Search
  1. Home |
  2. भारत दर्शन |
  3. विश्व विरासत स्थल

विश्व विरासत स्थल

Also Read in : English

राजस्थान के पहाड़ी किले: एक नजर इन विश्व विरासत स्थलों के तथ्यों पर

Aug 26, 2016
राजस्थान के पहाड़ी किले जिसमें चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, सवाई माधोपुर, झालावाड़, जयपुर और जैसलमेर के 6 राजसी किले शामिल हैं, लगभग बीस किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए हैं। इन किलों में 8वीं शताब्दी से 18 वीं शताब्दी तक की राजपूताना साम्राज्य की विरासत को देखा जा सकता है।

Latest Videos

भारत की पर्वतीय रेलवे: एक नजर तथ्यों पर

Aug 26, 2016
दार्जिलिंग हिमालयी रेलवे, नीलगिरि पर्वतीय रेलवे, और कालका-शिमला रेलवे को क्रमशः 1999, 2005 एवं 2008 में यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर स्थल का दर्जा प्रदान किया गया था । दार्जिलिंग हिमालयी रेलवे (पश्चिम बंगाल) को 1881 में शुरू किया गया था। 46 किलोमीटर की लंबाई और सिंगल रेलवे ट्रैक वाले नीलगिरि पर्वतीय रेलवे को 1908 में शुरू किया गया था। 96 किलोमीटर की सिंगल रेलवे ट्रैक वाले कालका शिमला रेलवे को 9 नवंबर, 1903 को यातायात के लिए शुरू किया गया था।

हुमायूँ का मकबरा (1993), दिल्ली: तथ्यों पर एक नजर

Aug 25, 2016
हुमायूं की मृत्यु 1556 में हुई थी, और उसकी विधवा हमीदा बानो बेगम जिसे हाजी बेगम के रूप में भी जाना जाता है, उसने हूमांयू की मृ्त्यु के चौदह वर्षों के बाद 1569 में इस मकबरे (दिल्ली) का निर्माण कार्य शुरू किया था। मकबरे का निर्माण 15 लाख रुपये (1.5 मिलियन) की लागत से किया गया था। इस मकबरे का वास्तुकार मिरक मिर्जा घियाथ (Mirak Mirza Ghiyath) नामक एक फारसी था।

बोधगया में महाबोधि मंदिर परिसर (एक विश्व विरासत स्थल): एक नज़र तथ्यों पर

Aug 23, 2016
महाबोधि मंदिर परिसर भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थानों में से एक है और विशेष रूप से इसे आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए जाना जाता है। पहले मंदिर का निर्माण स्रमाट अशोक ने तीसरी शताब्दी ई.पू किया था और वर्तमान मंदिरों को 5वीं या 6ठीं शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान निर्मित किया गया था। यह वह स्थान है जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां ज्ञान प्राप्त किया था।

रानी की वाव (रानी की बावड़ी): विश्व धरोहर स्थल के बारे में तथ्य

Aug 12, 2016
रानी– की– वाव (रानी की बावड़ी) गुजरात राज्य के पाटण में स्थित है। इसका निर्माण 11वीं सदी में एक राजा की याद के तौर पर करवाया गया था। भारतीय उपमहाद्वीप में बावड़ियों को पानी के भंडारण की प्रणाली माना जाता है। रानी– की– वाव 'वास्तुशिल्पियों' की क्षमता को दर्शाता है। यह कुंआ संपत्ति के पश्चिमी किनारे पर बना है और इसमें शाफ्ट बने हैं, इसका व्यास 10 मीटर और गहराई 30 मीटर है।

महाबलीपुरम के स्मारकों का समूहः विश्व धरोहर स्थल के बारे में तथ्य

Aug 10, 2016
महाबलीपुरम के स्मारक भारत के तमिलनाडु राज्य के कांचीपुरम जिले में बंगाल की खाड़ी के कोरोमंडल तट पर स्थित हैं। यहां करीब 40 अभयारण्य हैं जिनमें दुनिया का सबसे बड़ा खुली– हवा वाला चट्टानी आश्रय स्थल भी है। इन स्मारकों में शामिल हैं– धर्मराज रथ, अर्जुन रथ, भीम रथ, द्रौपदी रथ, नकुल सहदेव रथ के पांच रथ और गणेश रथ भी है। वर्ष 1984 में इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

