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वन्य जीव और उनका संरक्षण

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भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं?

Jun 13, 2017
प्रकृति और अन्य वन्यजीव प्रजातियों के महत्व को पहचानने के लिए वन्यजीवों का संरक्षण आवश्यक है। लुप्तप्राय पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान के साथ रक्षा करना भी ज़रूरी है।सबसे प्रमुख चिंता का विषय यह है कि वन्यजीवों के निवासस्थान की सुरक्षा किस प्रकार की जाए ताकि भविष्य में वन्यजीवों की पीढ़ियां और यहां तक की इंसान भी इसका आनंद ले सकें. यह लेख वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आवश्यक चरणों से संबंधित है।

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याक "ग्रूटिंग ऑक्स": एक नजर तथ्यों पर

Aug 26, 2016
याक दो प्रकार के होते हैं: घरेलू और जंगली। घरेलू याक छोटे होते हैं और इनके शरीर पर घने बाल होते हैं और शायद इनकी उत्पत्ति जंगली तिब्बती याक से हुई थी। घरेलू याक का इस्तेमाल यात्रा और समान ढोने वाले जानवरों के रूप में किया जाता है। याक को उसके दूध, मांस, ऊन और गोबर के लिए मूल्यवान माना जाता है। जंगली याक को सबसे ज्यादा खतरा और नुकसान शिकारियों से रहता है। उनकी वर्तमान स्थिति "असुरक्षित" (vulnerable) है। जंगली नर याक का वजन 2200 पाउंड तक होता है और इसकी ऊंचाई 6.5 फुट होती है। मादा याक की ऊंचाई नर याक की तुलना में एक-तिहाई होती है।

काला हिरण या कृष्णमृग (भारतीय मृग): एक नज़र तथ्यों पर

Aug 22, 2016
काले हिरन (एंटीलोप सेरवीकप्रा) को भारतीय मृग अथवा हिरन के रूप में भी जाना जाता है। इसकी ऊंचाई 74 से 84 सेमी. तक होती है। नर हिरन का वजन 20-57 किलोग्राम होता है जबकि मादा हिरन का वजन औसतन 20-33 किलोग्राम होता है। यह 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भाग सकता है। इसका जीवन काल 10 से 15 वर्ष तक होता है।

IUCN रेड डाटा बुक का क्या महत्व है?

Jul 25, 2016
आईयूसीएन लाल सूची (1964 में स्थापित) एक राज्य या देश की सीमा के भीतर पशु, कवक और पादप प्रजातियों की मौजूदगी के बारे में सबसे विस्तृत रिपोर्ट देती है | अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) विश्व-स्तर पर विभिन्न जातियों की संरक्षण-स्थिति पर निगरानी रखने वाला सर्वोच्च संगठन है।

भारत में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered)10 पक्षी प्रजातियों की सूची

Jul 21, 2016
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने 2013 के लिए भारत में देखी जाने वाली पक्षियों की दस प्रजातियों को गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इनमें ग्रेट साइबेरियन क्रेन, गोडावण (Indian Bustard), सफेद पीठ वाला गिद्ध, लाल– सिर वाला गिद्ध, जंगली उल्लू और सफेद पेट वाला बगुला आदि शामिल हैं।

साइबेरियन क्रेन या स्नो क्रेनः तथ्यों पर एक नजर

Jul 21, 2016
साइबेरियन क्रेन (Leucogeranus leucogeranus) साइबेरियन ह्वाइट क्रेन या स्नो क्रेन (हिम सारस) के नाम से भी जाने जाते हैं। साइबेरियन क्रेन करीब– करीब बर्फ जैसे सफेद होते हैं, सिवाए उनके काले प्राथमिक पंख जो उड़ने के दौरान दिखाई देते हैं | इनकी आबादी पश्चिमी एवं पूर्वी रूस के आर्कटिक टुंड्रा में मिलती है।

हिम तेंदुआः महत्वपूर्ण तथ्यों पर एक नजर

Jul 21, 2016
हिम तेंदुआ (पैंथेरा अनिसया सिंक. अनिसया) एक बड़ी बिल्ली है जो मध्य और दक्षिण एशिया के पहाड़ी क्षेत्र में पाई जाती है। यह IUCN की लाल सूची में विलुप्तप्राय प्रजातियों में सूचिबद्ध है। वर्ष 2013 में लगाए गए अनुमानों के अनुसार इन तेंदुओं की वैश्विक आबादी 4,080 से 6,590 के बीच थी। ये तेंदुए 30 फीट तक छलांग लगा सकते हैं।

