May 7, 2018