महान चोल मंदिरः विश्व धरोहर स्थल के बारे में जानकारी

Aug 10, 2016
महान चोल मंदिरों का निर्माण चोल साम्राज्य के शासकों ने करवाया था। ये मंदिर पूरे दक्षिण भारत और आस– पास के द्वीपों में फैले हैं। इन स्थानों पर 11वीं और 12वीं सदी में बने तीन मंदिर– गंगाईकोंडाचोलीश्वरम का बृहदेश्वर मंदिर (राजेन्द्र प्रथम द्वारा निर्मित,1035 में बन कर तैयार हुआ), तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर और दारासुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर( राजराजा द्वितीय द्वारा बनवाया गया) हैं।

जंतर मंतर, जयपुरः विश्व धरोहर स्थल के तथ्यों पर एक नजर

Aug 9, 2016
जयपुर, राजस्थान का जंतर मंतर स्मारक उन्नीस वास्तु खगोलीय उपकरणों का संकलन है। इसका निर्माण राजपूत राजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा करवाया गया था। यह 1738 ई. में बन कर पूरा हुआ था। राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने पूरे भारत में 5 जंतर–मंतर बनवाई थी | ये हैं:- दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा हैं।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस ( भूतपूर्व विक्टोरिया टर्मिनस): तथ्यों पर एक नजर

Aug 9, 2016
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (इसे पहले विक्टोरिया टर्मिनस स्टेशन के नाम से जाना जाता था) मुंबई में है और भारत में विक्टोरियन वास्तुकला का उत्कृष्ट उदारहण है। इस भवन का डिजाइन ब्रिटिश शिल्पकार एफ. डब्ल्यू. स्टीवेंस ने बनाया था| वर्ष 1878 में इसका निर्माण कार्य शुरु हुआ था और दस वर्षों के बाद यह बनकर तैयार हुआ। यह इस उपमहाद्वीप का पहला टर्मिनस स्टेशन था।

वेल्हा (गोवा) में चर्च और आश्रमः तथ्यों पर एक नजर

Aug 8, 2016
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित गोवा राज्य के वेल्हा में चर्च और आश्रम पुर्तगाली शासन के युग से ही हैं। 16वीं और 17वीं शताब्दी के बीच पुराने गोवा में व्यापक स्तर पर चर्चों और गिरजाघरों का निर्माण किया गया था, इनमें शामिल हैं– बेसिलिका ऑफ बोम जीसस, सेंट कैथेड्रल, सेंट फ्रांसिस असीसी के चर्च और आश्रम, चर्च ऑफ लेडी ऑफ रोजरी, चर्च ऑफ सेंट. ऑगस्टीन और सेंट कैथरीन चैपल।

भीमबेटका पाषाण आश्रयः तथ्यों पर एक नजर

Jul 26, 2016
भीमबेटका की गुफाएं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हैं। ये पाषाणी आश्रय मध्य भारतीय पठार के दक्षिणी छोर पर विंध्य पर्वतमाला के तलहटी में हैं। डॉ. वी.एस. वाकाणकर (प्रख्यात पुरातत्वविदों में से एक), ने 1958 में इन गुफाओं की खोज की थी। 'भीमबेटका' शब्द, 'भीम बाटिका' से बना है। इन गुफाओं का नाम महाभारत के पांच पांडवों में से एक 'भीम' के नाम पर रखा गया है। भीमबेटका का अर्थ है– भीम के बैठने का स्थान।

चंपानेर– पावागढ़ पुरातात्विक उद्यानः तथ्यों पर एक नजर

Jul 26, 2016
यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल चंपानेर– पावागढ़ पुरातत्व उद्यान, भारत के गुजरात राज्य के पंचमहल जिले में स्थित है। यह उद्यान गुजरात के सुल्तान महमूद बेगदा द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक शहर चंपानेर के पास है। पावागढ़ की पहाड़ी लाल–पीले रंग के चट्टानों से बनी है जो भारत की सबसे पुरानी चट्टानों में से एक है। यह पहाड़ समुद्र तल से करीब 800 मीटर ऊंचा है।

यूनेस्को द्वारा घोषित भारत के 32 विश्व धरोहर स्थल

Jul 25, 2016
यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल विशेष भौतिक या सांस्कृतिक महत्व का कोई भी स्थान जैसे जंगल, झील, भवन, द्वीप, पहाड़, स्मारक, रेगिस्तान, परिसर या शहर, हो सकता है। पूरी दुनिया में फिलहाल 981 विश्व धरोहर स्थल हैं। हालांकि इनमें से 32 विश्व विरासत संपत्तियां भारत में हैं। इन 32 में से 25 सांस्कृतिक संपत्तियां और 7 प्राकृतिक स्थल हैं।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के लिए 15 भारतीय स्थलों की दावेदारी