दक्षिण एशियाई नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिनः तथ्यों पर एक नजर

Jul 20, 2016
दक्षिण एशियाई नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन, मीठे पानी या नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन होती है जो भारत, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान में पाई जाती है। इसकी दो प्रजातियां होती हैं– गंगा नदी डॉल्फिन और सिंधु नदी डॉल्फिन | गंगा नदी डॉल्फिन मुख्य रूप से गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों एवं इनकी सहायक नदियों में बांग्लादेश, भारत और नेपाल में पाई जाती हैं |

एशियाई चीताः तथ्यों पर एक नजर

Jul 19, 2016
एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus) ( हिन्दी के 'चीता' से “cheetah”, जो संस्कृत शब्द चित्रक से बना है जिसका अर्थ है "धब्बेदार") को आजकल ईरानी चीता भी कहा जाने लगा है। फिलहाल यह सिर्फ ईरान में पाया जाता है। कभी– कभी इसे बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में भी देखा गया है। भारत में इसे भारतीय चीता कहते हैं हालांकि अब यह भारत में नहीं पाया जाता।

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: मध्य प्रदेश में सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व

Jul 19, 2016
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में सतपुड़ा के मैकाल रेंज में स्थित है। यह राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिजर्व के रूप में लोकप्रिय है। यह मंडला और कालाघाट के दो जिलों में फैला हुआ है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1879 में एक आरक्षित वन घोषित कर दिया गया था और इसके बाद 1933 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में इसका पुनर्मूल्यांकन किया गया। 1955 में आगे चलकर एक राष्ट्रीय पार्क बना।

शेर के मुंह जैसा बन्दर-मकाक (मकाका सिलेनस): तथ्यों पर एक नजर

Jul 19, 2016
शेर के मुंह जैसा बन्दर-मकाक (वानर), एक पुरानी दुनिया का बन्दर (Old World monkey) है जो दक्षिण भारत के पश्चिमी घाटों में पाया जाता है। शेर के मुंह जैसा वाले मकाक के गर्दन पर शेर की तरह बड़े– बड़े बाल होते हैं और एक पूंछ होती है जिससे यह शेर जैसा दिखता है। इसका वैज्ञानिक नाम मकाका सिलेनस है।

क्या आप लाल पांडा के बारे में ये तथ्य जानते हैं?

Jul 18, 2016
लाल पांडा (अलुरस फलजेन– Ailurus fulgens) नेपाल, भारत, भूटान, तीन, लाओस और म्यांमार के पहाड़ी जंगलों में पाए जाते हैं। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है, ये लाल रंग के होते हैं, इनके शरीर पर सफेद और काली धारियां होती हैं। कहा जाता है कि फायरफॉक्स वेब ब्राउजर (firefox browser) का नाम भी लाल पांडा के नाम के नाम पर रखा गया है।

क्या आप ब्लू ह्वेल्स के बारे में ये बातें जानते हैं?

Jul 18, 2016
ब्लू ह्वेल पृथ्वी ग्रह पर पाया जाने वाला सबसे बड़ा पशु है। यह दुनिया के सभी महासागरों में पाया जाता है। आमतौर पर ये गर्मियों का महीना आर्कटिक सागर और सर्दियों में दक्षिणी (गर्म) सागरों में बितातीं हैं। ब्लू ह्वेल बहुत ही पुराने जीवों में से है– ये पृथ्वी पर 540 लाख वर्षों से मौजूद हैं। 20 शताब्दी के पूर्वार्द्ध में जब मछुआरों ने बड़े पैमाने पर ब्लू ह्वेलों का शिकार करना शुरु किया था तो विलुत्प्राय होने की कगार पर पहुंच गईं थीं। आज करीब 20000 ह्वेल जीवित हैं।

क्या आप ह्वेल मछलियों के बारे में ये बातें जानते हैं?

Jul 18, 2016
ह्वेल सीटेशीअ (cetacean) प्रजाति से ताल्लुक रखती हैं। इसमें ह्वेल, डॉल्फिन और पॉर्पस आते हैं। ह्वेल को दो उप–वर्गों में विभाजित किया जाता हैः बलीन और दांत वाली ह्वेल। बलीन ह्वेल में उसके उपरी जबड़े पर कंधी के जैसे झालर होते हैं, जिसे बलीन कहा जाता है। ह्वेल अपने आस–पास के माहौल का पता प्रतिध्वनि के वापस आने में लगने वाले समय (echolocation) के आधार पर लगाती हैं।

भारतीय गिद्ध विलुप्त क्यों हो रहे हैं– एक संपूर्ण विश्लेषण

Jul 15, 2016
1980 के दशक में भारत में सफेद पूंछ वाले गिद्धों की संख्या करीब 80 मिलियन (800 लाख) थी। आज (2016) इनकी संख्या 40 हजार से भी कम हो चुकी है। यह दुनिया में किसी भी पक्षी प्रजाति की सबसे तेजी से हुई कमी है। गिद्धों की संख्या में हुई कमी की वजह से वर्ष 2015 तक पर्यावरण स्वच्छता के लिए करीब 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुआ है।

सरिस्का टाइगर रिजर्वः तथ्यों पर एक नजर

Jul 14, 2016
सरिस्का टाइगर रिजर्व अरावली हिल्स की गोद में राजस्थान के अलवर जिले में है। सरिस्का टाइगर रिजर्व या सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान अलवर जिले में शिकार करने के लिए आरक्षित क्षेत्र था। वर्ष 1955 में इसे वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा मिला और वर्ष 1978 में यह सरिस्का टाइगर रिजर्व बना। यह 866 वर्ग किमी के इलाके में फैला है। सरिस्का रॉयल बंगाल टाइगर और तेंदुआ के लिए प्रसिद्द हैं।

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, बाघों का स्वर्गः तथ्य एक नजर में

Jul 14, 2016
जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है | इसकी स्थापना विलुप्तप्राय बंगाल टाइगरों की रक्षा के लिए 1936 में की गई थी। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया है। प्रोजेक्ट टाइगर पहल के तहत आने वाला यह पहला उद्यान था। इसका क्षेत्रफल 520.82 वर्ग मील है।

गिर राष्ट्रीय उद्यानः एशियाई शेरों का घर

Jul 13, 2016
गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों की जीवित आबादी का अंतिम आश्रय स्थल है। यह उद्यान गुजरात के 1412 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। मई 2015 में एशियाई शेरों की गई 14वीं जनगणना के अनुसार इनकी आबादी बढ़ कर 523 हो गई थी (वर्ष 2010 में की गई पिछली जनगणना की तुलना में 27% अधिक)। वर्तमान में गिर राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य में 109 नर, 201 मादा और 213 युवा/ शिशु/ शेर हैं।

दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, 'द गार्डन ऑफ ईडन': तथ्यों पर एक नजर

Jul 13, 2016
दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश के लखिमपुर खीरी और बहराइच जिलों में संरक्षित क्षेत्र है। यह 1,284.3 किमी (495.9 वर्ग मील) में फैला है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 110 से 185 मी (361 से 607 फीट) है। इसकी उत्तर– पूर्वी सीमा नेपाल से लगी है। यह राष्ट्रीय उद्यान विभिन्न प्रकार के पक्षियों का आवास स्थान है। इनमें जंगली तीतर, चरस (Bengal Florican) और ग्रेट स्लेटी कठफोड़वा (Great Slaty Woodpecker) शामिल हैं।

दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यानः हंगुल का घर

Jul 12, 2016
दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1981 में हुई थी और यह जम्मू और कश्मीर के उच्च शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है जो श्रीनगर से मात्र 22 किलोमीटर की दूरी पर है। समुद्र तल से उद्यान की औसत ऊंचाई 2990 मीटर है। उद्यान 141 किलोमीटर में फैला है। उद्यान में पाए जाने वाले मुख्य पेड़ हैं– हिमालयी नम शीतोष्ण सदाबहार, नम पर्णपाती और झाड़ियां, देवदार, चीड़ एवं शाहबलूत (ओक)। दाचीगाम का अर्थ है– दस गांव।

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