Jul 22, 2016
यूनेस्को विश्व भर में मानवता के लिए उत्कृष्ट माने जाने वाले सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासतों की पहचान, संरक्षण और सुरक्षा को प्रोत्साहित करता है। विश्व विरासत समिति ने भारत में विश्व सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विरासत स्थलों की सूची में समावेशन के योग्य बिशनुपुर मंदिर, स्वर्ण मंदिर, लोटस टेम्पल , मुगल गार्डन और माजुली नदी द्वीप आदि शामिल हैं।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान: दुनिया के विख्यात एक ‘सींग वाले गैंडे का घर’

Jul 5, 2016
‘काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान’ असम राज्य के दो जिलों के अंदर बसा एक राष्ट्रीय उद्यान है। इनमें एक जिला एक असम राज्य के नौगांव जिले का कलियाबोर उपखंड तथा दूसरा गोलाघाट जिले का बोकाघाट उपखंड शामिल है। काजीरंगा उद्यान, 378 किमी2 (146 वर्ग मील) को कवर करता है। यह एक वैश्विक विरासत स्थल है। इस पार्क में एक सींग वाले गैंडों की विश्व की दो-तिहाई आबादी यहां निवास करती है।

कोणार्क का सूर्य मंदिर: भारत का ‘ब्लैक पैगोडा’

Mar 23, 2016
'कोणार्क का सूर्य मंदिर' सूर्य देवता को समर्पित एक मंदिर है,जो भारत में पुरी (ओडिशा राज्य) के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 1250 ई. में कराया था| यूनेस्को ने वर्ष 1984 में इसे 'विश्व विरासत स्थल' का दर्जा प्रदान किया था| समुद्री यात्रा करने वाले लोग एक समय में इसे 'ब्लैक पगोडा' कहते थे|

एलोरा की गुफाएँ: हिन्दू, जैन व बौद्ध धर्म से संबन्धित गुफाएँ

Mar 22, 2016
एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के उत्तर-पश्चिम में 29 किमी. (18 मील) की दूरी पर स्थित है| इन गुफाओं का निर्माण छठी से बारहवीं सदी के बीच कलचूरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट वंशों द्वारा कराया गया था| वर्ष 1983 में युनेस्को ने एलोरा की गुफाओं को ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया | ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म से संबन्धित हैं|

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

Mar 18, 2016
ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क भारत में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित है| 1171 वर्ग किमी. में विस्तृत इस पार्क को वर्ष 1999 में ‘राष्ट्रीय पार्क’ का दर्जा प्रदान किया गया था और बाद में 23 जून, 2014 को युनेस्को द्वारा इसे ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया| यहाँ जंतुओं व पेड़-पौधों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं|

फ़तेहपुर सीकरी:मुगलकालीन स्थापत्य का नमूना

Mar 17, 2016
फ़तेहपुर सीकरी का निर्माण सोलहवीं सदी के उत्तरार्द्ध में मुगल बादशाह अकबर ने कराया था| फ़तेहपुर सीकरी मात्र दस वर्षों तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही थी| अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी में रहने वाले सूफी संत शेख सलीम चिश्ती के सम्मान में अपनी राजधानी को आगरा से फ़तेहपुर सीकरी स्थानांतरित कर दिया था| युनेस्को ने इसे ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया है|

सांची स्तूप : भारत का प्रसिद्ध बौद्ध स्मारक

Mar 16, 2016
मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन ज़िले में स्थित सांची स्तूप एक बौद्ध स्मारक है, जिसका निर्माण सम्राट अशोक ने तीसरी शती ई.पू में कराया था| सांची स्तूप में बुद्ध के अवशेष पाये जाते हैं | सांची के स्तूप का निर्माण बौद्ध अध्ययन एवं शिक्षा केंद्र के रूप में किया गया था | वर्ष 1989 में इसे युनेस्को द्वारा ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया | सांची में स्थित स्तूप संख्या-1 या 'महान स्तूप' भारत की सबसे पुरानी शैल संरचना है |

12 Next   

LibraryLibrary

Newsletter Signup

Copyright 2018 Jagran Prakashan Limited.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK